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IIT दिल्ली में पावर सेक्टर रेगुलेशन के लिये CoE
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने IIT दिल्ली में पावर सेक्टर रेगुलेशन के लिये उत्कृष्टता केंद्र (CoE) का उद्घाटन किया।
मुख्य बिंदु:
- सहयोगी संस्थान: यह उत्कृष्टता केंद्र (CoE) IIT दिल्ली, केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) और ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया लिमिटेड (ग्रिड इंडिया) द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित किया गया है।
- उद्देश्य: यह विद्युत क्षेत्र के विनियमन में नियामक अनुसंधान, परामर्श सहायता, क्षमता निर्माण और ज्ञान प्रसार के लिये एक राष्ट्रीय केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
- मुख्य फोकस क्षेत्र: यह CoE विद्युत क्षेत्र के विनियमन, बाज़ार संरचना, ग्रिड संचालन, ऊर्जा संक्रमण, डीकार्बोनाइजेशन मार्गों, डिजिटलीकरण, ऊर्जा भंडारण तथा ग्रीन हाइड्रोजन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर बहु-विषयक अनुसंधान करेगा।
- क्षमता निर्माण: यह संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ करने में सहायता करेगा और नियामकों, नीति निर्माताओं तथा अन्य पेशेवरों के लिये संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान करेगा।
- ऊर्जा संक्रमण में भूमिका: विश्लेषणात्मक उपकरणों एवं साक्ष्य-आधारित अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करके यह केंद्र स्वच्छ ऊर्जा, प्रतिस्पर्द्धी बाज़ारों और उपभोक्ता-केंद्रित सुधारों की दिशा में भारत के संक्रमण को समर्थन प्रदान करेगा।
- संस्थागत मॉडल: यह साझेदारी नियामक नेतृत्व (CERC), प्रणाली संचालन (ग्रिड इंडिया) और शैक्षणिक उत्कृष्टता (IIT दिल्ली) को एकीकृत करती है, ताकि भविष्य-उन्मुख नियामक ढाँचों के निर्माण में मार्गदर्शन मिल सके।
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और पढ़ें: केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC), ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया लिमिटेड। |
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महाराष्ट्र के उत्तरी पश्चिमी घाट से एक दुर्लभ सीसिलियन की खोज
चर्चा में क्यों?
वैज्ञानिकों ने महाराष्ट्र के उत्तरी पश्चिमी घाट से ब्लाइंड सीसिलियन की एक नई प्रजाति की खोज की घोषणा की है, जिसका नाम गेगेनोफिस वाल्मीकि (Gegeneophis valmiki) रखा गया है। यह खोज इस वंश (जीनस) के लिये एक दशक से अधिक समय बाद पहली खोज है।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: इस प्रजाति को पहली बार वर्ष 2017 में महाराष्ट्र के सतारा ज़िले में स्थित वाल्मीकि पठार से एकत्रित किया गया था।
- व्युत्पत्ति (Etymology): इसका नाम खोज स्थल के निकट स्थित ऐतिहासिक महर्षि वाल्मीकि मंदिर के नाम पर रखा गया है, जो प्रजातियों के नामकरण को भौगोलिक अथवा सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की परंपरा को दर्शाता है।
- अनुसंधान दल: इस खोज का नेतृत्व भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) ने किया, जिसमें सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, बालासाहेब देसाई कॉलेज तथा म्हादेई रिसर्च सेंटर के शोधकर्त्ता शामिल थे।
- आकृति: अन्य सीसिलियन प्रजातियों की तरह गेगेनोफिस वाल्मीकि भी बिना अंगों वाले, केंचुए के समान दिखने वाला उभयचर है।
- भूमिगत स्वभाव: यह एक भूमिगत (भूमि के भीतर रहने वाला) जीव है, जिसकी आँखें हड्डी के नीचे छिपी रहती हैं, इसी कारण इसे सामान्यतः ‘ब्लाइंड सीसिलियन’ कहा जाता है।
- पारिस्थितिक भूमिका: ये जीव कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के लिये लाभकारी हैं, क्योंकि इनकी सुरंग बनाने की गतिविधि मृदा में वायुसंचार बढ़ाती है और उसकी संरचना को सुदृढ़ बनाती है, साथ ही ये मृदा में पाए जाने वाले अकशेरुकी जीवों को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं।
- महत्त्व: पश्चिमी घाट, जो एक वैश्विक जैव-विविधता हॉटस्पॉट के रूप में मान्यता प्राप्त है, अनेक स्थानिक उभयचर प्रजातियों का आश्रय स्थल है।
- वैश्विक स्तर पर लगभग 41% उभयचर प्रजातियाँ विलुप्ति के खतरे में हैं, ऐसे में नई प्रजातियों की पहचान संरक्षण प्रयासों के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
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और पढ़ें: भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI), पश्चिमी घाट |
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C-DOT को सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन के लिये SKOCH अवार्ड 2025 मिला
चर्चा में क्यों?
दूरसंचार विकास केंद्र (C-DOT) को उसकी सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन के लिये 104वें SKOCH शिखर सम्मेलन में SKOCH पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान सार्वजनिक सुरक्षा, आपदा संचार और डिजिटल शासन में इसके महत्त्वपूर्ण योगदान को मान्यता देता है।
मुख्य बिंदु:
- SKOCH पुरस्कार 2025: यह पुरस्कार 19 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 104वें SKOCH शिखर सम्मेलन के दौरान प्रदान किया गया।
- थीम: शिखर सम्मेलन की थीम ‘रिसोर्सिंग विकसित भारत’ थी, जिसमें शासन, प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित किया गया।
- सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन: C-DOT का CBS एक एकीकृत, राष्ट्रीय आपदा एवं आपातकालीन चेतावनी मंच है, जिसमें कई उन्नत क्षमताएँ शामिल हैं—
- भौगोलिक-लक्षित अलर्ट: उच्च जोखिम वाले विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों में मोबाइल फोनों तक जीवनरक्षक सूचनाएँ पहुँचाता है।
- रीयल-टाइम बहुभाषी समर्थन: 21 भारतीय भाषाओं में चेतावनियों का प्रसार करता है, जिससे विविध जनसमूहों तक समावेशी पहुँच सुनिश्चित होती है।
- नेटवर्क अनुकूलन: सामान्य SMS के विपरीत, सेल ब्रॉडकास्ट संदेश नेटवर्क कंजेशन की स्थिति में भी लक्षित क्षेत्र के सभी उपकरणों तक तुरंत पहुँच जाते हैं।
- रणनीतिक महत्त्व: यह समाधान संयुक्त राष्ट्र की ‘अर्ली वार्निंग्स फॉर ऑल’ पहल और ITU के कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) सहित अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।
- यह 2G, 3G, 4G और 5G प्रौद्योगिकियों के साथ संगत है, जिससे भारत में विभिन्न मोबाइल नेटवर्क पीढ़ियों में व्यापक कवरेज सुनिश्चित होती है।
- आत्मनिर्भर भारत से संरेखण: यह राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा और नागरिक-केंद्रित शासन को सुदृढ़ करता है तथा डिजिटल इंडिया एवं आत्मनिर्भर भारत पहलों के अनुरूप है।
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खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026 लद्दाख में
चर्चा में क्यों?
खेलो इंडिया विंटर गेम्स (KIWG) 2026 के छठे संस्करण का उद्घाटन केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लेह में किया गया।
मुख्य बिंदु:
- उद्घाटन: इस आयोजन का उद्घाटन लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंदर गुप्ता द्वारा नवांग दोरजे स्टोबदान (NDS) स्टेडियम में किया गया।
- आयोजन प्राधिकरण: यह आयोजन लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के युवा सेवा एवं खेल विभाग द्वारा, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) की देखरेख में आयोजित किया जा रहा है।
- खेल विधाएँ: खेलों में बर्फ पर खेले जाने वाले खेल जैसे आइस हॉकी और आइस स्केटिंग शामिल हैं।
- इसके साथ ही फिगर स्केटिंग को पहली बार कार्यक्रम में शामिल किया गया है।
- प्रारूप: 2026 संस्करण को दो चरणों में आयोजित किया गया है—
- लेह में आइस स्पोर्ट्स
- गुलमर्ग (जम्मू एवं कश्मीर) में स्नो इवेंट्स
- लद्दाख की खेल नीति: केंद्र शासित प्रदेश की पहली खेल नीति का उद्देश्य प्रतिभा की पहचान, समावेशी खेलों को बढ़ावा, महिलाओं और दिव्यांग खिलाड़ियों को समर्थन, छात्रवृत्तियाँ, नौकरी में आरक्षण तथा विश्व-स्तरीय खेल अवसंरचना का विकास करना है।
- महत्त्व: इन खेलों का उद्देश्य खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्द्धात्मक अनुभव प्रदान करना, घरेलू प्रतियोगिताओं को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना तथा हिमालयी क्षेत्र में विंटर गेम्स की अवसंरचना का विकास करना है।
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