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मध्य प्रदेश स्टेट पी.सी.एस.

  • 26 May 2022
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प्रोबायोटिक डार्क चॉकलेट

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय की एमएससी फूड टेक्नोलॉजी की छात्रा चांदनी रॉय ने चॉकलेट प्रेमियों के लिये इम्यूनिटी बूस्टर प्रोबायोटिक अर्क चॉकलेट बनाई है।

प्रमुख बिंदु

  • इस चॉकलेट में चांदनी रॉय ने प्रोबायोटिक का इस्तेमाल किया है तथा शक्कर की मात्रा न्यूनतम रखी है।
  • सेहतमंद प्रोबायोटिक चॉकलेट में कोको पाउडर, मिल्क पाउडर, नारियल तेल तथा प्रोबायोटिक (लैक्टोबैसिलस बुल्गारिस, लैक्टोबैसिलस कैसी, लैक्टोबैसिलस एसिडोफिल्स) का इस्तेमाल किया गया है।
  • चांदनी रॉय ने बताया कि प्रोबायोटिक डार्क चॉकलेट खाने के बहुत फायदे हैं। डार्क चॉकलेट में पाए जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट ब्लडप्रेशर को सामान्य करते हैं और हृदय में क्लॉटिंग के रिस्क को कम करते हैं। चॉकलेट में पाए जाने वाले फ्लोवोनाइड त्वचा से हानिकारक किरणों को रोकने में मदद करते हैं।

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कुसुम-‘अ’ योजना में परफार्मेंस गांरटी 5 लाख से घटकर एक लाख रुपए हुई

चर्चा में क्यों?

25 मई, 2022 को मध्य प्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री हरदीप सिंह डंग ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा उत्थान महाभियान (कुसुम-‘अ’) में अब परफार्मेंस गारंटी 5 लाख रुपए प्रति मेगावाट से घटाकर एक लाख रुपए कर दी गई है।

प्रमुख बिंदु

  • हरदीप सिंह डंग ने यह जानकारी ऊर्जा भवन में कुसुम-‘अ’ के 71 कृषकों को लेटर ऑफ अवार्ड वितरित करते हुए दी। कार्यक्रम में 6 विकासकों द्वारा मध्य प्रदेश पॉवर मैंनेजमेंट कंपनी के मध्य विक्रय-क्रय अनुबंध (पीपीए) का भी आदान-प्रदान किया गया।
  • मंत्री ने बताया कि ‘मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना’ में एक हज़ार ऐसे किसानों के खेतों पर सोलर पंप लगाने का काम प्राथमिकता से शुरू किया जा रहा है, जहाँ विद्युत की उपलब्धता नहीं है।
  • प्रदेश में 50 हज़ार किसानों के खेत पर सोलर पंप लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया जा रहा है। इससे बिजली-डीज़ल का खर्चा बचने के साथ 8 घंटे बिजली मिलने से किसानों के अन्य कार्य भी सरलतापूर्वक पूरे हो सकेंगे।
  • गौरतलब है कि नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा 2019 से प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा उत्थान महाभियान (कुसुम-‘अ’) योजना लागू की गई है, जिसके तहत कृषि पंपों के सौरीकरण के लिये 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। इस योजना को राज्य सरकार के विभागों द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसमें किसानों को केवल बाकी का 40 प्रतिशत ही विभाग को जमा करना होता है।

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