राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
कैंसर उपचार अवसंरचना हेतु NTPC–GCRI समझौता ज्ञापन (MoA)
चर्चा में क्यों?
NTPC पश्चिमी क्षेत्र ने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल के तहत रेडियोथेरेपी सेवाओं के उन्नयन के लिये गुजरात कैंसर एवं अनुसंधान संस्थान (GCRI) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किये।
मुख्य बिंदु
- उद्देश्य: अहमदाबाद स्थित सिद्धपुर सैटेलाइट सेंटर में उच्च-ऊर्जा लिनियर एक्सेलेरेटर (LINAC) की खरीद और स्थापना के माध्यम से रेडियोथेरेपी सेवाओं को सुदृढ़ करना।
- वित्तपोषण: क्षमता उन्नयन के लिये NTPC ने अपनी CSR पहल के अंतर्गत ₹23.16 करोड़ की राशि स्वीकृत की है।
- प्रौद्योगिकी उन्नयन: इस सहायता से उन्नत और परिष्कृत रेडियोथेरेपी उपकरणों की खरीद व स्थापना संभव होगी, जिससे आधुनिक कैंसर उपचार क्षमताओं में सुधार होगा।
- CSR फोकस: यह पहल समावेशी विकास के प्रति NTPC की प्रतिबद्धता को दर्शाती है तथा सार्थक CSR हस्तक्षेपों के माध्यम से महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य अवसंरचना को मज़बूत करते हुए सतत विकास लक्ष्य–3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) में योगदान देती है।
- क्षेत्रीय स्वास्थ्य केंद्र: GCRI को सुदृढ़ करने से रोगियों के आउट-ऑफ-पॉकेट व्यय (OOPE) में कमी आएगी।
उत्तर प्रदेश Switch to English
बाराबंकी की बालिका को धूल-रहित गेहूँ थ्रेशर के लिये प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार
चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी की 17 वर्षीय बालिका को किसानों के स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के उद्देश्य से धूल-रहित गेहूँ थ्रेशिंग उपकरण विकसित करने हेतु प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार के लिये चुना गया है।
मुख्य बिंदु
- पुरस्कार: प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार बच्चों के लिये भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो नवाचार, विज्ञान, सामाजिक सेवा, खेल, कला और संस्कृति में असाधारण उपलब्धियों के लिये प्रदान किया जाता है।
- पुरस्कार विजेता: पूजा पाल, ग्राम अगेहरा, बाराबंकी (उत्तर प्रदेश) की निवासी है।
- नवाचार: धूल-रहित गेहूँ थ्रेशर अटैचमेंट (भूसा–धूल पृथक्करण यंत्र), जो थ्रेशिंग के दौरान भूसे को अलग करता है और धूल को फँसाकर वायु में फैलने वाले कणों को कम करता है। जो थ्रेशिंग प्रक्रिया के दौरान भूसे का पृथक्करण करता है तथा धूल को रोककर वायुमंडल में फैलने वाले कणों की मात्रा घटाता है।
- मान्यता एवं सहयोग:
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की INSPIRE पुरस्कार योजना के अंतर्गत समर्थन।
- सकुरा साइंस हाई स्कूल प्रोग्राम (जापान) के लिये चयन।
- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बाल वैज्ञानिक के रूप में सम्मानित।
- समस्या का समाधान: पारंपरिक गेहूँ थ्रेशिंग कार्यों के दौरान उड़ने वाली धूल से होने वाली श्वसन संबंधी बीमारियाँ और आँखों में जलन।
- प्रेरणा: स्कूल जाने वाले बच्चों और किसानों पर धूल के प्रतिकूल प्रभावों के अवलोकन से प्रेरित है।
- घर में उपयोग होने वाली पारंपरिक छलनी/छानने की पद्धतियों से विचार ग्रहण किये गए।
- STEM में महिलाएँ: यह हाशिये पर मौजूद पृष्ठभूमि से आने वाली बालिकाओं के लिये विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक सशक्त प्रेरणा का कार्य करता है।
- महत्त्व: यह पहल स्थानीय स्तर के नवाचार, छात्र-नेतृत्वित समस्या समाधान तथा कृषि में व्यावसायिक स्वास्थ्य सुधार हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका को उजागर करती है।
मध्य प्रदेश Switch to English
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की शिक्षा में कार्यकारी भाषा के रूप में हिंदी को प्रोत्साहन: IIT इंदौर
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इंदौर (IIT-इंदौर) ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की शिक्षा में हिंदी को कार्यकारी भाषा के रूप में प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल की है।
मुख्य बिंदु
- उद्देश्य: उच्च शिक्षा में तकनीकी हिंदी को बढ़ावा देना तथा हिंदी-माध्यम पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों के लिये भाषायी अवरोधों को समाप्त करना।
- आयोजन: यह विचार IIT इंदौर द्वारा आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय तकनीकी हिंदी संगोष्ठी अभ्युदय-3 के दौरान प्रमुख रूप से रेखांकित किया गया।
- क्रियान्वयन: IIT इंदौर में प्रथम वर्ष की कुछ कक्षाएँ हिंदी में संचालित की जा रही हैं, कक्षा-चर्चाओं में वैज्ञानिक अवधारणाओं की व्याख्या हिंदी के माध्यम से की जाती है तथा शोध-सार आधिकारिक हिंदी भाषा मानकों के अनुरूप संकलित किये जा रहे हैं।
- नेतृत्व: IIT-इंदौर के निदेशक के अनुसार, यह पहल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को जनभाषाओं से जोड़ने के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप है तथा समावेशन एवं भाषायी विविधता को सुदृढ़ करती है।
- परिणाम: अभ्युदय-3 का एक प्रमुख निष्कर्ष “स्मारिका” का विमोचन रहा, जिसमें विज्ञान, अभियांत्रिकी एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी से संबंधित हिंदी में लिखे गये 26 समीक्षित शोध-पत्र संकलित हैं।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020: यह पहल NEP 2020 के उस प्रावधान के प्रत्यक्ष अनुरूप है, जो गहन चिंतन तथा नवाचार को प्रोत्साहित करने हेतु भारतीय भाषाओं में शिक्षण को बढ़ावा देने पर बल देता है।
- सरकारी सहयोग: केंद्रीय बजट 2025-26 में प्रारंभ की गई भारतीय भाषा पुस्तक योजना (BBPS) उच्च शिक्षा के लिये भारतीय भाषाओं में डिजिटल पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर, इन प्रयासों को सहयोग प्रदान करती है।
बिहार Switch to English
पटना उच्च न्यायालय में दो न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई
चर्चा में क्यों?
रितेश कुमार और प्रवीण कुमार को संघीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की मंज़ूरी के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
मुख्य बिंदु
- नियुक्ति प्राधिकरण: भारत के राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श करके करते हैं।
- नियुक्ति अधिसूचना: विधि एवं न्याय मंत्रालय ने सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिशों के बाद संविधान के अनुच्छेद 217 के तहत इन नियुक्तियों को जारी किया।
- न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि: उनकी नियुक्तियों के साथ पटना उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कुल संख्या 36 हो जाएगी।
- महत्त्व: पटना उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य मामले की लंबित स्थिति को कम करना और न्यायिक कार्यक्षमता में सुधार करना है।
पटना उच्च न्यायालय
- स्थापना: 3 फरवरी, 1916
- कानूनी आधार: वर्ष 1915 के भारत सरकार अधिनियम के तहत स्थापित।
- प्रथम मुख्य न्यायाधीश: माननीय न्यायमूर्ति सर एडवर्ड मेनार्ड डेस चैंप्स।
- पटना उच्च न्यायालय के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश: न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू।
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