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त्रिपुरा में 48वाँ कोकबोरोक दिवस समारोह

  • 20 Jan 2026
  • 13 min read

चर्चा में क्यों?

त्रिपुरा ने 48वाँ कोकबोरोक दिवस (जिसे त्रिपुरी भाषा दिवस भी कहा जाता है) को राज्य-व्यापी सांस्कृतिक उत्साह और नई भाषायी मांगों के साथ मनाया। यह दिवस 19 जनवरी, 1979 को तत्कालीन राज्य सरकार के तहत कोकबोरोक को त्रिपुरा की आधिकारिक राज्य भाषा के रूप में मान्यता मिलने की ऐतिहासिक घटना की स्मृति में मनाया जाता है।

मुख्य बिंदु:

  • आधिकारिक समारोह: मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने नई दिल्ली स्थित त्रिपुरा भवन में समारोहों का नेतृत्व किया, जहाँ उन्होंने कोकबोरोक को राज्य की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने वाली एक महत्त्वपूर्ण कड़ी बताया और इसके संवर्द्धन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
  • सांस्कृतिक रैलियाँ: पूरे राज्य में प्रमुख रैलियों का आयोजन किया गया, जिनमें अगरतला में लगभग 3,000 प्रतिभागियों की सहभागिता के साथ एक भव्य जुलूस भी शामिल था।
  • सरकारी पहल: भाषायी विरासत के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर कोकबोरोक पाठ्यक्रमों की शुरुआत की।
    • सामाजिक सद्भाव को मज़बूत करने के लिये जनजातीय और गैर-जनजातीय समुदायों के एकीकरण के प्रयास किये।
  • स्मरण: यह दिवस 19 जनवरी, 1979 की स्मृति में मनाया जाता है, जब कोकबोरोक को पहली बार बंगाली और अंग्रेज़ी के साथ आधिकारिक राज्य भाषा का दर्जा दिया गया था।
  • भाषा: कोकबोरोक तिब्बती–बर्मी भाषा परिवार से संबंधित है और बोरोक (त्रिपुरी) समुदाय की मातृभाषा है।
    • हालाँकि 1979 में मान्यता मिलने के बावजूद, इसे अभी तक संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है, जिससे इसे राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण सीमित है।
  • क्षेत्र: कोकबोरोक मुख्य रूप से त्रिपुरा के स्वदेशी त्रिपुरी समुदायों द्वारा बोली जाती है और पड़ोसी बांग्लादेश में भी प्रचलित है।

और पढ़ें: आठवीं अनुसूची

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