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समुद्री मत्स्य पालन बिल

  • 04 Sep 2019
  • 7 min read

चर्चा में क्यों?

समुद्री मत्स्य विनियमन और प्रबंधन (MFRM) विधेयक 2019 को चर्चा और सुझावों हेतु पब्लिक डोमेन में रखा गया है। इस विधेयक को लाने का कारण संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS), 1982 और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियम हैं, जिनके अनुसार भारत को अपने मत्स्य पालन क्षेत्र को विनियमित करने हेतु कानूनों का निर्माण करना है।

संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि

UNCLOS (United Nations Convention on the Law of the Sea)

  • यह एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जो विश्व के सागरों और महासागरों पर देशों के अधिकार एवं ज़िम्मेदारियों का निर्धारण करता है तथा समुद्री साधनों के प्रयोग के लिये नियमों की स्थापना करता है।
  • संयुक्त राष्ट्र ने इस कानून को वर्ष 1982 में अपनाया था लेकिन यह नवंबर 1994 में प्रभाव में आया।
  • भारत ने वर्ष 1995 में UNCLOS को अपनाया, इसके तहत समुद्र के संसाधनों को तीन क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है- आंतरिक जल (IW), प्रादेशिक सागर (TS) और अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ)।

आंतरिक जल (Internal Waters-IW): यह बेसलाइन की भूमि के किनारे पर होता है तथा इसमें खाड़ी और छोटे खंड शामिल हैं।

प्रादेशिक सागर (Territorial Sea-TS): यह बेसलाइन से 12 समुद्री मील की दूरी तक फैला हुआ होता है। इसके हवाई क्षेत्र, समुद्र, सीबेड और सबसॉइल पर तटीय देशों की संप्रभुता होती है एवं इसमें सभी जीवित और गैर-जीवित संसाधन शामिल हैं।

अनन्य आर्थिक क्षेत्र ( Exclusive Economic Zone-EEZ): EEZ बेसलाइन से 200 नॉटिकल मील की दूरी तक फैला होता है। इसमें तटीय देशों को सभी प्राकृतिक संसाधनों की खोज, दोहन, संरक्षण और प्रबंधन का संप्रभु अधिकार प्राप्त होता है।

Territorial Sea Baseline

समुद्री मत्स्य विनियमन और प्रबंधन (MFRM) विधेयक से जुड़े मुद्दे-

  • चूँकि मत्स्य राज्य सूची का विषय है तथा IW और TS में मछली पकड़ना संबंधित राज्यों के दायरे में आता है। इसके अतिरिक्त TS में अन्य गतिविधियाँ तथा इससे परे EEZ में मछली पकड़ना संघ सूची का विषय है। अब तक किसी भी केंद्र सरकार ने पूरे EEZ को कवर करने के लिये किसी प्रकार का प्रावधान नहीं किया है। विधेयक में इसके लिये प्रयास किये गए है।
  • देश में EEZ की वार्षिक मत्स्य क्षमता लगभग 5 मिलियन टन है। इसे विवेकपूर्ण रूप से उपयोग करना सरकार की एक महत्त्वपूर्ण प्राथमिकता है जिसे एक नए मत्स्य मंत्रालय के गठन द्वारा रेखांकित किया गया था।
  • विकसित देशों का तर्क है कि विकासशील देश अपने संबंधित EEZ में मत्स्य पालन का प्रबंधन करने वाले कानूनों के अभाव के चलते अनियमित रूप से मछली पकड़ते हैं। MFRM विधेयक इस समस्या का हल प्रदान करेगा तथा वर्ष 2001 के दोहा दौर के बाद से विश्व व्यापार संगठन में मत्स्य पालन हेतु सब्सिडी पर चर्चा करने करने के लिये भारत को मज़बूती प्रदान करेगा।
  • विधेयक में एक दोषपूर्ण प्रावधान है कि प्रादेशिक सागर के बाहर केवल बड़े जहाजों को मछली पकड़ने की अनुमति होगी, जबकि इस क्षेत्र में नियमित रूप से हजारों छोटे जहाज़ मछली पकड़ने का कार्य करते हैं और इससे अपनी आजीविका चलाते हैं। यदि यह विधेयक कानून बन जाता है तो प्रादेशिक सागर के बाहर मछलियाँ पकड़ने की उनकी स्वतंत्रता समाप्त हो जाएगी।
  • विधेयक विदेशी जहाजों द्वारा मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाता है, इस प्रकार यह EEZ का राष्ट्रीयकरण करता है। TS के बाहर EEZ में मछली पकड़ने के इच्छुक एक भारतीय जहाज़ को इसके लिये परमिट प्राप्त करना होगा और छोटे मछुआरों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है।
  • इस विधेयक में महत्त्वपूर्ण क्षेत्रीय मत्स्य समझौतों के साथ समन्वय का अभाव है। यह अन्य तटीय क्षेत्रों के नियमों से भी मेल नहीं खाता है।

आगे की राह

  • यह विधेयक मत्स्य पालन उद्योग के स्थायित्व के लिये आवश्यक है। विधेयक प्रादेशिक सागर पर तटीय राज्यों के अधिकार क्षेत्र का सम्मान भी करता है। यह मछुआरों के लिये सामाजिक सुरक्षा का प्रस्ताव करता है और गंभीर मौसमी घटनाओं के दौरान समुद्र में जीवन की सुरक्षा का प्रावधान भी करता है। राज्य सरकारों, मत्स्य उद्योगों के प्रतिनिधियों और उद्योगों को मछली पकड़ने हेतु अनुमति लेने के भय से पूरे विधेयक का विरोध नहीं करना चाहिये तथा उन्हें अधिक से अधिक "सहकारी संघवाद" के लिये प्रयास करना चाहिये।
  • विभिन्न समुद्री क्षेत्रों (IW, TS और EEZ) हेतु सहकारी संघवाद समुद्री मत्स्य पालन के स्थायी प्रबंधन के लिये महत्त्वपूर्ण है, जिसे अब आदर्श रूप से समवर्ती सूची में शामिल किया जाना चाहिये। छोटे स्तर के मछुआरों को अपने तर्कों के समर्थन के लिये FAO/UN Small-Scale के मत्स्य दिशा निर्देशों का उपयोग करते हुए संपूर्ण प्रादेशिक सागर को मुक्त बनाने की मांग करनी चाहिये। यह उनकी आय को बढ़ाएगा, उपभोक्ताओं हेतु एक स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, तटीय क्षेत्रों का प्रबंधन करेगा तथा मछली पकड़ने पर लगे प्रतिबंध को हटाएगा।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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