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उत्तर प्रदेश स्टेट पी.सी.एस.

  • 16 Feb 2026
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उत्तर प्रदेश Switch to English

NSSTA स्थापना दिवस 2026

चर्चा में क्यों?

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अधीन कार्यरत प्रमुख केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान, राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणाली प्रशिक्षण अकादमी (NSSTA) ने 13 फरवरी, 2026 को ग्रेटर नोएडा में अपना 18वाँ स्थापना दिवस मनाया।

मुख्य बिंदु:

  • विषय: इस वर्ष का विषय है “Reimagining Capacity Building for Official Statistics to achieve the vision of Viksit Bharat@2047”अर्थात विकसित भारत@2047 की परिकल्पना की प्राप्ति हेतु आधिकारिक सांख्यिकी के लिये क्षमता निर्माण की पुनर्कल्पना"
  • प्रणाली सुदृढ़ीकरण: यह अवसर भारत की सांख्यिकीय प्रणालियों को मज़बूत करने तथा सतत क्षमता निर्माण के माध्यम से साक्ष्य-आधारित शासन को प्रोत्साहित करने में अकादमी के अठारह वर्षों के योगदान को रेखांकित करता है।
  • डिजिटल डेटा लैब का उद्घाटन: डिजिटल डेटा लैब का उद्घाटन एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि थी, जिसे डिजिटल कौशल विकास, गहन प्रशिक्षण और AI/ML और बिग डेटा एनालिटिक्स जैसे उपकरणों के व्यावहारिक अनुभव को बढ़ावा देने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
  • उत्पादन के ‘पॉंचवें कारक’ के रूप में डेटा: डेटा को अब एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में मान्यता प्राप्त है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिये कच्चे माल के रूप में और उच्च-स्तरीय निर्णय लेने के एक महत्त्वपूर्ण घटक के रूप में कार्य करता है।
  • NSSTA के बारे में: 
    • इसकी स्थापना 13 फरवरी, 2009 को ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश में हुई थी।
    • प्राथमिक उद्देश्य: भारतीय सांख्यिकी सेवा (ISS) और अधीनस्थ सांख्यिकी सेवा (SSS) के लिये सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक सांख्यिकी में प्रशिक्षित मानव संसाधन का विकास करना।
  • संस्थागत सहयोग: भारतीय पद्धतियों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप ढालने हेतु NSSTA, IIT, IIM, ISI, नीति आयोग तथा विश्व बैंक और IMF जैसे अंतर्राष्ट्रीय निकायों के साथ साझेदारी करता है।

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नई दिल्ली में सेवा तीर्थ और कर्त्तव्य भवन का उद्घाटन

चर्चा में क्यों?

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2026 में नई दिल्ली में सेवा तीर्थ और कर्त्तव्य भवन का उद्घाटन किया, जो देश के केंद्रीय प्रशासनिक बुनियादी ढाँचे के आधुनिकीकरण में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

मुख्य बिंदु

  • उद्घाटन: सेवा तीर्थ का उद्घाटन प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के नए परिसर के रूप में किया गया है, जो सेवा-उन्मुख शासन की दिशा में एक परिवर्तन का प्रतीक है।
    • कर्त्तव्य भवन में प्रमुख केंद्रीय मंत्रालय स्थित हैं ताकि समन्वय और प्रशासनिक दक्षता में सुधार हो सके।
  • स्थानांतरण: प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ में स्थानांतरित किया गया है। 
    • ये इमारतें सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य भारत के प्रशासनिक बुनियादी ढाँचे का पूर्ण आधुनिकीकरण करना है।
  • प्रासंगिकता और विशेषताएँ: नए परिसर ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल हैं, जिनमें हरित भवन मानकों और आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं का समावेश है। 
    • इनकी डिज़ाइन पारदर्शिता, सुलभता और निर्बाध सार्वजनिक संपर्क को बढ़ावा देती है।
  • औपनिवेशिक विरासत से प्रतीकात्मक परिवर्तन: यह कदम औपनिवेशिक काल की प्रशासनिक इमारतों से आधुनिक, भारत-केंद्रित शासन स्थलों की ओर संक्रमण का प्रतिनिधित्व करता है, जो ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना के अनुरूप है।

और पढ़ें: PMO, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट, विकसित भारत


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केरल में स्त्री सुरक्षा योजना

चर्चा में क्यों?

केरल सरकार ने राज्य में बेरोज़गार महिलाओं और ट्रांसजेंडर महिलाओं को मासिक वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिये स्त्री सुरक्षा योजना शुरू की है।

मुख्य बिंदु:

  • योजना: स्त्री सुरक्षा योजना एक राज्य स्तरीय सामाजिक सुरक्षा पहल है जिसे आर्थिक रूप से कमज़ोर, बेरोज़गार महिलाओं और ट्रांसजेंडर महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
    • पात्र लाभार्थियों को राज्य की सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रणाली के माध्यम से उनके बैंक खातों में प्रति माह 1,000 रुपये की प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।
  • लक्षित समूह: यह योजना मुख्य रूप से उन गृहिणियों और बेरोज़गार महिलाओं को लाभ पहुँचाती है जो किसी भी मौजूदा सामाजिक कल्याण पेंशन योजना के अंतर्गत नहीं आती हैं।
  • पात्रता:
    • केरल का स्थायी निवासी होना अनिवार्य।
    • आयु 35–60 वर्ष।
    • बेरोज़गार हों।
    • अंत्योदय अन्न योजना (पीला कार्ड) या प्राथमिकता वाले परिवार (गुलाबी कार्ड) राशन कार्ड श्रेणी से संबंधित हों।
    • अन्य कल्याणकारी पेंशन योजनाओं का लाभार्थी नहीं हों।
  • आवेदन प्रक्रिया: स्थानीय स्वशासन संस्थानों (पंचायत, नगरपालिका, निगम) के माध्यम से आवेदन जमा किये जाते हैं और स्थानीय अधिकारियों द्वारा सत्यापन किया जाता है।
  • हस्तांतरण की विधि: प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से वित्तीय सहायता वितरित की जाती है, ताकि पारदर्शिता और समय पर वितरण सुनिश्चित हो सके।
    • यह योजना केरल सरकार द्वारा अपनी सामाजिक सुरक्षा और लैंगिक कल्याण पहलों के हिस्से के रूप में वित्त पोषित है।
  • ट्रांसजेंडरों का समावेश: उनका समावेश सामाजिक न्याय और समावेशी कल्याणकारी नीतियों के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है ।
  • सत्यापन और नियंत्रण: लाभार्थियों की सूचियों का स्थानीय निकाय स्तर पर सत्यापन किया जाता है ताकि दोहराव रोका जा सके और केवल पात्र आवेदकों को ही लाभ मिले।
  • महत्त्व: यह योजना केरल के सामाजिक सुरक्षा ढाँचे को मज़बूत करती है, महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा देती है और लैंगिक समानता को ध्यान में रखते हुए विकास में योगदान देती है।

और पढ़ें: ट्रांसजेंडर, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण


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PNB सोल्जरथॉन 2026

चर्चा में क्यों? 

पंजाब नेशनल बैंक ने अपने 132वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले समारोहों के तहत राष्ट्रव्यापी मैराथन आयोजन, PNB सोल्जरथॉन 2026 की घोषणा की है।

मुख्य बिंदु:

  • आयोजन: PNB सोल्जरथॉन 2026 बैंक के प्रमुख मैराथन आयोजन का दूसरा संस्करण है, जिसका उद्देश्य फिटनेस, अनुशासन और राष्ट्रीय गौरव को प्रोत्साहित करना है।
    • PNB सोल्जरथॉन 2026 मैराथन अप्रैल 2026 में प्रस्तावित है।
  • आयोजक: इस कार्यक्रम की घोषणा पंजाब नेशनल बैंक ने नई दिल्ली के द्वारका स्थित अपने कॉर्पोरेट कार्यालय में की है। 
  • थीम: Run with Soldiers, Run for Soldiers अर्थात "सैनिकों के साथ दौड़ें, सैनिकों के लिये दौड़ें"
  • स्थापना दिवस: यह घोषणा PNB के 132वें स्थापना दिवस समारोहों की शुरुआत का प्रतीक है, जो बैंक की विरासत और सामाजिक सहभागिता की भूमिका को दर्शाती है।
  • उद्देश्य: इस मैराथन का उद्देश्य फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना, राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना तथा नागरिक–सैन्य संपर्क को प्रोत्साहित करना है, जिसमें सैनिकों, पूर्व सैनिकों, युवाओं और आम नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
    • खेलकूद में भागीदारी को देशभक्ति के प्रतीकों के साथ जोड़कर, सोल्जरथॉन PNB के सामुदायिक सहभागिता, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण के व्यापक मिशन को सुदृढ़ करता है।

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भारत-थाईलैंड संयुक्त इन-सिटू एयर एक्सरसाइज़

चर्चा में क्यों?

भारतीय वायु सेना और रॉयल थाई वायु सेना दोनों के बीच परिचालन समन्वय और अंतरसंचालनीयता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक संयुक्त इन-सिटू एयर एक्सरसाइज़ आयोजित की जा रही हैं।

मुख्य बिंदु:

  • अभ्यास: इन-सिटू एयर एक्सरसाइज़ से तात्पर्य वास्तविक उड़ान और युद्ध-संबंधी परिस्थितियों में आयोजित संयुक्त प्रशिक्षण अभियान से है।
    • यह एक्सरसाइज़ बलों को पृथक सिमुलेशन के स्थान पर परिचालन परिवेश के निकट एकीकृत रूप से कार्य करने का अवसर प्रदान करती है।
  • प्रमुख विमान और प्लेटफॉर्म: भारत ने अपनी कई अग्रिम पंक्ति के विमान और प्लेटफॉर्म को तैनात किया है, जिनमें Su-30MKI लड़ाकू विमान, एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS), एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) प्लेटफॉर्म तथा IL-78 मध्य-वायु ईंधन भरने वाले विमान सम्मिलित हैं।
    • थाई वायु सेना अपने ग्रिपेन मल्टीरोल लड़ाकू विमान के साथ भाग ले रही है, जिससे संयुक्त उड़ान संचालन और सामरिक समन्वय को बढ़ावा मिल रहा है। 
  • उद्देश्य: इस अभ्यास का प्राथमिक उद्देश्य दोनों वायु सेनाओं के बीच हवाई अभियानों में परिचालन समन्वय, अंतरसंचालनीयता और पारस्परिक समझ को सुदृढ़ करना है।
  • रणनीतिक महत्त्व: यह अभ्यास भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और थाईलैंड की एक्ट वेस्ट पॉलिसी के व्यापक ढाँचे के भीतर भारत और थाईलैंड के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को उजागर करता है।
  • लाभ: एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम और एरियल रिफ्यूलिंग प्लेटफॉर्म जैसे फोर्स मल्टीप्लायरों की भागीदारी निगरानी, कमांड और कंट्रोल तथा विस्तारित मिशन सहनशक्ति क्षमताओं के उन्नत एकीकरण को प्रदर्शित करती है। 

और पढ़ें: एक्ट ईस्ट पॉलिसी


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भारत में निर्मित ओरल पोलियो वैक्सीन (nOPV2) को WHO की पूर्व-अर्हता प्राप्त

चर्चा में क्यों?

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नए प्रकार के ओरल पोलियो वैक्सीन (nOPV2) को पूर्व-अर्हता (Pre-qualification) प्रदान की है, जिसे वैश्विक स्तर पर टीकों की बेहतर आपूर्ति के माध्यम से पोलियो प्रकोप को अधिक स्थायी रूप से नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

मुख्य बिंदु:

  • विनिर्माण: यह उपलब्धि भारत के लिये विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इस टीके का निर्माण हैदराबाद स्थित कंपनी बायोलॉजिकल ई. लिमिटेड (BioE) द्वारा किया जा रहा है।
  • स्वास्थ्य सुरक्षा को प्रोत्साहन: यह स्वीकृति राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा तथा वैश्विक पोलियो उन्मूलन अभियान में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करती है।
  • nOPV2 एक ‘गेम-चेंजर’ के रूप में: वर्तमान पोलियो उन्मूलन में प्राथमिक चुनौती सर्कुलेटिंग वैक्सीन-डेरिव्ड पोलियोवायरस (cVDPV2) है - ऐसे प्रकोप जो तब होते हैं जब पारंपरिक ओरल वैक्सीन में कमज़ोर वायरस कम प्रतिरक्षित समुदायों में उत्परिवर्तन के कारण एक घातक रूप में वापस आ जाता है। 
  •  आनुवंशिक स्थिरता: nOPV2 को आनुवंशिक रूप से अधिक स्थिर बनाया गया है, जिससे पारंपरिक टीकों की तुलना में पक्षाघातकारी रूप में परिवर्तित होने का जोखिम लगभग 80% तक कम हो जाता है।
  • विशाल उत्पादन क्षमताबायोलॉजिकल ई. लिमिटेड से प्रति वर्ष 600 मिलियन खुराक का उत्पादन होने की संभावना है, जिससे इंडोनेशिया स्थित मूल निर्माता पर निर्भरता घटेगी और वैश्विक आपूर्ति में विविधता आएगी।
  • लॉजिस्टिक्स: इस वैक्सीन की सेल्फ लाइफ 24 महीने है तथा इसे मानक तापमान पर छह माह तक संगृहीत किया जा सकता है, जिससे इसे दूरदराज़ क्षेत्रों तक पहुँचाना सुगम होगा।
  • विश्व पोलियो दिवस: यह दिवस प्रतिवर्ष 24 अक्तूबर को मनाया जाता है, ताकि देशों को पोलियो के विरुद्ध संघर्ष में निरंतर सतर्कता बनाए रखने के लिये प्रेरित किया जा सके।

और पढ़ें: पोलियो


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भ्रष्टाचार बोध सूचकांक 2025

चर्चा में क्यों?

भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (CPI) 2025, जिसे ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने जारी किया, 182 देशों और क्षेत्रों को 0 (अत्यधिक भ्रष्ट) से 100 (अत्यंत स्वच्छ) के पैमाने पर रैंक करता है। यह रैंकिंग 13 स्वतंत्र डेटा स्रोतों से प्राप्त विशेषज्ञ आकलनों और व्यावसायिक धारणा सर्वेक्षणों के आधार पर निर्धारित की गई है।

मुख्य बिंदु

  • रैंकिंग: भारत 182 देशों में से 91वें स्थान पर रहा।
  • स्कोर: भारत का स्कोर 100 में से 39 रहा, जो पिछले वर्ष के 38 के स्कोर से थोड़ा सुधार दर्शाता है। 
  • प्रगति: हालाँकि इससे भारत को वर्ष 2024 की 96वीं रैंक से पाँच स्थान ऊपर चढ़ने में मदद मिली, लेकिन यह वैश्विक औसत स्कोर 43 से नीचे बना हुआ है।
    • भारत की रैंकिंग में सुधार: इस मामूली सुधार का श्रेय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) और ई-गवर्नेंस के विस्तार को दिया जाता है, जिससे कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में बिचौलियों द्वारा भ्रष्टाचार कम हुआ है।
      • चिंताएँ: रिपोर्ट में कहा गया है कि सेवाओं में निम्न स्तर की रिश्वतखोरी में कमी आई है, लेकिन राजनीतिक वित्तपोषण और मुखबिरों तथा पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं।
  • क्षेत्रीय तुलना: भारत पाकिस्तान (136वें) और बांग्लादेश (150वें) से बेहतर है, लेकिन भूटान (18वें) और चीन (75वें) से पीछे है।
  • शीर्ष देश: डेनमार्क (प्रथम, स्कोर 89) सबसे कम भ्रष्ट देश के रूप में अग्रणी, इसके बाद फिनलैंड और सिंगापुर (तीसरे स्थान पर, एशिया में सर्वोच्च) हैं। न्यूज़ीलैंड और नॉर्वे शीर्ष पाँच में शामिल हैं, जो नॉर्डिक और प्रशांत क्षेत्र के शासन मॉडल की निरंतर पारदर्शिता को दर्शाता है।
  • सबसे निचले पायदान: गृहयुद्ध, राज्य विफलता या निरंकुश शासन से जूझ रहे देशों में सोमालिया और दक्षिण सूडान सबसे निचले पायदान पर (स्कोर 9) हैं। इसके पहले वेनेजुएला, यमन और लीबिया हैं, जो सार्वजनिक जवाबदेही और कानून के शासन पर दीर्घकालिक संघर्ष के विनाशकारी प्रभाव को दर्शाते हैं।
  • वैश्विक निष्कर्ष: वैश्विक औसत स्कोर घटकर 42 हो गया, जो पिछले दशक में सबसे कम है, यह दर्शाता है कि विश्व में भ्रष्टाचार की धारणा बिगड़ रही है।
  • विशेष आँकड़ा: 182 देशों में से 122 देशों ने 50 से कम अंक प्राप्त किये, जो दर्शाता है कि अधिकांश राष्ट्र सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार नियंत्रण में संघर्षरत हैं।

और पढ़ें: भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (CPI)


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