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उत्तर प्रदेश

बाराबंकी की बालिका को धूल-रहित गेहूँ थ्रेशर के लिये प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार

  • 06 Jan 2026
  • 14 min read

चर्चा में क्यों?

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी की 17 वर्षीय बालिका को किसानों के स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के उद्देश्य से धूल-रहित गेहूँ थ्रेशिंग उपकरण विकसित करने हेतु प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार के लिये चुना गया है।

मुख्य बिंदु 

  • पुरस्कार: प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार बच्चों के लिये भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो नवाचार, विज्ञान, सामाजिक सेवा, खेल, कला और संस्कृति में असाधारण उपलब्धियों के लिये प्रदान किया जाता है।
  • पुरस्कार विजेता: पूजा पाल, ग्राम अगेहरा, बाराबंकी (उत्तर प्रदेश) की निवासी है।
  • नवाचार: धूल-रहित गेहूँ थ्रेशर अटैचमेंट (भूसा–धूल पृथक्करण यंत्र), जो थ्रेशिंग के दौरान भूसे को अलग करता है और धूल को फँसाकर वायु में फैलने वाले कणों को कम करता है।  जो थ्रेशिंग प्रक्रिया के दौरान भूसे का पृथक्करण करता है तथा धूल को रोककर वायुमंडल में फैलने वाले कणों की मात्रा घटाता है।
  • मान्यता एवं सहयोग:
    • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की INSPIRE पुरस्कार योजना के अंतर्गत समर्थन।
    • सकुरा साइंस हाई स्कूल प्रोग्राम (जापान) के लिये चयन।
    • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बाल वैज्ञानिक के रूप में सम्मानित।
  • समस्या का समाधान: पारंपरिक गेहूँ थ्रेशिंग कार्यों के दौरान उड़ने वाली धूल से होने वाली श्वसन संबंधी बीमारियाँ और आँखों में जलन
  • प्रेरणा: स्कूल जाने वाले बच्चों और किसानों पर धूल के प्रतिकूल प्रभावों के अवलोकन से प्रेरित है।
    • घर में उपयोग होने वाली पारंपरिक छलनी/छानने की पद्धतियों से विचार ग्रहण किये गए।
  • STEM में महिलाएँ: यह हाशिये पर मौजूद पृष्ठभूमि से आने वाली बालिकाओं के लिये विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक सशक्त प्रेरणा का कार्य करता है।
  • महत्त्व: यह पहल स्थानीय स्तर के नवाचार, छात्र-नेतृत्वित समस्या समाधान तथा कृषि में व्यावसायिक स्वास्थ्य सुधार हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका को उजागर करती है।
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