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टू द पॉइंट

शासन व्यवस्था

वर्षांत समीक्षा, 2019 पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय

  • 13 Jun 2020
  • 11 min read

परिचय

प्रति वर्ष भारत सरकार के सभी मंत्रालय अपनी वार्षिक समीक्षा जारी करते हैं, जिनके अंतर्गत गत वर्ष में मंत्रालय द्वारा अर्जित उपलब्धियों, चुनौतियों और भावी योजनाओं के विषय में संक्षिप्त ब्यौरा दिया जाता है। प्रीलिम्स के नज़रिये से देखें तो संबंधित मंत्रालय के वार्षिक ब्यौरे में निहित सभी Terms महत्त्वपूर्ण हैं, इनके तथ्यात्मक पक्ष के साथ-साथ आप विवरणात्मक पक्ष पर विशेष ध्यान दीजिये। मुख्य परीक्षा के लिये उत्तर लेखन में मंत्रालय द्वारा दिये गए विवरण को शामिल करते हुए अपने उत्तर को और अधिक प्रमाणिक एवं प्रभावी बना सकते हैं।   

विभिन्न चक्रवाती तूफान

भारत की जलवायु पर IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी बयान के अनुसार, भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर आने वाले चक्रवातों की संख्या के मामले में वर्ष 2019 असाधारण था। वर्ष 2019 के दौरान भारतीय तटों से टकराने वाले प्रमुख चक्रवात निम्नलिखित हैं:

इससे पहले वर्ष 1893, 1926, 1930 और 1976 के दौरान हिंद महासागर में इसी तरह की चक्रवाती गतिविधियाँ दर्ज की गई थी। इन वर्षों में एक कैलंडर वर्ष के दौरान अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में दोनों में उत्पन्न चक्रवातों की संख्या दस तक पहुँच गई थी।

उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclones)

  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात कम दबाव प्रणाली हैं जो उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के समुद्र में महासागरों के ऊपर विकसित होते हैं। उष्णकटिबंधीय चक्रवात एक तूफान है जो विशाल निम्न दबाव केंद्र और भारी तड़ित-झंझावतों द्वारा चरितार्थ होता है और जो तीव्र हवाओं व घनघोर वर्षा की स्थिति उत्पन्न करता है। 
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति तब होती है जब नम हवा के ऊपर उठने से गर्मी पैदा होती है, जिसके फलस्वरूप नम हवा में निहित जलवाष्प का संघनन होता है। इनकी उत्पत्ति एवं विकास के लिये अनुकूल स्थितियाँ हैं- वृहद् समुद्री सतह जहाँ तापमान 27°C से अधिक हो, कोरियालिस बल का होना, उर्ध्वाधर वायु कर्तन (Vertical Wind Shear) का क्षीण होना, समुद्री तल तंत्र का ऊपरी अपसरण आदि।
  • ऐसे चक्रवात मुख्यतः 30° उत्तरी एवं 30° दक्षिणी अक्षांशों के मध्य आते हैं क्योंकि इनकी उत्पत्ति हेतु उपरोक्त दशाएँ यहाँ विद्यमान होती हैं। भूमध्य रेखा पर निम्न दाब के बावजूद नगण्य कोरियालिस बल के कारण पवनें वृत्ताकार रूप में नहीं चलती, जिससे चक्रवात नहीं बनते। दोनों गोलार्द्धों में 30° आक्षांश के बाद ये पछुआ पवन के प्रभाव में स्थल पर पहुँचकर समाप्त हो जाती हैं।
  • वर्ष 2019 के दौरान अरब सागर में चक्रवातों की सक्रियता बंगाल की खाड़ी की तुलना में अधिक थी। 117 वर्षों में यह केवल दूसरी बार था जब अरब सागर में इतने तीव्र और लगातार चक्रवातों की सक्रियता देखी गई।
  • वर्ष 2019 में उत्तर हिंद महासागर के ऊपर आठ चक्रवाती तूफानों की उत्पत्ति हुई, इनमें से पाँच चक्रवात- वायु, हिक्का, क्यार, महा और पवन अरब सागर में उत्पन्न हुए, जो सामान्यतः से शांत थे। इसके विपरीत, बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न चक्रवातों की संख्या सामान्य से कम रही। बंगाल में खाड़ी में उत्पन्न होने वाले तीन चक्रवात थे- पाबुक, फानी और बुलबुल।
  • बंगाल की खाड़ी में प्रतिवर्ष औसतन पाँच चक्रवातों की उत्पत्ति होती है, लेकिन वर्ष 2019 में यह संख्या अरब सागर में अधिक थी।

जैमिनी उपकरण (GEMINI Device)

  • अक्तूबर 2019 में सरकार ने गगन आधारित समुद्री संचालन और जानकारी- जैमिनी (Gagan Enabled Mariner’s Instrument for Navigation and Information- GEMINI) उपकरण लॉन्च किया।
  • यह उपकरण आपदा संबंधी चेतावनी जारी करेगा, मछुआरों को संभावित मछली क्षेत्र (Potential Fishing Zones- PFZ) के बारे में जानकारी प्रदान करेगा एवं महासागर-स्थिति की भविष्यवाणी (Ocean States Forecasts- OSF) का प्रभावी प्रसार करेगा।
  • भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (Indian National Centre for Ocean Information Services- INCOIS) ने गगन सेटेलाइट प्रणाली (GPS Aided Geo Augmented Navigation- GAGAN) के उपयोग हेतु भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण से (Airports Authority of India- AAI) के साथ साझेदारी की है। 
  • जैमिनी उपकरण के संचालन के लिये गगन प्रणाली के तीन भू-समकालिक उपग्रहों (GSAT-8, GSAT-10 और GSAT-15) का प्रयोग किया जाएगा।
    • गगन संपूर्ण हिंद महासागर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखता है।
    • गगन सेटेलाइट प्रणाली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा विकसित किया गया है।

कृषि-मौसम विज्ञान में प्रगति पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन

(International Symposium on Advances in Agro Meteorology)

कृषि मौसम वैज्ञानिक परिसंघ (Association of Agro Meteorologists- AAM) ने ‘किसानों के जलवायु संबंधी जोखिम प्रबंधन के लिये कृषि-मौसम विज्ञान में प्रगति’ विषय पर नई दिल्ली में तीन दिवसीय (11 से13 फरवरी, 2019 तक) अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया।

कृषि मौसम वैज्ञानिक परिसंघ (Association of Agro Meteorologists- AAM)

  • AAM की स्थापना वर्ष 1999 में हुई थी। 
  • इसका मुख्यालय आनंद कृषि विश्वविद्यालय आनंद, गुजरात में है तथा समग्र भारत में इसकी 17 उप शाखाएँ- हिसार, लुधियाना, पुणे, हैदराबाद, मोहनपुर, पंतनगर, कोयंबटूर, नई दिल्ली, जम्मू, फैज़ाबाद, रायपुर, त्रिशूर, परभणी (महाराष्ट्र), बिहार, भोपाल, मेरठ और कश्मीर में कार्यरत हैं।
  • यह संघ वर्तमान रुचि के विभिन्न विषयों पर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित कर रहा है और वर्ष 1999 से नियमित रूप से Journal of Agrometeorology का प्रकाशन करता है।
  • इस सम्मेलन को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र (ICAR) तथा जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया गया था।
  • कृषि मौसम विज्ञान (Agro Meteorology), मौसम विज्ञान की शाखा है जिसमें फसल, पशुधन उत्पादन और मृदा प्रबंधन के साथ मौसम एवं जलवायु के संबंधों का अध्ययन किया जाता है।
  • अध्ययनों के अनुसार, मौसम कृषि उत्‍पादकता में बदलाव का सबसे बड़ा स्रोत है। विकास के स्तर पर निर्भर रहते हुए, पैदावार में अंतर-वार्षिक परिवर्तनशीलता का लगभग 20 से 80% मौसम की परिवर्तनशीलता से (या तो प्रत्यक्ष भगौलिक दबाव के ज़रिये या कीटों और बीमारियों जैसे अप्रत्‍यक्ष दबाव के ज़रिये) उपजा है।
  • कृषि उत्पादन प्रणालियों को पर्यावरणीय परिस्थितियों और खेती प्रबंधन द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
  • जलवायु संवेदनशील नीतियों और कार्यों के माध्यम से कृषि प्रणालियों का लचीलापन प्राप्त किया जा सकता है।
  • कृषि में जलवायु संबंधी जोखिमों की पहचान, समझ एवं विश्लेषण और उनके संभावित समाधान हितधारकों द्वारा खोजे जाने वाले प्रमुख मुद्दे हैं।

राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान

(National Institute of Ocean Technology-NIOT)

  • राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) का रजत जयंती समारोह चेन्नई में मनाया गया। 
  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत NIOT की स्थापना नवंबर 1993 में तत्कालीन महासागर विकास विभाग (Department of Ocean Development) द्वारा एक स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी। 
    • NIOT का प्रबंधन शासकीय परिषद द्वारा किया जाता है और निदेशक इस संस्थान का प्रमुख होता है I 
  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत NIOT को आरंभ करने का मुख्य उद्देश्य भारतीय अनन्य आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone-EEZ), जो भारत के भूमि क्षेत्र का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है, के निर्जीव एवं सजीव संसाधन, के उपयोग से संबंधित विभिन्न प्रौद्योगिकी समस्याओं को सुलझाने के लिये विश्वसनीय देशी तकनीक विकसित करना है।
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