दृष्टि के NCERT कोर्स के साथ करें UPSC की तैयारी और जानें
ध्यान दें:

उत्तर प्रदेश स्टेट पी.सी.एस.

  • 20 Mar 2026
  • 0 min read
  • Switch Date:  
उत्तर प्रदेश Switch to English

UP ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत MoU पर हस्ताक्षर किये

चर्चा में क्यों?

उत्तर प्रदेश सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत भारत सरकार के साथ एक सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये हैं, जो मिशन के सुधार-उन्मुख क्रियान्वयन ढाँचे में राज्य के प्रवेश को दर्शाता है।

  • जल जीवन मिशन 2.0 को इससे पहले 10 मार्च, 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया था।

मुख्य बिंदु:

  • MoU पर हस्ताक्षर: जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत केंद्र और उत्तर प्रदेश के बीच एक सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए, जिसका उद्देश्य ग्रामीण पेयजल शासन को सुदृढ़ करना और सतत सेवा वितरण सुनिश्चित करना है।
    • यह हस्ताक्षर जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
    • इस MoU में 11 प्रमुख संरचनात्मक सुधार क्षेत्रों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है, जिनमें शासन संरचना, सेवा उपयोगिता ढाँचा, सहभागी शासन तथा अनुसंधान एवं नवाचार शामिल हैं।
  • फोकस: यह सुधार-आधारित ढाँचा जवाबदेही, सुनिश्चित सेवा वितरण, संस्थागत क्षमता निर्माण, डिजिटल शासन और सामुदायिक भागीदारी पर बल देता है, ताकि ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
  • प्रौद्योगिकी: इसमें ‘जल अर्पण’ प्रक्रिया के माध्यम से पूर्ण हुई पाइप जल आपूर्ति योजनाओं को ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने, योजना निर्माण के लिये निर्णय सहायता प्रणाली (DSS) को क्रियान्वित करने तथा स्थानीय सेवा मूल्यांकन के लिये ‘मेरी पंचायत’ ऐप को लागू करने के प्रावधान शामिल हैं।
  • अभियान: इस समझौते में ‘जल उत्सव’ मनाने का प्रावधान है, जो ग्राम पंचायत से राष्ट्रीय स्तर तक तीन-स्तरीय वार्षिक जल उत्सव अभियान है। राष्ट्रीय जल महोत्सव 2026 को मार्च में शुरू किया गया।
    • जल जीवन मिशन को बढ़े हुए बजट के साथ दिसंबर 2028 तक विस्तारित किया गया है, जिसका लक्ष्य सभी ग्रामीण घरों में नल से जल आपूर्ति, गुणवत्ता, स्थिरता और सामुदायिक स्वामित्व सुनिश्चित करना है।
  • प्रभाव: संरचनात्मक सुधारों और सुदृढ़ क्रियान्वयन के माध्यम से यह मिशन नियमित, सुरक्षित और टिकाऊ पेयजल सेवाएँ सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखता है, जिससे जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा, विशेषकर ग्रामीण समुदायों तथा महिलाओं के लिये।

और पढ़ें: जल जीवन मिशन 2.0, मेरी पंचायत ऐप, राष्ट्रीय जल महोत्सव 2026


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

भारत विश्व का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक बनकर उभरा

चर्चा में क्यों?

भारत विश्व का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक देश बनकर उभरा है, जो वैश्विक नारियल उत्पादन में लगभग 30.37% का योगदान देता है। इस क्षेत्र में उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिये भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2026–27 में नारियल प्रोत्साहन योजना की घोषणा की है।

मुख्य बिंदु:

  • वैश्विक नेतृत्व: भारत वैश्विक नारियल उत्पादन का लगभग 30.37% योगदान देता है, जिससे वह विश्व का अग्रणी उत्पादक बन गया है।
  • प्रमुख नारियल उत्पादक राज्य: केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल प्रमुख उत्पादक राज्य हैं, जो मिलकर कुल उत्पादन का अधिकांश हिस्सा प्रदान करते हैं।
    • भारत में नारियल की खेती लगभग 2,165.20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में होती है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह क्षेत्र लगभग 12,390 हजार हेक्टेयर है।
    • देश में प्रतिवर्ष लगभग 21,373.62 मिलियन नारियल का उत्पादन होता है, जो कृषि उत्पादन में इस फसल के महत्त्व को दर्शाता है।
  • जीविकोपार्जन समर्थन: लगभग 30 मिलियन लोग, जिनमें करीब 10 मिलियन किसान शामिल हैं, नारियल की खेती और इससे संबंधित गतिविधियों पर अपनी आजीविका के लिये निर्भर हैं।
  • योजना: सरकार ने केंद्रीय बजट 2026–27 में नारियल प्रोत्साहन योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य पुराने और अल्प-उत्पादक पेड़ों को उच्च-उपज वाली किस्मों से बदलने जैसे उपायों के माध्यम से उत्पादन तथा उत्पादकता बढ़ाना है।
    • यह पहल उच्च-मूल्य कृषि के लिये 350 करोड़ रुपये के व्यापक आवंटन का हिस्सा है, जिसमें काजू और कोको की खेती को भी समर्थन शामिल है।
  • महत्त्व: इस योजना का उद्देश्य नारियल उत्पादन में भारत की प्रतिस्पर्द्धात्मकता को सुदृढ़ करना, किसानों की आय बढ़ाना तथा इस क्षेत्र में स्थिरता और उत्पादकता को बढ़ावा देना है।

और पढ़ें: केंद्रीय बजट 2026-27


close
Share Page
images-2
images-2