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स्टेट पी.सी.एस.

  • 28 Nov 2022
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उत्तर प्रदेश Switch to English

मुख्यमंत्री ने रामनगरी अयोध्या में 41वें रामायण मेले का शुभारंभ किया

चर्चा में क्यों?

27 नवंबर, 2022 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामनगरी अयोध्या में परंपरागत तरीके से होने वाले 41वें रामायण मेले का शुभारंभ किया। यह मेला 30 नवंबर, 2022 तक चलेगा।

प्रमुख बिंदु 

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामायण मेले के द्वितीय दिवस के कार्यक्रम पोस्टर (आवरण छवि) का लोकार्पण भी किया।
  • भारत के सांस्कृतिक व आध्यात्मिक वैभव की पुनर्स्थापना के लिये उत्तर प्रदेश सरकार और रामायण मेला समिति के सदस्यों के सहयोग से प्रतिवर्ष इस मेले का आयोजन किया जाता है।
  • रामायण मेला समिति के संयोजक आशीष कुमार मिश्र ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस पोस्टर का लोकार्पण किया है, उसमें रामायण मेला में होने वाले द्वितीय दिवस के कार्यक्रम के क्रम में राम बारात आगमन, पाँव पूजन की रस्म, चारों भाइयों का अग्नि का फेरा और सभी वर-वधु का ऋषियों से आशीर्वाद प्राप्त करने की लीला को दर्शाया गया है।
  • इस आवरण छवि को उकेरने का कार्य वैष्णवी गुप्ता एवं प्रिया गुप्ता ने किया है। आवरण छवि में भारतीय लोक कला पर आधारित अवध की लोककला को प्रदर्शित किया गया है। इससे पहले पहला पोस्टर श्री राम जन्मभूमि के गर्भगृह से लोकार्पित किया गया था।
  • गौरतलब है कि अयोध्या में रामायण मेला की शुरुआत 1982 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्र ने की थी। उन्होंने उद्घाटन सत्र में ही राम की पैड़ी प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। पहले रामायण मेला में लगातार चार दिन मंत्रियों ने अलग-अलग विकास योजनाओं का ऐलान किया, जो इस समय की विकास योजनाओं में प्रमुख हैं।
  • पहले रामायण मेला में ही परिक्रमा मार्ग को पक्का करवाने, सरयू तट का नया घाट से लेकर गुप्तारघाट तक विस्तार व सांस्कृतिक विकास के लिये राम कथा पार्क के निर्माण की घोषणा कर उन पर काम शुरू किया गया था।
  • 1980 के दशक में रामायण मेला का आकर्षण चरम पर रहा। इसी मेला में श्रीलंका, कोरिया, मलेशिया सहित कई देशों की रामलीला का मंचन किया गया, जो विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।

बिहार Switch to English

‘गंगाजल आपूर्ति योजना’

चर्चा में क्यों?

27 नवंबर, 2022 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजगीर में महत्त्वाकांक्षी ‘गंगाजल आपूर्ति योजना’ का लोकार्पण किया।

प्रमुख बिंदु

  • दूरगामी अभियान ‘जल-जीवन-हरियाली’के तहत गंगा नदी के अधिशेष जल को दक्षिण बिहार के जल संकट वाले शहरों तक ले जाकर पेयजल के रूप में उपयोग करने की यह मुख्यमंत्री की अनूठी परिकल्पना है। उनकी अध्यक्षता में दिसंबर 2019 में गया में हुई कैबिनेट की विशेष बैठक में अतिमहत्त्वाकांक्षी ‘गंगा जल आपूर्ति योजना’को मंज़ूरी दी गई थी।
  • मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जल संसाधन विभाग ने तत्परता से काम करते हुए इतनी बड़ी योजना को कोरोना काल की चुनौतियों के बावजूद तीन साल से कम समय में पूरा कराया है।
  • गंगा जल को 11 शक्तीशाली पंप के ज़रिये हाथीदह से राजगीर, गया, बोधगया और नवादा पहुँचाया गया है। राजगीर में इसके लिये डिटेंशन सेंटर बनाया गया है।
  • गंगा जल पाइपलाइन के ज़रिये 151 किमी. सफर तय करके राजगीर, गया और बोधगया के जलाशयों में पहुँचा है, जहाँ से यह शोधित होकर शुद्ध पेयजल के रूप में रोज लाखों लोगों की प्यास बुझाएगा।
  • इस योजना के तहत राजगीर शहर के 19 वार्डों के करीब 8031 घरों, गया शहर के 53 वार्डों के करीब 75000 घरों और बोधगया शहर के 19 वार्डों के करीब 6000 घरों में शुद्ध पेयजल के रूप में गंगाजल की आपूर्ति की जाएगी। योजना के तहत प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन 135 लीटर शुद्ध जल की आपूर्ति का लक्ष्य है।
  • इसके अलावा शहर के संस्थानों, अस्पतालों, होटलों आदि को भी जल की आपूर्ति की जाएगी, ताकि इन शहरों में बड़ी संख्या में आने वाले पर्यटकों तथा श्रद्धालुओं के लिये भी शुद्ध जल की आपूर्ति हो सके। राजगीर जू सफारी में रखे गए जीव-जंतुओं तथा नेचर सफारी की वनस्पतियों को भी गंगा जल की आपूर्ति होगी।
  • इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जरासंध के अखाड़े के पास जरासंध स्मारक बनवाया जाएगा। इससे पर्यटकों का ज्ञानवर्धन होगा।   

राजस्थान Switch to English

मुख्यमंत्री ने सेई एवं साबरमती नदी पर जलाशयों के निर्माण के लिये 2,554 करोड़ रुपए की मंज़ूरी दी

चर्चा में क्यों?

27 नवंबर, 2022 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उदयपुर की कोटड़ा तहसील में सेई नदी एवं साबरमती नदी पर जलाशयों के निर्माण के लिये 2554.23 करोड़ रुपए के वित्तीय प्रावधान को मंज़ूरी दी। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से पाली एवं सिरोही ज़िलों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

प्रमुख बिंदु 

  • प्रस्ताव के अनुसार, सेई और साबरमती नदी पर बन रहे जलाशयों से पानी प्रेशराईज पाइप लाइन, ग्रेविटी पाइप लाइन एवं टनल के माध्यम से जवाई बांध में छोड़ा जाएगा।
  • जलाशयों का निर्माण पूर्ण होने पर पाली ज़िले के 9 कस्बे (पाली, रोहट, जैतारण, सुमेरपुर, बाली, देसूरी, सोजत, रायपुर, मारवाड़ जंक्शन), 560 गाँव एवं सिरोही ज़िले के शिवगंज कस्बे के साथ ही 178 गाँवों की पेयजल व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी।
  • उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने वर्ष 2022-23 के बजट में पाली एवं सिरोही ज़िले में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित किये जाने के लिये उदयपुर की कोटड़ा तहसील में सेई और साबरमती नदी पर जलाशयों के निर्माण की घोषणा की थी।

राजस्थान Switch to English

आइईडी से निपटने में देश में तीसरे स्थान पर राजस्थान

चर्चा में क्यों?

26 नवंबर, 2022 को राजस्थान पुलिस की टीम ने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) मानेसर में आयोजित राष्ट्रीय काउंटर आइईडी (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त किया।

प्रमुख बिंदु 

  • नई दिल्ली स्थित मुख्यमंत्री सुरक्षा प्रकोष्ठ के डिप्टी एसपी नरेंद्र सिंह की अगुवाई में राजस्थान पुलिस की टीम ने 21 से 26 नवंबर तक आयोजित हुई इस प्रतियोगिता में यह खिताब जीता।
  • एनएसजी के महानिदेशक ने डिप्टी एसपी नरेंद्र सिंह को ट्रॉफी प्रदान कर राजस्थान पुलिस दल को सम्मानित किया।
  • एनएसजी मानेसर में हर वर्ष आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में देशभर से पुलिस और सुरक्षाबलों ने हिस्सा लिया, प्रतियोगिता में राजस्थान पुलिस के 16 जवानों ने डिप्टी एसपी नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में बेहतरीन प्रदर्शन किया।
  • डिप्टी एसपी नरेंद्र सिंह ने बताया कि इस प्रतियोगिता में राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की काउंटर आइईडी क्षमता को परखा जाता है।
  • नरेंद्र सिंह ने बताया कि इस प्रतियोगिता के दौरान अलग-अलग परिस्थितियों से निपटने के कौशल को परखा जाता है, जिसमें आइईडी मिलने से उत्पन्न हुई स्थितियों से विभिन्न टीमों ने अपने-अपने तरीके से निपट कर बेहतरीन प्रदर्शन किया, जिस आधार पर राजस्थान पुलिस की टीम ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। 

राजस्थान Switch to English

हरि सिंह उत्कृष्ट कृत्रिम गर्भाधानकर्त्ता के रूप में सम्मानित

चर्चा में क्यों?

26 नवंबर, 2022 को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर कर्नाटक के बेंगलूरु में आयोजित कार्यक्रम में भारत सरकार के पशुपालन राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने राजस्थान के गंगानगर ज़िले के हरी सिंह गोदारा को कृत्रिम गर्भाधान कार्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये द्वितीय पुरस्कार से नवाजा।

प्रमुख बिंदु 

  • पशुपालन राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने तीन लाख रुपए के नगद पुरस्कार के साथ शॉल ओढ़ाकर तथा गाय- बछड़े की प्रतिमा के साथ कन्नड़ पगड़ी पहनाकर हरी सिंह गोदारा को सम्मानित किया।
  • गौरतलब है कि राष्ट्रीय दुग्ध दिवस को भारत सरकार के पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य विभाग द्वारा ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ योजनांतर्गत पशुपालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पशुपालक, कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्त्ता तथा दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को ‘गोपाल रत्न पुरस्कार’से सम्मानित किया गया।
  • राजस्थान के गंगानगर ज़िले की सुरतगढ़ तहसील के संघर गाँव के हरी सिंह गोदारा ने वर्ष 2019 में गंगमूल डेयरी द्वारा संचालित साहिवाल वंशावली चयन परियोजना अंतर्गत कृत्रिम गर्भाधानकर्त्ता के रूप में अपनी सेवाएँ प्रारंभ की थीं।
  • हरि सिंह द्वारा अब तक 3000 साहिवाल गायों में किये गए कृत्रिम गर्भाधान से 1800 से अधिक बछड़े/बछड़ियों का जन्म हुआ है। 60 प्रतिशत से भी अधिक सफलता दर होने के कारण ही भारत सरकार द्वारा उत्कृष्ट कृत्रिम गर्भाधान कर्त्ता के रूप में हरी सिंह गोदारा को सम्मानित किया गया है। इस संवर्ग में प्रथम स्थान पर ओडिशा के गोपाल राणा तथा तृतीय स्थान पर आंध्र प्रदेश के मच्छेपल्ली रहे।
  • विदित है कि किसानों को ये अवार्ड प्रति वर्ष तीन समूहों [स्वदेशी मवेशी/भैंस की नस्लों को पालने वाले सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान, सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (एआईटी) पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी/दुग्ध उत्पादक कंपनी/डेयरी किसान उत्पादक संगठन पुरस्कार] में दिया जाता है।
  • प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के लिये यह पुरस्कार मिलता है। प्रथम पुरस्कार के तौर पर 5 लाख रुपए की धनराशि, वहीं, द्वितीय स्थान पाने वाले को तीन लाख रुपए की धनराशि तथा तृतीय स्थान वाले को दो लाख रुपए की धनराशि प्रदान की जाती है।    

मध्य प्रदेश Switch to English

मध्य प्रदेश को 41वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में मिला कांस्य पदक

चर्चा में क्यों?

27 नवंबर, 2022 को मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के अधिकारी अरुण शर्मा ने बताया कि नई दिल्ली में हुए 41वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ) 2022 में मध्य प्रदेश मंडप ने विशेष प्रस्तुति से कांस्य पदक प्राप्त किया।

प्रमुख बिंदु 

  • मध्य प्रदेश शासन की ओर से मध्य प्रदेश मंडप के डायरेक्टर बी.एन. तिवारी ने यह पुरस्कार ग्रहण किया।
  • मेले में आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के रोडमैप सहित राज्य सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों, उपलब्धियों, सांस्कृतिक धरोहर, कला और संस्कृति का प्रदर्शन किया गया।
  • इसके साथ ही छतरपुर की माटी शिल्प और भोपाल की जरी-जरदोजी शिल्प कला के सजीव प्रदर्शन से राज्य की कला और सांस्कृतिक समृद्धि की झलक प्रस्तुत की गई।
  • दिल्ली के प्रगति मैदान में इस साल आयोजित 41वें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में स्वदेशी कंपनियों का जोर देखने को मिला। वहीं स्वदेशी कंपनियों के प्रोडक्ट्स भी लोगों को खूब पसंद आए। इस कारण अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में स्वदेशी कंपनियों ने काफी अच्छा बिज़नेस किया। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला छोटी-छोटी स्वदेशी कंपनियों के लिये यह एक अच्छा प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है।

मध्य प्रदेश Switch to English

वर्ष 2019 के अखिल भारतीय एवं प्रादेशिक कृति पुरस्कारों की घोषणा

चर्चा में क्यों?

27 नवंबर, 2022 को संस्कृति विभाग की साहित्य अकादमी द्वारा कैलेंडर वर्ष 2019 के कृति पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई। इसमें 13 भारतीय और 15 प्रादेशिक कृति पुरस्कार शामिल हैं।

प्रमुख बिंदु 

  • अखिल भारतीय पुरस्कार में प्रति रचनाकार एक लाख रुपए एवं प्रादेशिक पुरस्कार में प्रति रचनाकार 51 हज़ार रुपए के साथ शॉल, श्रीफल, स्मृति-चिह्न और प्रशस्ति-पत्र से अलंकृत किया जाता है।
  • अखिल भारतीय कृति पुरस्कार
    • अखिल भारतीय पं. माखनलाल चतुर्वेदी (निबंध) पुरस्कार- डॉ. मनोज पांडेय (नागपुर) की कृति ‘आलोचना के नए परिप्रेक्ष्य’को,
    • अखिल भारतीय गजानन माधव मुक्तिबोध (कहानी)- सच्चिदानंद जोशी (दिल्ली) की कृति ‘पल भर की पहचान’को,
    • अखिल भारतीय राजा वीरसिंह देव (उपन्यास)- प्रो. मनीषा शर्मा (अमरकंटक) की कृति ‘ये इश्क’को,
    • अखिल भारतीय आचार्य रामचंद्र शुक्ल (आलोचना)- डॉ. कविता भटे (उत्तराखंड) की कृति ‘भारतीय साहित्य में जीवन मूल्य’को,
    • अखिल भारतीय पं. भवानी प्रसाद मिश्र (गीत एवं हिन्दी गजल)- डॉ. आर. पी. सारस्वत (सहारनपुर) की कृति ‘तुम बिन’को,
    • अखिल भारतीय अटल बिहारी वाजपेयी (कविता)- डॉ. इंदु राव (हरियाणा) की कृति ‘छांह संस्कृति की’को,
    • अखिल भारतीय कुबेरनाथ राय (ललित निबंध)- राजेश जैन (दिल्ली) की कृति ‘ईश्वर की आत्मकथा’को,
    • अखिल भारतीय विष्णु प्रभाकर (आत्मकथा जीवनी)- डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री (मोहाली) की कृति ‘श्री गुरु नानक देवजी’को,
    • अखिल भारतीय निर्मल वर्मा (संस्मरण)- प्रो. सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी (इंदौर) की कृति ‘बदलती हवाएँ’को,
    • अखिल भारतीय महादेवी वर्मा (रेखाचित्र)- प्रशांत पोल (जबलपुर) की कृति ‘वे पंद्रह दिन’ को,
    • अखिल भारतीय प्रो. विष्णुकांत शास्त्री (यात्रा-वृत्तांत)- डॉ. सुधा गुप्ता ‘अमृता’(कटनी) की कृति ‘चलें भ्रमण की ओर’ को,
    • अखिल भारतीय भारतेंदु हरिश्चंद्र (अनुवाद)- संतोष रंजन (भोपाल) की कृति ‘थेल्मा मेरी कोरिली’ को
    • अखिल भारतीय नारद मुनि (फेसबुक/ब्लॉग/नेट) पुरस्कार- अजय जैन ‘विकल्प’ (इंदौर) को उनके पेज ‘फेसबुक/ब्लॉग/नेट’को दिया गया है।
  • प्रादेशिक कृति पुरस्कार
    • वृंदावन लाल वर्मा (उपन्यास) पुरस्कार- डॉ. अश्विनी कुमार दुबे (इंदौर) की कृति ‘किसी शहर में’ को,
    • सुभद्रा कुमारी चौहान (कहानी)- डॉ. गरिमा संजय दुबे (इंदौर) की कृति ‘दो ध्रुवों के बीच की आस’ को,
    • श्रीकृष्ण सरल (कविता)- गुरु सक्सेना (नरसिंहपुर) की कृति ‘सीता वनवास’ को,
    • प्रादेशिक आचार्य नंददुलारे वाजपेयी (आलोचना)- बूला कार (इंदौर) की कृति ‘साहित्य मीमांसा’ को,
    • हरिकृष्ण प्रेमी (नाटक)- अशोक मनवानी (भोपाल) की कृति ‘वतन आज़ाद देखूँ’ को,
    • राजेंद्र अनुरागी (डायरी)- राजेश अवस्थी ‘लावा’(ग्वालियर) की कृति ‘अतीत के शब्दबिंब’ को,
    • पं. बालकृष्ण शर्मा नवीन’(प्रदेश के लेखक की पहली कृति)- डॉ. अन्नपूर्णा सिसोदिया (अशोकनगर) की कृति ‘औरत बुद्ध नहीं होती’ को,
    • ईसुरी (लोकभाषा विषयक)- आचार्य दुर्गाचरण शुक्ल (टीकमगढ़) की कृति ‘मदन रस बरसे’ को,
    • हरिकृष्ण देवसरे (बाल साहित्य)- डॉ. प्रेमलता नीलम (दमोह) की कृति ‘गले का हार’ को,
    • नरेश मेहता (संवाद, पटकथा लेखन)- संदीप शर्मा (धार) का पटकथा लेखन ‘प्रयाग प्रवाह और जयतु सिंहस्थ’ को,
    • जैनेंद्र कुमार जैन’ (लघुकथा)- डॉ. गिरिजेश सक्सेना (भोपाल) की कृति ‘चाणक्य के दाँत’ को,
    • सेठ गोविंद दास (एकांकी)- डॉ. सुधीर आज़ाद (भोपाल) की कृति ‘मैं खुदीराम त्रैलोक्यनाथ बोस’ को,
    • शरद जोशी (व्यंग्य)- मीरा जैन (उज्जैन) की कृति ‘हेल्य हादसा’ को,
    • वीरेंद्र मिश्र (गीत)- राजेंद्र शर्मा ‘अक्षर’ (भोपाल) की कृति ‘संबोधन’ को,
    • दुष्यंत कुमार (गजल)- पुरस्कार डॉ. प्रियंका त्रिपाठी (शहडोल) की कृति ‘गुनगुनी सी धूप’ को दिया गया है।     

छत्तीसगढ़ Switch to English

छत्तीसगढ़ उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर एनक्यूएएस सर्टिफिकेशन हासिल करने वाला देश का चौथा राज्य

चर्चा में क्यों?

27 नवंबर, 2022 को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने दुर्ग ज़िले के अमलेश्वर और रायपुर ज़िले के निसदा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर उप स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण और मूल्यांकन के बाद एनक्यूएएस प्रमाण-पत्र जारी किया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर एनक्यूएएस (National Quality Assurance Standard) सर्टिफिकेशन हासिल करने वाला देश का चौथा राज्य बन गया।

प्रमुख बिंदु 

  • गौरतलब है कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा सेवाओं के मूल्यांकन में अमलेश्वर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर उप स्वास्थ्य केंद्र को 94 प्रतिशत और निसदा को 93 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं। दोनों ही स्वास्थ्य केंद्रों का इस वर्ष जुलाई में केंद्रीय टीम द्वारा मूल्यांकन किया गया था।
  • हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर उप स्वास्थ्य केंद्रों का राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक सर्टिफिकेशन 12 मानकों के आधार पर किया जाता है। इसके लिये संस्था द्वारा सेवा प्रदायगी, मरीज़ संतुष्टि, क्लिनिकल सर्विसेस, इनपुट, संक्रमण नियंत्रण, सपोर्ट सर्विसेस, गुणवत्तापूर्ण प्रबंध, आउटपुट जैसे मानकों की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाता है। मूल्यांकन में खरा उतरने वाले अस्पतालों को ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा गुणवत्ता प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है।
  • राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक सर्टिफिकेशन का उद्देश्य अस्पतालों की सुविधाओं को सुदृढ़ करते हुए आम जनता तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा पहुँचाना है।
  • अमलेश्वर का हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर छत्तीसगढ़ राज्य का पहला राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन सर्टिफाइड उप स्वास्थ्य केंद्र बन गया है।
  • यहाँ हॉस्पिटल में टेलीमेडिसिन की सुविधा उपलब्ध है। इसके माध्यम से न केवल स्थानीय स्तर पर बीमारियों का परीक्षण किया जाता है, अपितु टेली कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बड़े अस्पताल से कनेक्ट कर मरीज़ों का चिकित्सकीय परीक्षण किया जाता है। उदाहरण के लिये मानसिक बीमारियों के मामले में देश की मानी हुई संस्था निमहंस बेंगलूरु के विशेषज्ञ जुड़ते हैं। इसी तरह से अन्य बीमारियों में भी स्वास्थ्य केंद्रों से लगातार संपर्क बना रहता है।
  • अच्छा इलाज होने की वजह से लोग काफी आते हैं और दिल की बीमारी, कैंसर आदि बीमारियों को आरंभिक रूप से ही चिह्नांकित करने में मदद मिल जाती है। इसके साथ ही यहाँ संस्थागत प्रसव की सुविधा भी उपलब्ध है।
  • उल्लेखनीय है कि अब तक प्रदेश के कुल 57 अस्पतालों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाण-पत्र प्राप्त हो चुका है। इनमें दस ज़िला अस्पताल, सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 26 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 12 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और दो उप स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। 

उत्तराखंड Switch to English

गौचर व चिन्यालीसौड़ के लिये जल्द हवाई सेवा, पिथौरागढ़ से शुरू होंगी फिक्स्ड विंग एयरक्रॉफ्ट सेवाएँ

चर्चा में क्यों?

27 नवंबर, 2022 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली में केंद्रीय नागरिक उडन्न्यन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात कर गौचर व चिन्यालीसौड़ के लिये हवाई सेवा शुरू करने का आग्रह किया। इस पर केंद्रीय मंत्री ने सहमति जताई।

प्रमुख बिंदु 

  • ‘उड़ान योजना’ के तहत जल्द ही गौचर और चिन्यालीसौड़ के लिये हवाई सेवा शुरू की जाएगी। इसमें 20 सीट फिक्स्ड विंग एयरक्रॉफ्ट का संचालन किया जाएगा। योजना के अगले टेंडर में दोनों स्थानों की हवाई सेवा को शामिल किया जाएगा।
  • इसके अलावा पिथौरागढ़ से फिक्स्ड विंग एयरक्रॉफ्ट सेवाएँ शुरू करने के लिये स्पाइसजेट व बिग चार्टर्ड एयरलाइन को कार्य के आदेश जारी किये गए हैं।
  • मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से पिथौरागढ़ में पवनहंस को निर्बाध और समयबद्ध तरीके से सेवाएँ संचालित करने के लिये निर्देशित करने का अनुरोध किया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि पंतनगर एयरपोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के रूप विकसित करने के लिये एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से सर्वे रिपोर्ट दिसंबर में ही देनी है।
  • मुख्यमंत्री ने पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिये जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया। जौलीग्रांट एयरपोर्ट को अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट के मानकों के अनुरूप विस्तार देने के लिये भूमि का एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के माध्यम से शीघ्र भौतिक सर्वे करने का भी अनुरोध किया। केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने सीएम को आश्वस्त किया कि उत्तराखंड में हवाई सेवा से संबंधित सभी प्रस्तावों को जल्द क्रियान्वित किया जाएगा।

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