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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की शिक्षा में कार्यकारी भाषा के रूप में हिंदी को प्रोत्साहन: IIT इंदौर

  • 06 Jan 2026
  • 12 min read

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इंदौर (IIT-इंदौर) ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की शिक्षा में हिंदी को कार्यकारी भाषा के रूप में प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल की है।

मुख्य बिंदु

  • उद्देश्य: उच्च शिक्षा में तकनीकी हिंदी को बढ़ावा देना तथा हिंदी-माध्यम पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों के लिये भाषायी अवरोधों को समाप्त करना।
  • आयोजन: यह विचार IIT इंदौर द्वारा आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय तकनीकी हिंदी संगोष्ठी अभ्युदय-3 के दौरान प्रमुख रूप से रेखांकित किया गया।
  • क्रियान्वयन: IIT इंदौर में प्रथम वर्ष की कुछ कक्षाएँ हिंदी में संचालित की जा रही हैं, कक्षा-चर्चाओं में वैज्ञानिक अवधारणाओं की व्याख्या हिंदी के माध्यम से की जाती है तथा शोध-सार आधिकारिक हिंदी भाषा मानकों के अनुरूप संकलित किये जा रहे हैं।
  • नेतृत्व: IIT-इंदौर के निदेशक के अनुसार, यह पहल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को जनभाषाओं से जोड़ने के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप है तथा समावेशन एवं भाषायी विविधता को सुदृढ़ करती है।
  • परिणाम: अभ्युदय-3 का एक प्रमुख निष्कर्ष “स्मारिका” का विमोचन रहा, जिसमें विज्ञान, अभियांत्रिकी एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी से संबंधित हिंदी में लिखे गये 26 समीक्षित शोध-पत्र संकलित हैं।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020: यह पहल NEP 2020 के उस प्रावधान के प्रत्यक्ष अनुरूप है, जो गहन चिंतन तथा नवाचार को प्रोत्साहित करने हेतु भारतीय भाषाओं में शिक्षण को बढ़ावा देने पर बल देता है।
  • सरकारी सहयोग: केंद्रीय बजट 2025-26 में प्रारंभ की गई भारतीय भाषा पुस्तक योजना (BBPS) उच्च शिक्षा के लिये भारतीय भाषाओं में डिजिटल पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर, इन प्रयासों को सहयोग प्रदान करती है।
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