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छत्तीसगढ स्टेट पी.सी.एस.

  • 04 Dec 2021
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छत्तीसगढ़ को मिले तीन राष्ट्रीय पुरस्कार

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चर्चा में क्यों?

3 दिसंबर, 2021 को अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में दिव्यांगजनों के कल्याण के उत्कृष्ट कार्यों के लिये छत्तीसगढ़ को तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया। 

प्रमुख बिंदु 

  • छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया ने राष्ट्रपति के हाथों ये पुरस्कार ग्रहण किये। 
  • दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों को ब्रेल लिपि में पाठ्य पुस्तक, साहित्य एवं ज्ञानवर्धक पुस्तकों के साथ ही सुगम्य पुस्तकालय के अंतर्गत ई-पुस्तकालय में ऑनलाइन शिक्षण में उल्लेखनीय कार्य के लिये ब्रेल प्रेस बिलासपुर को नेशनल अवार्ड मिला है। 
  • बिलासपुर स्थित ब्रेल प्रेस ने दृष्टिबाधितों के लिये पाठ्य सामग्री, साहित्य तैयार करने के साथ निर्वाचन हेतु मतपत्र तैयार किया है। इसके साथ ही ब्रेल प्रेस की दृष्टिहीनों के लिये ऑनलाइन पुस्तकालय की सुविधा से विद्यार्थियों को कोरोना काल में बहुत मदद मिली है। 
  • इसके अलावा नवा रायपुर अटल नगर में दिव्यांगजनों के लिये सड़क, भवन, सार्वजनिक स्थल तथा अन्य स्थानों पर बाधारहित वातावरण निर्माण करने, दिव्यांगजनों के लिये शौचालय निर्माण आदि कार्यों के लिये नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण को राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया है। 
  • साथ ही समता कॉलोनी रायपुर में नुक्कड़ टी कैफे वेंचर्स, एल.एल.पी. द्वारा श्रवण बाधित दिव्यांग व्यक्तियों को स्वरोज़गार से जोड़ने के लिये नुक्कड़ टी कैफे का संचालन कुशलतापूर्वक किया जा रहा है। इसमें श्रवण बाधित व्यक्तियों द्वारा जनसामान्य को अपनी सेवाएँ दी जा रही हैं। समाज में दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति सकारात्मक वातावरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य के लिये उन्हें भी राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया।

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इंडियन एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट एंड माइक्रोबायोलॉजिस्ट का 69वाँ वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन

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चर्चा में क्यों?

3 दिसंबर, 2021 को छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुईया उइके इंडियन एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट एंड माइक्रोबायोलॉजिस्ट के 69वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन में वर्चुअल रूप से सम्मिलित हुईं।

प्रमुख बिंदु

  • यह सम्मेलन ‘ए मीटिंग ऑफ माइंड्स टू रिवाईस, एडवांस्ड प्रेक्टिसेस एंड प्रोग्रेस इन पैथोलॉजी’विषय पर आधारित था। 
  • इस सम्मेलन के लिये 1500 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया है और 600 से 700 वैज्ञानिकों द्वारा पोस्टर एवं पेपर्स प्रस्तुत किये जा रहे हैं। 
  • इस सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के द्वारा पैथोलॉजी विषय की विभिन्न उपशाखाओं, जैसे- हिस्टोपैथोलॉजी, सायटोलॉजी, क्लिनिकल पैथोलॉजी, मॉलिक्यूलर पैथोलॉजी पर व्याख्यान दिये गए।
  • राज्यपाल ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा विज्ञान में पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी का महत्त्वपूर्ण योगदान है। कोरोना जैसी भयानक महामारी की पहचान भी हम पैथोलॉजी विज्ञान के माध्यम से कर पाए हैं और इसका हम बचाव भी कर रहे हैं। 
  • पैथोलॉजी साइंस मेडिकल साइंस की महत्त्वपूर्ण शाखा है, जिसमें विषय विशेषज्ञ रोग के कारण, रोग द्वारा उत्पन्न संरचनात्मक असमानताओं एवं परिवर्तनों का अध्ययन करते हैं। 
  • रोगों के निदान में पैथोलॉजिस्ट की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। विभिन्न प्रायोगिक जाँच के द्वारा सटीक रूप से बीमारी का पता लगाकर ही सही उपचार किया जा सकता है और जाँच से उपचार की वास्तविक प्रगति को भी देखा जा सकता है। 
  • वर्षों पहले जब चिकित्सा विज्ञान पूर्ण विकसित नहीं था, तब सिर्फ लक्षणों के आधार पर इलाज हुआ करता था, लेकिन पैथोलॉजी साइंस के विकास के साथ हम विभिन्न परीक्षण कर आसानी से यह पता कर सकते हैं कि मरीज़ को कौन-सा रोग है और उसके आधार पर हम उसका सटीक इलाज कर सकते हैं।

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