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छत्तीसगढ स्टेट पी.सी.एस.

  • 01 Dec 2022
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छत्तीसगढ़ के चार और अस्पतालों को मिला एनक्यूएएस सर्टिफिकेशन

चर्चा में क्यों?

30 नवंबर, 2022 को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के चार और सरकारी अस्पतालों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाण-पत्र (National Quality Assurance Standard Certificate) प्रदान किया है। इनमें धमतरी ज़िले के दो तथा दुर्ग व रायगढ़ के एक-एक अस्पताल शामिल हैं।

प्रमुख बिंदु 

  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने धमतरी ज़िले के गेदरा और गाड़ाडीह हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (HWC) उप स्वास्थ्य केंद्र, दुर्ग के अहेरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर उप स्वास्थ्य केंद्र तथा रायगढ़ के रामभाटा शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को एनक्यूएएस प्रमाण-पत्र जारी किया है।
  • भारत सरकार की टीम द्वारा अस्पताल के विभिन्न मानकों पर मूल्यांकन में गाड़ाडीह उप स्वास्थ्य केंद्र को 94 प्रतिशत, गेदरा उप स्वास्थ्य केंद्र और रामभाटा शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को 90-90 प्रतिशत तथा अहेरी उप स्वास्थ्य केंद्र को 87 प्रतिशत अंक मिले हैं।
  • अब तक प्रदेश के कुल 61 अस्पतालों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाण-पत्र प्रदान किया जा चुका है। इनमें दस ज़िला अस्पताल, सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 26 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 13 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और पाँच उप स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं।
  • केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की टीम द्वारा राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक सर्टिफिकेशन के लिये अस्पतालों का 12 मानकों पर मूल्यांकन किया जाता है। इसके लिये अस्पताल द्वारा सेवा प्रदायगी, मरीज संतुष्टि, क्लिनिकल सर्विसेस, इनपुट, संक्रमण नियंत्रण, सपोर्ट सर्विसेस, गुणवत्तापूर्ण प्रबंध, आउटपुट जैसे मानकों की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाता है। मूल्यांकन में खरा उतरने वाले अस्पतालों को ही भारत सरकार द्वारा गुणवत्ता प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है।

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निजी क्षेत्र में स्थापित देश का पहला मछली अनुसंधान केंद्र

चर्चा में क्यों?

30 नवंबर, 2022 को छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बलौदाबाज़ार-भाटापारा ज़िले के ग्राम रामपुर में थाईलैंड के वैज्ञानिकों के तकनीकी सहयोग से मछली अनुसंधान केंद्र स्थापना की गई है। निजी क्षेत्र में स्थापित होने वाला यह केंद्र छत्तीसगढ़ और देश में अपने तरह का पहला केंद्र है।

प्रमुख बिंदु 

  • राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी डॉ. सी. सुवर्णा ने अपनी दो-दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान रामपुर में संचालित मछली पालन की एक्वा जेनेटिक केंद्र का अवलोकन किया। साथ ही डॉ. सुवर्णा ने बलौदाबाज़ार-भाटापारा ज़िले के सिमगा विकासखंड के ग्राम बाईकोनी में स्थित प्रतिदिन 100 टन उत्पादन की क्षमता वाले वृहद निजी मत्स्य आहार केंद्र का शुभारंभ भी किया।
  • एक्वा जेनेटिक के इस केंद्र की स्थापना एम हेचरी रायपुर एवम् मनीत ग्रुप थाईलैंड के संयुत्त उपक्रम द्वारा की गई है। इस अनुसंधान केंद्र में थाईलैंड के वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ ही प्रशिक्षण भी देंगे।
  • लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में फैले इस अनुसंधान केंद्र में मछली के जेनेटिक्स पर अनुसंधान के साथ-साथ तिलापिया मछली बीज का उत्पादन भी किया जा रहा है। इसके अलावा यहाँ मत्स्य कृषकों को मछली पालन के अत्याधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
  • ग्राम रामपुर में स्थापित अनुसंधान केंद्र से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के किसानों को उन्नत किस्म के मछली के बीज की आपूर्ति हो सकेगी। इससे छत्तीसगढ़ मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से प्रगति करेगा। इसके अलावा वृहद मत्स्य आहार केंद्र के प्रारंभ होने से प्रदेश के किसानों को स्थानीय स्तर पर कम दर पर मत्स्य आहार प्राप्त हो सकेगा।
  • गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ मछली बीज उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। अब यहाँ मछली अनुसंधान के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की इकाईयाँ भी आगे आ रही हैं।
  • डॉ. सुवर्णा ने सिमगा विकासखंड के ग्राम खेरवारी में बंद हो चुके खदानों में महिला स्व-सहायता समूह द्वारा केज कल्चर विधि से किये जा रहे मछली पालन का भी अवलोकन किया। समूह द्वारा यहाँ मछली पालन के लिये 12 केज तैयार किये गए हैं। इसके लिये प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 60 प्रतिशत और डी.एम.एफ से 40 प्रतिशत अनुदान दिया गया है।
  • अपने प्रवास के दौरान डॉ. सुवर्णा ने रायपुर ज़िले के तिल्दा विकासखंड के ग्राम पीकरीडीह स्थित वृहद बायोफ्लोक यूनिट का भी अवलोकन किया। इस यूनिट की स्थापना के लिये कृषक अंजू मिश्रा को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 60 प्रतिशत राशि अनुदान में मिला है। इस इकाई में तिलापिया और सिंगी मछली का पालन किया जा रहा है।  

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