दृष्टि के NCERT कोर्स के साथ करें UPSC की तैयारी और जानें
ध्यान दें:

छत्तीसगढ़ स्टेट पी.सी.एस.

  • 20 Mar 2026
  • 0 min read
  • Switch Date:  
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

भारत विश्व का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक बनकर उभरा

चर्चा में क्यों?

भारत विश्व का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक देश बनकर उभरा है, जो वैश्विक नारियल उत्पादन में लगभग 30.37% का योगदान देता है। इस क्षेत्र में उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिये भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2026–27 में नारियल प्रोत्साहन योजना की घोषणा की है।

मुख्य बिंदु:

  • वैश्विक नेतृत्व: भारत वैश्विक नारियल उत्पादन का लगभग 30.37% योगदान देता है, जिससे वह विश्व का अग्रणी उत्पादक बन गया है।
  • प्रमुख नारियल उत्पादक राज्य: केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल प्रमुख उत्पादक राज्य हैं, जो मिलकर कुल उत्पादन का अधिकांश हिस्सा प्रदान करते हैं।
    • भारत में नारियल की खेती लगभग 2,165.20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में होती है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह क्षेत्र लगभग 12,390 हजार हेक्टेयर है।
    • देश में प्रतिवर्ष लगभग 21,373.62 मिलियन नारियल का उत्पादन होता है, जो कृषि उत्पादन में इस फसल के महत्त्व को दर्शाता है।
  • जीविकोपार्जन समर्थन: लगभग 30 मिलियन लोग, जिनमें करीब 10 मिलियन किसान शामिल हैं, नारियल की खेती और इससे संबंधित गतिविधियों पर अपनी आजीविका के लिये निर्भर हैं।
  • योजना: सरकार ने केंद्रीय बजट 2026–27 में नारियल प्रोत्साहन योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य पुराने और अल्प-उत्पादक पेड़ों को उच्च-उपज वाली किस्मों से बदलने जैसे उपायों के माध्यम से उत्पादन तथा उत्पादकता बढ़ाना है।
    • यह पहल उच्च-मूल्य कृषि के लिये 350 करोड़ रुपये के व्यापक आवंटन का हिस्सा है, जिसमें काजू और कोको की खेती को भी समर्थन शामिल है।
  • महत्त्व: इस योजना का उद्देश्य नारियल उत्पादन में भारत की प्रतिस्पर्द्धात्मकता को सुदृढ़ करना, किसानों की आय बढ़ाना तथा इस क्षेत्र में स्थिरता और उत्पादकता को बढ़ावा देना है।

और पढ़ें: केंद्रीय बजट 2026-27


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026

चर्चा में क्यों?

वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026 को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वेलबीइंग रिसर्च सेंटर द्वारा गैलप वर्ल्ड पोल और संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क के सहयोग से जारी किया गया। इस रिपोर्ट में फिनलैंड को लगातार नौवें वर्ष विश्व का सबसे खुशहाल देश घोषित किया गया।

मुख्य बिंदु:

  • रैंकिंग मानदंड: हैप्पीनेस को छह प्रमुख संकेतकों के आधार पर मापा जाता है— प्रति व्यक्ति GDP, सामाजिक समर्थन, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, जीवन के निर्णय लेने की स्वतंत्रता, उदारता और भ्रष्टाचार की धारणा।
    • शीर्ष देश: फिनलैंड (पहला), आइसलैंड (दूसरा), डेनमार्क (तीसरा), कोस्टा रिका (चौथा), स्वीडन (पाँचवाँ), नॉर्वे (छठा), नीदरलैंड (सातवाँ), इज़राइल (आठवाँ), लक्ज़मबर्ग (नौवाँ), स्विट्ज़रलैंड (दसवाँ)।
      • कोस्टा रिका (चौथा) 2026 में सबसे बड़ी ‘आश्चर्यजनक’ उपलब्धि है, जिसने किसी लैटिन अमेरिकी देश के लिये अब तक की सबसे ऊँची रैंक हासिल की है।
    • निचले देश: अफगानिस्तान (147वाँ), सिएरा लियोन (146वाँ), मलावी (145वाँ), ज़िम्बाब्वे (144वाँ), बोत्सवाना (143वाँ), यमन (142वाँ), लेबनान (141वाँ), DR कांगो (140वाँ), मिस्र (139वाँ), तंज़ानिया (138वाँ)।
  • भारत की रैंक: भारत को 116वाँ स्थान मिला है, जिसमें जीवन मूल्यांकन स्कोर 4.536 है।
    • पाकिस्तान (104वाँ) और नेपाल (99वाँ) भारत से ऊपर हैं, जो मज़बूत सामाजिक समर्थन एवं कल्याण संकेतकों को दर्शाता है।
    • BRICS सदस्यों में चीन 65वें स्थान पर रहा, जिसके बाद रूस (79वें) और ईरान (97वें) का स्थान रहा।
  • क्षेत्रीय रुझान: यूरोप के नॉर्डिक देश प्रमुख रूप से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि दक्षिण एशिया और सब-सहारा अफ्रीका सामाजिक तथा आर्थिक समस्याओं के कारण चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
  • महत्त्व: यह रिपोर्ट आर्थिक विकास से लेकर समावेशी विकास, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण की ओर नीति के फोकस में बदलाव पर ज़ोर देती है।

और पढ़ें: वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2025


close
Share Page
images-2
images-2