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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

‘McrBC’ एक आणविक कैंची

  • 04 Sep 2019
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में पुणे स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (Indian Institute of Science Education and Research- IISER) के वैज्ञानिकों की एक टीम ने ‘McrBC की परमाणु संरचना’ का निर्धारण किया है।

  • McrBC एक जटिल बैक्टीरियल प्रोटीन (Bacterial Protein) है जो एक जीवाणु कोशिका में वायरल संक्रमण को रोकने में मदद करता है और आणविक कैंची (Molecular Scissors) के रूप में कार्य करता है।

प्रमुख बिंदु

  • McrBC की संरचना के इस अध्ययन को पिछले महीने प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं नेचर कम्युनिकेशंस और न्यूक्लिक एसिड रिसर्च (जो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित की गई है) में प्रकाशित किया गया था।
    • इसे आणविक कैंची के कार्य को समझने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया गया है।
  • यह उच्च-रिज़ॉल्यूशन संरचना (High-Resolution Structure) की पहली भारतीय रिपोर्ट है, जिसे इलेक्ट्रॉन क्रायोमाइक्रोस्कोपी (Cryomicroscopy) का उपयोग करके निर्धारित किया जाता है, इसे सामान्यतः क्रायो-EM (Cryo-EM) के रूप में जाना जाता है।
  • McrBC की संरचना के निर्धारण में ’फेज थेरेपी’ (Phage Therapy’) के दीर्घकालिक प्रभाव होते हैं जिनका उपयोग भविष्य में दवा प्रतिरोधी संक्रमणों से निपटने में सहायता प्राप्त करने में किया जा सकता है।
    • फेज (Phages) वायरस के समूह होते हैं जो बैक्टीरिया की कोशिकाओं को संक्रमित करते हैं तथा नष्ट कर देते हैं।
    • फेज थेरेपी बैक्टीरियल संक्रमणों के इलाज के लिये बैक्टीरियोफेज का चिकित्सीय उपयोग है।

McrBC

'आणविक कैंची' (Molecular Scissors)

  • जिस तरह मानव शरीर में वायरस से लड़ने के लिये प्रतिरक्षा प्रणाली होती है, उसी प्रकार बैक्टीरिया में फेज से निपटने के लिये एक विस्तृत रक्षा प्रणाली होती है।
  • ये फेज अपने DNA को बैक्टीरियल सेल में इंजेक्ट करते हैं, जिसमें वे उस वायरस का गुणन करके उसका डुप्लिकेट बनाते हैं और अंततः उस सेल से बाहर निकलकर कई और बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं।
  • संक्रमण को रोकने के लिये जीवाणुओं में विशेष रूप से 'आणविक कैंची' (Molecular Scissors) होती है, जो विशेष रूप से वाह्य DNA को काटती हैं तथा बैक्टीरिया की कोशिकाओं में उनके गुणन को रोकती है।
  • आणविक कैंची न केवल वायरल DNA को काटती है, बल्कि DNA के अन्य वाह्य प्रवेश को भी नियंत्रित करती है। इस प्रकार DNA एक एंटीबायोटिक प्रतिरोध जीन की मेजबानी भी कर सकता है।

स्रोत: द हिंदू

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