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स्टेट पी.सी.एस.

  • 21 Sep 2021
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उत्तर प्रदेश Switch to English

कुशीनगर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन

चर्चा में क्यों?

20 अक्तूबर, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनपद कुशीनगर में लगभग 254 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित कुशीनगर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन किया।

प्रमुख बिंदु

  • इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने जनपद कुशीनगर में 281.45 करोड़ रुपए की लागत के राजकीय मेडिकल कॉलेज, कुशीनगर के शिलान्यास सहित 180.66 करोड़ रुपए के 12 विकास कार्यों का लोकार्पण/शिलान्यास किया।
  • ज्ञातव्य है कि वर्ष 1947 से लेकर वर्ष 2014 तक उत्तर प्रदेश में केवल 2 एयरपोर्ट- लखनऊ, व वाराणसी फंक्शनल थे। प्रदेश की कनेक्टिविटी भी उस समय मात्र 15 से 16 स्थानों के लिये थी।
  • यह प्रदेश का 9वाँ फंक्शनल एयरपोर्ट होगा, अब उत्तर प्रदेश 75 गंतव्य स्थानों पर वायु सेवा के साथ सीधे जुड़ चुका है।
  • कुशीनगर, अयोध्या तथा नोएडा अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के बाद प्रदेश का तीसरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 11 नए एयरपोर्ट पर कार्य हो रहा है।
  • कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पश्चिमोत्तर बिहार के विकास में सहायक होगा।
  • कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट एयर कनेक्टिविटी का माध्यम बनने के साथ-साथ इसका सीधा लाभ किसान, पशुपालक, दुकानदार, श्रमिक, उद्यमी आदि को मिलेगा। सबसे अधिक लाभ यहाँ के टूरिज़्म, ट्रेवल टैक्सी, होटल-रेस्टोरेंट, छोटे-छोटे बिज़नेस करने वालों को मिलेगा। साथ ही, इस क्षेत्र के युवाओं के लिये रोज़गार के नए अवसर बनेंगे।
  • इस एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह में 12 देशों के राजनयिकों ने हिस्सा लिया। इस एयरपोर्ट से श्रीलंका, नेपाल, जापान, कोरिया, थाईलैंड, सिंगापुर, लाओस एवं दक्षिण-पूर्वी एशिया के कई देशों को भारत के साथ अंतर्राष्ट्रीय वायु सेवा से जोड़ा जाएगा।
  • उल्लेखनीय है कि कुशीनगर विश्व के बौद्ध मतावलंबियों की आस्था एवं प्रेरणा का केंद्र है। यह भगवान बुद्ध का महापरिनिर्वाण स्थल है।

उत्तर प्रदेश Switch to English

उत्तर प्रदेश का पहला जनजातीय संग्रहालय

चर्चा में क्यों?

हाल ही में राज्य संग्रहालय के निदेशक द्वारा बताया गया कि राज्य का पहला जनजातीय संग्रहालय मार्च 2022 तक पूरी तैयार हो जाएगा।

प्रमुख बिंदु

  • गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ‘बलरामपुर’ ज़िले के थारू प्रधान ग्राम ‘इमिलिया कोडर’ में थारू जनजातीय संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है।
  • सरकार के अनुसार, इस संग्रहालय में थारू जनजाति के उद्विकास से लेकर उनकी संस्कृति, परंपराएँ, धर्म, जीवनशैली आदि सभी आयामों को प्रदर्शित किया जाएगा।
  • थारू जनजाति के लोगों को शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लखीमपुर खीरी में एक महाविद्यालय स्थापित किया गया है। साथ ही इनके विकास के लिये वर्ष 1980 में ‘थारू विकास परियोजना’ प्रारंभ की गई थी।
  • उल्लेखनीय है कि थारू जनजातीय समूह उत्तर प्रदेश का तीसरा सबसे बड़ा जनजातीय समूह है। इस जनजाति के लोग दीपावली को शोकपर्व के रूप में मनाते हैं। थारू जनजाति द्वारा ‘बजहर’ नामक पर्व मनाया जाता है। इसके अतिरिक्त इनमें ‘बदला विवाह’ भी प्रचलित है।

राजस्थान Switch to English

‘राजस्थान ग्रामीण पर्यटन प्रोत्साहन स्कीम’

चर्चा में क्यों?

20 सितंबर, 2021 को मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने ‘राजस्थान ग्रामीण पर्यटन प्रोत्साहन स्कीम’ के तहत स्पष्ट एडवाइजरी जारी करने तथा इको सेंसेटिव क्षेत्रों में आने वाले भवनों पर वन एवं पर्यावरण विभाग के सभी नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया।

प्रमुख बिंदु

  • शासन सचिवालय में ‘राजस्थान ग्रामीण पर्यटन प्रोत्साहन स्कीम’ को लेकर आयोजित बैठक में मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को प्रोत्साहन मिलने से स्थानीय हस्तकलाओं, दस्तकारियों, नृत्यों एवं संगीत को व्यापक प्रचार-प्रसार मिलने के साथ ही ग्रामीण लोगों को रोज़गार के अधिकाधिक अवसर प्राप्त होने की संभावना बढ़ेगी।
  • पर्यटन विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश एवं रोज़गार का सृजन करने के साथ वहाँ के हस्तशिल्प व स्थानीय उत्पादों का संरक्षण व प्रचार-प्रसार करना है।
  • राजस्थान ग्रामीण पर्यटन प्रोत्साहन स्कीम’ के तहत चार यूनिट्स- गेस्ट हाउस, कृषि पर्यटन इकाई, कैंपिंग साइट तथा कैरावेन पार्क स्थापित किये जाएंगे।
  • गेस्ट हाउस के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 6 से 20 कमरों तक पर्यटकों को अस्थाई आवास एवं भोजन की सुविधा मिलेगी। यहाँ आवास मालिक या मैनेजर को परिवार सहित रहना आवश्यक होगा।
  • कृषि पर्यटन इकाई कृषि, व्यावसायिक एवं औद्योगिक भूमि एवं न्यूनतम 2 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर स्थापित की जा सकेगी। इसके 20 प्रतिशत भाग पर निर्माण की अनुमति होगी, शेष 80 प्रतिशत भूमि ऊँट-घोड़ा फार्म, गोशाला, फसल आदि ग्रामीण परिवेश के लिये उपयोग में ली जा सकेगी।
  • कैंपिंग साइट के लिये कृषि, व्यावसायिक एवं औद्योगिक भूमि पर अनुमति होगी। न्यूनतम क्षेत्रफल 1 हेक्टेयर के 10 प्रतिशत भाग पर निर्माण की अनुमति होगी तथा 80 प्रतिशत भाग ऊँट फार्म, घोड़ा फार्म, फसल, पशुधन, बगीचे, ग्रामीण परिवेश हेतु उपयोग में लिये जा सकेंगे।
  • पर्यटकों द्वारा मोबाइल वैन को पार्क करने के लिये कैरावेन पार्क स्थापित किये जाएंगे। यह न्यूनतम 1 हेक्टेयर क्षेत्रफल की कृषि, व्यावसायिक एवं औद्योगिक भूमि पर बनाए जा सकेंगे। यहाँ पर्यटकों के लिये खाना पकाने, खाना खाने एवं सुविधाओं के निर्माण की अनुमति होगी। कैरावेन वाहन पार्क करते समय वैन में पर्यटकों की उपस्थिति आवश्यक होगी।
  • ये सभी टूरिज़्म यूनिट्स कम-से-कम 10 फीट चौड़ी सड़क पर ही अनुमत होंगी।

मध्य प्रदेश Switch to English

राज्यस्तरीय राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार

चर्चा में क्यों?

20 सितंबर, 2021 को उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्य प्रदेश राज्यस्तरीय राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार के लिये गठित चयन समिति की बैठक में तीन वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के राज्यस्तरीय पुरस्कार के लिये प्राप्त प्रस्तावों पर चर्चा की गई और पुरस्कार के लिये श्रेष्ठ प्रतिभागियों का चयन किया गया।

प्रमुख बिंदु

  • एन.एस.एस. पुरस्कारों का उद्देश्य विश्वविद्यालयों, सीनियर सेकेंडरी (+2) परिषदों, एन.एस.एस. इकाईयों/कार्यक्रम अधिकारियों और एन.एस.एस. स्वयंसेवकों द्वारा स्वयंसेवी सामुदायिक सेवा के क्षेत्र में दिये गए उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देना एवं पुरस्कृत करना है, ताकि एन.एस.एस. को आगे और ज़्यादा बढ़ावा दिया जा सके।
  • बैठक में निर्णय लिया गया है कि अगले वित्तीय वर्ष से राज्यस्तरीय पुरस्कारों की संख्या को 18 से बढ़ाकर 20 किया जाएगा। स्वयं-सेवक स्तर पर विद्यार्थियों को दी जाने वाली 11 हज़ार रुपए की पुरस्कार राशि को बढ़ाकर 21 हज़ार रुपए करने की अनुशंसा की गई।
  • उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश राज्यस्तरीय राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार के तहत विश्वविद्यालयस्तरीय कार्यक्रम समन्वयक के लिये प्रतिवर्ष एक, ज़िला संगठक स्तर पर दो तथा संख्या स्तर पर कार्यक्रम अधिकारी को 12 प्रशस्ति-पत्र प्रदान किये जाने का प्रावधान है।
  • इसके अतिरिक्त स्वयं-सेवक स्तर पर 18 पुरस्कार प्रदाय किये जाते हैं। इनमें महाविद्यालय स्तर के 13 स्वयं-सेवक, जिनमें 3 छात्राओं का होना आवश्यक है तथा 5 स्वयं-सेवक विद्यालय स्तर के होंगे, जिनमें एक छात्रा अनिवार्य होगी। साथ ही राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी स्तर पर कुल 12 पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं।
  • राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) भारत सरकार के युवा मामले एवं खेल मंत्रालय द्वारा संचालित एक केंद्रीय योजना है, जिसका उदेश्य सभी युवा छात्रों को सामुदायिक सेवा गतिविधियों एवं कार्यक्रमों में भाग लेने के लिये अवसर प्रदान करना है।
  • गौरतलब है कि 24 सितंबर, 1969 को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. वी.के.आर.वी. राव ने सभी राज्यों को शामिल करते हुए 37 विश्वविद्यालयों में NSS कार्यक्रम शुरू किया था। राष्ट्रीय सेवा योजना का ध्येय है- ‘मैं ही नहीं आप भी’।

हरियाणा Switch to English

गोयल साइंस पुरस्कार की घोषणा

चर्चा में क्यों?

हाल ही में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने देश के चार विख्यात वैज्ञानिकों, प्रो. एन.के. मेहरा (एम्स, नई दिल्ली), प्रो. ए. अजयाघोष (सीएसआईआर, निस्ट, तिरुवनंतपुरम), प्रो. श्याम सुंदर (बीएचयू वाराणसी) एवं प्रो. रोहिनी गोडबोले (आईआईएससी, बंगलूरू) का चयन गोयल पुरस्कार के लिये किया है। प्रत्येक पुरस्कार में एक मेडल, प्रशस्ति-पत्र एवं दो लाख रुपए नकद शामिल हैं।

प्रमुख बिंदु

  • कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति एवं चयन समिति के अध्यक्ष प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि इन वैज्ञानिकों ने क्रमश: व्यावहारिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान एवं भौतिक विज्ञान में विशेष योगदान दिया है।
  • प्रो. मेहरा ने ट्रांसप्लांट इम्यूनोलॉजी एवं इम्यूनो जेनेटिक्स के क्षेत्र में और प्रो. अजयाघोष ने बायोलॉजी में मैटीरियल केमिस्ट्री के उपयोग पर विशिष्ट काम किया है। इसके अलावा प्रो. श्याम सुंदर ने वाइसेरल लेशमैनियासिस (काला-अज़ार) यानी लीवर और बोन मैरो के उपचार के लिये मिल्टेफास्टिन दवा विकसित की है, जिसका उपयोग कई देश कर रहे हैं। वहीं पँश्री प्रो. रोहिनी गोडबोले ने हाई एनर्जी फिजिक्स में विशेष योगदान दिया है।
  • यूनिवर्सिटी की ओर से दिये जाने वाले गोयल साइंस पुरस्कारों के 30 सालों के इतिहास में इस बार तीसरी महिला वैज्ञानिक प्रो. रोहिनी गोडबोले को गोयल पुरस्कार के लिये चयनित किया गया है।
  • इससे पहले 1992 में पहली बार प्रदान किये गए गोयल साइंस पुरस्कार में पद्म विभूषण आशिमा चटर्जी को और 2019 में प्रो. लक्ष्मीकांत को गोयल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 
  • चयन समिति के सह अध्यक्ष प्रो. एस.पी. सिंह ने बताया कि गोयल साइंस पुरस्कारों के 30 सालों के इतिहास में अब तक मेडिकल साइंस क्षेत्र से चार ही वैज्ञानिकों का चयन हो पाया है, जिनमें 1995 में एम्स के डॉ. वेणुगोपाल और 2003 में एम्स के ही डॉ. के.के. तलवार शामिल रहे। वहीं इस बार दो वैज्ञानिकों प्रो. एन.के. मेहरा और प्रो. श्याम सुंदर को मेडिकल साइंस के क्षेत्र में गोयल पुरस्कार दिये जाएंगे।
  • गोयल साइंस पुरस्कार की स्थापना 1992 में अमेरिका में बसे भारतीय रामस्वरूप गोयल ने की थी। ये पुरस्कार अब तक सौ से अधिक प्रसिद्ध वैज्ञानिकों को दिया जा चुका है, जिनमें डॉ. सी.एन.आर. राव, डॉ. आर.ए. माशेलकर और डॉ. कस्तूरीरंगन आदि प्रमुख हैं।

झारखंड Switch to English

कोल इंडिया लिमिटेड का पहला व्यावसायिक कोल बेड मीथेन निष्कर्षण

चर्चा में क्यों?

20 सितंबर, 2021 को झारखंड के धनबाद में कोल इंडिया की सब्सिडियरी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) एवं प्रभा एनर्जी प्रा.लि. (PEPL) के बीच पहले व्यावसायिक कोल बेड मीथेन के निष्कर्षण हेतु एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किया गया।

प्रमुख बिंदु

  • अनुबंध के तहत PEPL द्वारा झरिया कोल फील्ड्स के झरिया कोल बेड मीथेन ब्लॉक-1 के डेवलपर रूप में कार्य किया जाएगा।
  • सेंट्रल माइन प्लानिंग डिजाइन इंस्टीट्यूट (CMPDI) इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिये प्रमुख कार्यान्वयन एजेंसी (PIA) है।
  • यह निष्कर्षण कोल इंडिया द्वारा मीथेन उत्सर्जन में कमी लाने के लिये किये जा रहे प्रयासों का हिस्सा है। इसके अतिरिक्त कोयला खनन से पहले सीबीएम (कोल बेड मीथेन) निष्कर्षण करने से कोयला खदानों में खनन के समय विस्फोट एवं आगजनी की घटनाओं में कमी आएगी, जिससे भूमिगत कोयला खदानों में काम करने वाले क्रमिकों की सुरक्षा बढ़ जाएगी।
  • इसके अलावा सीबीएम का निष्कर्षण ऊर्जा के उपयोग को भी सक्षम करेगा, जो खनन के दौरान निकलकर बर्बाद हो जाता है।
  • उल्लेखनीय है कि सीबीएम प्राकृतिक गैस का एक रूप है, जिसे कोयला निक्षेपों से प्राप्त किया जाता है। यह ऊर्जा का एक गैर-परंपरागत स्रोत है, जिसका उपयोग विभिन्न देशों में सीमेंट, रोलिंग मिल, स्टील प्लॉन्ट्स आदि उद्योगों में किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ Switch to English

छत्तीसगढ़ लघु वनोपजों के संग्रहण में अव्वल

चर्चा में क्यों?

हाल ही में जारी द ट्राइबल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (ट्राईफेड)’ के आँकड़ों के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान प्रथम तिमाही माह अप्रैल से जून तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर लघु वनोपजों की खरीदी में छत्तीसगढ़ पूरे देश में प्रथम स्थान पर है।

प्रमुख बिंदु

  • ट्राईफेड द्वारा जारी किये गए आँकड़ों के अनुसार राज्य में इस दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 80 करोड़ 12 लाख रुपए की राशि के 2 लाख 77 हज़ार 958 क्विंटल लघु वनोपजों की खरीदी की गई है, जो देश में इस दौरान 93 करोड़ रुपए मूल्य के कुल संगृहीत लघु वनोपजों का 88.36 प्रतिशत है।
  • इनमें 40.90 करोड़ रुपए की राशि के 113614 क्विंटल इमली (बीज सहित) तथा 27.59 करोड़ रुपए की राशि के 1,37,946 क्विंटल साल बीज का संग्रहण किया गया है। इसी तरह 4.15 करोड़ रुपए की राशि के 6,595 क्विंटल फूल इमली, 2.92 करोड़ रुपए की राशि के 2390 क्विंटल चिंरौजी गुठली तथा 1.78 करोड़ रुपए की राशि के 10,493 क्विंटल बहेड़ा का संग्रहण शामिल है।
  • इस दौरान माहुल पत्ता, नागरमोथा, भेलवा, बहेड़ा कचरिया, धवई फूल (सूखा), हर्रा कचरिया, पुवाड़ (चरोटा), बेल गूदा, सतावर (सूखी), कुसुम बीज, फूल झाडू, रंगीनी लाख, वन तुलसी, फूल इमली, जामुन बीज (सूखा), वन जीरा, इमली बीज, आँवला बीजरहित, कुसुमी लाख, कुल्लू गोंद, महुआ बीज, करंज बीज तथा बायबडिंग का संग्रहण हुआ है। 
  • इसके अलावा पाताल कुम्हड़ा (बेदारी कंद), तिखुर, सवई घास, कोरिया छाल, छिन्द घास, आँवला (कच्चा), काँटा झाडू, कुटज छाल, अडुसा पत्ता, इंद्रजौ बीज, सफेद मूसली, पलाश फूल आदि का भी संग्रहण किया गया है।
  • राज्य लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक संजय शुक्ला ने बताया कि राज्य में वर्तमान में 52 लघु वनोपजों की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा रही है। जिनमें साल बीज, हर्रा, इमली बीज सहित, चिरौंजी गुठली, महुआ बीज, कुसुमी लाख, रंगीनी लाख, काल मेघ, बहेड़ा, नागरमोथा, कुल्लू गोंद, पुवाड़, बेल गूदा, शहद तथा फूल झाडू, महुआ फूल (सूखा) शामिल हैं। इसके अलावा जामुन बीज (सूखा), कौंच बीज, धवई फूल (सूखा), करंज बीज, बायबडिंग और आँवला (बीज सहित) तथा फूल इमली (बीजरहित), गिलोय तथा भेलवा, वन तुलसी बीज, वन जीरा बीज, इमली बीज, बहेड़ा कचरिया, हर्रा कचरिया तथा नीम बीज शामिल हैं। 
  • इसी तरह कुसुमी बीज, रीठा फल (सूखा), शिकाकाई फल्ली (सूखा), सतावर जड़ (सूखी), काजू गुठली, मालकांगनी बीज, माहुल पत्ता, पलास (फूल), सफेद मूसली (सूखी), इंद्रजौ, पाताल कुम्हड़ा तथा कुटज (छाल), अश्वगंधा, आँवला कच्चा, सवई घास, काँटा झाडू, तिखुर, बीहन लाख-कुसमी, बीहन लाख-रंगीनी, बेल (कच्चा) तथा जामुन (कच्चा) शामिल हैं।
  • राज्य सरकार द्वारा कुसुमी लाख, रंगीनी लाख और कुल्लू गोंद की खरीदी में समर्थन मूल्य के अलावा अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।

उत्तराखंड Switch to English

भारत-नेपाल संयुक्त अभ्यास

चर्चा में क्यों?

20 सितंबर, 2021 को 15वाँ भारत-नेपाल संयुक्त बटालियन स्तर का सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास ‘सूर्य किरण’ पिथौरागढ़ में शुरू हुआ। इस अभ्यास का समापन 3 अक्तूबर को होगा।

प्रमुख बिंदु

  • इससे पहले शनिवार को नेपाली सेना की टुकड़ी पिथौरागढ़ पहुँची, जिसका पारंपरिक सैन्य स्वागत किया गया। 
  • उत्तर भारत क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC), लेफ्टिनेंट जनरल एस.एस. महल ने सभा को संबोधित किया और टुकड़ियों को आपसी विश्वास, अंतर-संचालन को प्रशिक्षित तथा मज़बूत करने और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिये प्रोत्साहित किया।
  • इस आयोजन में दोनों सेनाओं के लगभग 650 रक्षाकर्मी भाग ले रहे हैं। अभ्यास में भारतीय सेना और नेपाली सेना की एक-एक इन्फैंट्री बटालियन अंतर-संचालन विकसित करने और आतंकवाद विरोधी अभियानों एवं आपदा राहत कार्यों के अपने अनुभव को साझा करने के लिये एक साथ प्रशिक्षण लेंगे।

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