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दिसंबर 2020

  • 18 Feb 2021
  • 48 min read

PRS के प्रमुख हाइलाइट्स

कोविड-19

SARS-CoV-2 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) ने SARS-CoV-2 वायरस के नए रूप को देखते हुए भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (Indian SARS-CoV-2 Genomics Consortium- INSACOG) की स्थापना का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव SARS-CoV-2 वायरस के नए वेरिएंट के मद्देनज़र रखा गया है। INSACOG देश में SARS-CoV-2 वायरस के जीनोम अनुक्रमण (Genome Sequencing) को विस्तार देने के लिये ज़िम्मेदार होगा। जीनोमिक अनुक्रमण का अर्थ है आनुवांशिकी का अध्ययन। वायरस के जीनोमिक अनुक्रमण से निम्नलिखित में मदद मिलेगी: 

(i) देश में वायरस के नए वेरिएंट की वर्तमान स्थिति को समझना।
(ii) जीनोमिक वेरिएंट का शुरू में पता लगाने लिये निगरानी तंत्र स्थापित करना।
(iii) असामान्य घटनाओं में जीनोमिक वेरिएंट को निर्धारित करना (जैसे- सुपर-स्प्रेडिंग और उच्च मृत्यु दर)।

देश में जीनोम अनुक्रमण को आसान बनाने के लिये एक द्वि-स्तरीय संरचना का प्रस्ताव रखा गया है: (i) केंद्रीय स्तर (ii) क्षेत्रीय स्तर। केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (National Centre for Disease Control) में एक नोडल इकाई बनाई जाएगी, जो कि राज्य/जिला सुरक्षा निगरानी इकाई के साथ समन्वय स्थापित करेगी। क्षेत्रीय स्तर पर क्षेत्रीय जीनोम अनुक्रमण प्रयोगशालाएँ (Regional Genome Sequencing Laboratories- RGSL) जीनोम अनुक्रमण का संचालन करेगी।

देश भर में 10 RGSL के माध्यम से डेटा अनुक्रमण का कार्य किया जाएगा। अनुक्रमण के बाद डेटा को राष्ट्रीय बायोमेडिकल जीनोमिक्स संस्थान, कल्याणी और जीनोमिकी तथा समवेत जीवविज्ञान संस्‍थान, दिल्‍ली (National Institute of Biomedical Genomics, Kalyani and Institute of Genomics and Integrative Biology, Delhi) स्थित राष्ट्रीय डेटाबेस में रखा जाएगा।

शुरुआत में जीनोम अनुक्रमण के लिये निम्नलिखित को वरीयता दी जाएगी: 

(i) पिछले दो महीनों के दौरान आरटी-पीसीआर के सकारात्मक नमूने। 
(ii) 23 नवंबर, 2020 से 22 दिसंबर, 2020 के दौरान पाए जाने वाले आरटी-पीसीआर पॉज़िटिव अंतर्राष्ट्रीय यात्री। 

इसके अतिरिक्त 23 नवंबर, 2020 से 5% पॉज़िटिव सैंपल्स की रैंडम सैंपलिंग को संबंधित RGSL में जीनोम अनुक्रमण के लिये भेजा जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रत्येक राज्य को प्रतिदिन 5% पॉज़िटिव नमूनों को जीनोम अनुक्रमण के लिये RGSL में भेजना होगा।

25 नवंबर, 2020 से 23 दिसंबर, 2020 के दौरान यूनाइटेड किंगडम से आने वाले सभी हवाई यात्रियों में 114 लोग पॉजिटिव (29 दिसंबर, 2020 तक) पाए गए थे और उनके नमूने को जीनोम अनुक्रमण के लिये भेज दिया गया। इनमें यूनाइटेड किंगडम में मिले जीनोम वेरिएंट के 6 नमूने पॉज़िटिव पाए गए और अन्य नमूनों का जीनोम अनुक्रमण किया जा रहा है।

आत्मनिर्भर भारत रोज़गार योजना 

नवंबर 2020 में वित्त मंत्री (Finance Minister) ने रोज़गार बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने के लिये उपायों की घोषणा की थी। आत्मनिर्भर भारत रोज़गार योजना (Atmanirbhar Bharat Rojgar Yojana) इनमें से एक था जिसके अंतर्गत सरकार भविष्य निधि अंशदान के लिये सब्सिडी प्रदान करेगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अब इस योजना को मंज़ूरी दे दी है।    

कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, (Employee Provident Fund and Miscellaneous Provisions Act) 1952 प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों के लिये अंशदान आधारित भविष्य निधि योजना प्रदान करता है। नई स्वीकृत योजना के अनुसार, केंद्र सरकार दो वर्ष के लिये नए कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि (Employees' Provident Funds- EPF) का भुगतान करेगी। 1,000 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के मामले में सरकार नियोक्ता और कर्मचारी दोनों में से प्रत्येक के 12% अंशदान को कवर करेगी। अन्य के लिये सरकार केवल कर्मचारी के EPF योगदान को कवर करेगी।

यह लाभ केवल उन कर्मचारियों को मिलेगा जो प्रतिमाह 15,000 रुपए से कम कमाते हैं और जिन्होंने 1 अक्तूबर, 2020 से 30 जून, 2021 के दौरान प्रतिष्ठानों में काम करना शुरू किया है। नए कर्मचारियों को निम्नलिखित के आधार पर परिभाषित किया गया है: 

(i) ऐसे कर्मचारी जो 1 अक्तूबर, 2020 से पहले कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employee Provident Fund Organisation- EPFO) के अंतर्गत पंजीकृत किसी भी प्रतिष्ठान में काम नहीं कर रहे थे और 1 अक्तूबर, 2020 से पहले उनके पास सार्वभौमिक खाता संख्या (Universal Account Number- UAN) या EPF सदस्य खाता संख्या नहीं था।

(ii) UAN धारक कोई भी EPF सदस्य जिसने 1 मार्च, 2020 से 30 सितंबर, 2020 के दौरान नौकरी छोड़ दी थी और 30 सितंबर, 2020 तक EPF के दायरे में आने वाले किसी भी प्रतिष्ठान में काम करना शुरू नहीं किया था। UAN एक अद्वितीय सदस्य संख्या है जिसे EPFO (1952 अधिनियम के तहत स्थापित) द्वारा आवंटित किया जाता है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिये योजना पर 1,584 करोड़ रुपए और पूरी योजना अवधि (वर्ष 2020-2023) हेतु 22,810 करोड़ रुपए के व्यय को मंज़ूरी दी है। 

COVID-19 प्रबंधन पर रिपोर्ट 

देश में कोरोना वायरस महामारी के प्रबंधन को लेकर गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है।

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पर्यावरण (संरक्षण) तीसरा संशोधन नियम, 2020 

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change) ने पर्यावरण (संरक्षण) तृतीय संशोधन नियम [Environment (Protection) Third Amendment Rules], 2020 को अधिसूचित किया। यह पर्यावरण (संरक्षण) नियम [Environment (Protection) Rules], 1986 में संशोधन करता है। 1986 के नियमों में यह निर्दिष्ट किया गया है कि सरकार अधिसूचनाओं के माध्यम से किसी क्षेत्र में औद्योगिक स्थानों या औद्योगिक गतिविधियों पर  प्रतिबंध लगा सकती है या उन्हें सीमित कर सकती है।  इस तरह के प्रतिबंधों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं: 

(i) औद्योगिक प्रदूषक और उत्सर्जन की सीमा तय करना (जैसे कि थर्मल पावर प्लांट से नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन की सीमा तय करना)। 
(ii) मानव बस्तियों से दूरी (मानव बस्तियों के निकट कुछ दूरी तक के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों पर प्रतिबंध)।

संशोधनों में COVID-19 महामारी के मद्देनज़र ऐसी सीमाओं वाली अधिसूचनाओं की वैधता को 30 जून, 2021 तक बढ़ाया गया है जो कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में समाप्त हो रही थी।


समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास 

चालू खाता घाटा GDP के 2.4% पर 

वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 7.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर (GDP का 1.1%) के घाटे की तुलना में वर्ष 2020-21 में इसी अवधि में भारत के चालू खाता घाटा में 15.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का अधिशेष (GDP का 2.4%) दर्ज किया गया। यह अधिशेष वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में दर्ज 19.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर (GDP का 3.8%) के अधिशेष से कम है। इसका कारण व्यापार घाटे (निर्यात की तुलना में आयात का बढ़ना) में वृद्धि  है। वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में व्यापार घाटा 10.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर था जो कि दूसरी तिमाही में 14.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया था। वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही में व्यापार घाटा (14.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर) वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही के व्यापार घाटे (39.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर ) से कम था।

पूंजी खाते में ऐसा लेन-देन शामिल होता है जो कि भारत में संस्थाओं की परिसंपत्ति/देयता की स्थिति में बदलाव करता है। वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही में पूंजी खाते में शुद्ध प्रवाह (पूंजी व्यय के मुकाबले आय) 15.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो कि वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही (13.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर) और वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही (1 बिलियन अमेरिकी डॉलर) की तुलना में अधिक था। यह मुख्य रूप से विदेशी निवेश के कारण हुआ।

वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही में विदेशी मुद्रा भंडार में 31.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि हुई, जो कि वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही में 5.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर और वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में 19.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि से अधिक है।

कुल मिलाकर वर्ष 2020-21 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में भारत ने 34.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर के चालू खाता अधिशेष (GDP का 3.1%) को दर्ज किया, जबकि वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में 22.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर (GDP के 1.6%) का घाटा हुआ था। इसका मुख्य कारण वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में 86.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर के घाटे की तुलना में वर्ष 2020-21 की इसी अवधि में 25.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का अल्प व्यापार घाटा था। वर्ष 2020-21 की पहली छमाही में विदेशी मुद्रा भंडार में 51.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि हुई जो कि वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में 19.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि से काफी अधिक है।

तालिका 1: वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही में भुगतान संतुलन (बिलियन अमेरिकी डॉलर)

 

तिमाही 2

तिमाही 1

तिमाही 2

2019-20

2020-21

2020-21

चालू खाता 

-7.6

19.2

15.5

पूंजी खाता 

13.6

1.0

15.4

भूल-चूक लेनी-देनी 

-0.9

-0.4

0.6

मुद्रा भंडार में परिवर्तन

5.1

19.8

31.6

 

रेपो रेट अपरिवर्तनीय

‘मौद्रिक नीति समिति’ (Monetary Policy Committee- MPC) ने रेपो रेट में कोई बदलाव न करते हुए अपने समायोजन नीति के रुख को जारी रखा है। 

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बुलियन एक्सचेंज विनियम 

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (International Financial Services Centre Authority- IFSCA) ने बुलियन एक्सचेंज विनियम (Bullion Exchange Regulations), 2020 को अधिसूचित किया। विनियम के अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (International Financial Services Centre- IFSC) में बुलियन एक्सचेंज की मान्यता और बुलियन क्लियरिंग कॉरपोरेशनों के लिये एक रूपरेखा प्रदान की गई है। वित्त मंत्री ने वर्ष 2020-21 के बजट भाषण में IFSC में बुलियन एक्सचेंज स्थापित करने हेतु योजना की घोषणा की थी। बुलियन को सोने, चाँदी और अन्य कीमती धातुओं को शामिल करने के लिये परिभाषित किया गया है। बुलियन एक्सचेंज बुलियन की खरीद और बिक्री, बुलियन पर डेरिवेटिव और बुलियन डिपॉज़िटरी रसीद के लिये अनुबंध कर सकते हैं। बुलियन डिपॉज़िटरी रसीद एक एम्पैनल्ड वॉल्ट में संग्रहीत बुलियन के लिये शीर्षक का दस्तावेज़ है। विनियमों की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं:

  • मान्यता: यदि आवेदक कुछ मानदंडों को पूरा करता है तो आवेदक को बुलियन एक्सचेंज या बुलियन क्लियरिंग कॉर्पोरेशन के रूप में मान्यता दी जा सकती है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
    (i) 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर का शुद्ध मूल्य।
    (ii) अपेक्षित वित्तीय और कार्यात्मक विशेषज्ञता।
    (iii) निर्देशक फिट और उचित मानदंडों को पूरा करते हों। 
  • बुलियन एक्सचेंज के कार्य: बुलियन एक्सचेंज उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिये बुलियन अनुबंध को विनियमित करने और बिचौलियों (जैसे व्यापारिक सदस्य) के आचरण के लिये ज़िम्मेदार है। इसके अतिरिक्त हर एक्सचेंज को क्लियरिंग कॉर्पोरेशन की सेवाओं का लाभ उठाना चाहिये।
  • स्वामित्व: भारतीय या विदेशी क्षेत्राधिकार में मौजूद कोई भी बुलियन एक्सचेंज या मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज IFSC में एक बुलियन एक्सचेंज या क्लियरिंग कॉर्पोरेशन की सेवाएँ प्रदान कर सकता है। पेड-अप शेयर पूंजी का 51% तक बुलियन या स्टॉक एक्सचेंज (चाहे भारतीय हो या विदेशी) द्वारा रखा जा सकता है। 
  • बाध्यताएँ: प्रत्येक बुलियन एक्सचेंज को चूक के मामले में उपभोक्ताओं को क्षतिपूर्ति करने के लिये एक उपभोक्ता शिक्षा और सुरक्षा कोष स्थापित करना चाहिये। प्रत्येक बुलियन क्लियरिंग कॉर्पोरेशन को बुलियन एक्सचेंज में किये गए व्यापार निपटान की गारंटी देने के लिये एक कोष स्थापित करना चाहिये। 
  • बुलियन डिपॉज़िटरी और वॉल्टस: बुलियन डिपॉज़िटरी, बुलियन डिपॉज़िटरी रसीदों के लेन-देन के रिकॉर्ड को बनाए रखती है, जो वॉल्ट्स में संग्रहीत बुलियन के शीर्षक का दस्तावेज़ होता है। विनियम इन संस्थाओं के कार्यों, कर्तव्यों और दायित्वों को स्पष्ट करते हैं।

लाभांश वितरण पर मसौदा परिपत्र 

भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (Non-Banking Financial Companies- NBFC) द्वारा लाभांश के वितरण पर एक मसौदा परिपत्र जारी किया गया है। परिपत्र की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पात्रता: वित्तीय मापदंडों जैसे- गैर-निष्पादित संपत्तियों (Non-Performing Assets- NPA) के लिये न्यूनतम सीमा का मान (Values) पूरा करने वाले NBFC लाभांश की घोषणा करने के योग्य हो सकते हैं। अलग-अलग किस्म के NBFC के लिये वित्तीय मानदंड विभिन्न प्रकार के हैं। उदाहरण के लिये डिपॉज़िट-टेकिंग NBFC और व्यवस्थित रूप से महत्त्वपूर्ण नॉन-डिपॉज़िट टेकिंग NBFC के लिये निम्नलिखित का होना आवश्यक है।
    (i) कम-से-कम 15% की पूंजी पर्याप्तता अनुपात।
    (ii) निरंतर तीन वर्षों के लिये 6% से कम का शुद्ध NPA जिसमें वह वर्ष भी शामिल होगा जिसके लिये लाभांश घोषित करने का प्रस्ताव है।
  • NBFC लाभांश घोषित करने के लिये पात्र हो सकते हैं, भले ही उपरोक्त मानदंड पूर्ववर्ती दो वर्षों के दौरान उपरोक्त मानदंड पूरे न हुए हों, बशर्ते: 
    (i) पूंजी पर्याप्तता का मानदंड पूरा किया गया हो 
    (ii) उस वर्ष के लिये शुद्ध NPA 4% से कम हो, जिसके लिये लाभांश घोषित किया जाना प्रस्तावित है। 
  • देय लाभांश की राशि: मसौदा परिपत्र अधिकतम लाभांश पे-आउट अनुपात का प्रावधान करता है जिसे पूंजी पर्याप्तता और शुद्ध NPA के विभिन्न संयोजनों के लिये अनुमति दी जाएगी। उच्च पूंजी पर्याप्तता अनुपात (Capital Adequacy Ratio-CAR) और निम्न शुद्ध NPA प्राप्त करने वाले NBFC को लाभांश (लाभांश पे-आउट अनुपात) के रूप में अपने शुद्ध लाभ का एक बड़ा अनुपात घोषित करने की अनुमति होगी। अनुमेय पे-आउट अनुपात 10% से 50% तक है। 
  • लाभांश पे-आउट अनुपात पर लगाए गए प्रतिबंध उन NBFC पर लागू नहीं होते जिनकी पहुँच सार्वजनिक फंड तक नहीं होती या जो ग्राहकों के साथ इंटरफेस करने का इरादा नहीं रखते हैं।
  • प्रयोज्यता: यदि अधिसूचित किया गया है, तो परिपत्र वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिये घोषित लाभांश हेतु लागू होगा।

स्वास्थ्य

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) द्वारा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 5 (National Family Health Survey- NFHS-5) 2019-20 के पहले चरण के आँकड़े जारी किये गए हैं।

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स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभाव 

इंडिया स्टेट लेवल डिज़ीज़ बर्डन इनिशिएटिव (India State-Level Disease Burden Initiative)  ने एक पेपर प्रकाशित किया है जिसमें वर्ष 2019 में हुए वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य संबंधी तथा आर्थिक प्रभावों पर चर्चा की गई है। इस इनिशिएटिव को वर्ष 2015 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले 100 से अधिक संस्थानों ने संयुक्त रूप से शुरू किय था (भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद सहित)। पेपर के मुख्य निष्कर्षों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • मौतें: भारत में वर्ष 2019 में 17 लाख मौतों के लिये वायु प्रदूषण को ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है। यह वर्ष 2019 में भारत में होने वाली कुल मौतों का 18% है। 
  • आर्थिक नुकसान: समय पूर्व हुई मौतों और बीमारियों के कारण कम उत्पादन से होने वाली आर्थिक हानि सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product- GDP) का 1.4% है, जो कि 2.6 लाख करोड़ रुपए के बराबर है। राज्य GDP के प्रतिशत के रूप में आर्थिक नुकसान उत्तरी राज्यों में अधिक हुआ। इनमें से सबसे अधिक उत्तर प्रदेश (GSDP का 2.2%) और बिहार (GSDP का 2%) में नुकसान हुआ था। 
  • मृत्यु दर में वृद्धि: वर्ष 1990 से वर्ष 2019 के बीच वायु प्रदूषण से होने वाली मृत्यु दर में 115% की वृद्धि हुई।

भारी उद्योग

ऑटोमोबाइल क्षेत्र में मंदी 

उद्योग संबंधी स्थायी समिति ने ‘ऑटोमोबाइल क्षेत्र में मंदी-प्रभाव और इसके पुनुरुद्धार के उपाय’ पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। समिति ने इस क्षेत्र में वर्ष 2019-20 में मंदी तथा कोविड-19 महामारी के प्रभाव की पड़ताल की और क्षेत्र की बहाली हेतु उपायों का सुझाव दिया।

समिति ने कहा कि वर्ष 2019-20 में इस क्षेत्र में मंदी आई है। बिक्री में गिरावट के कारण  उत्पादकों ने ऑटो घटकों और एंसिलरीज़ सहित सभी प्रकार के निर्माण को कम किया है। इससे ऑटो क्षेत्र में लगभग 3.45 लाख नौकरियों का नुकसान हुआ है। इसके अतिरिक्त कोविड-19 महामारी के कारण लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण उद्योग को पूरी तरह से बंद कर दिया गया, जिससे देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान प्रतिदिन लगभग 2,300 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

तालिका 2: ऑटोमोबाइल की घरेलू बिक्री

वर्ग 

अप्रैल-सितंबर 2019

2018 से परिवर्तन

यात्री वाहन 

13,33,251 

-23.6%

कमर्शियल वाहन 

3,75,480 

-23.0%

तिपहिया 

3,30,696 

-6.7%

दुपहिया 

96,96,733 

-16.2%

कुल 

1,17,36,976 

-17.1%

 

समिति ने क्षेत्र की बहाली के लिये निम्नलिखित सुझाव दिये:

  • GST दरों को युक्तिसंगत बनाना: आंतरिक दहन इंजन (Internal Combustion Engine- ICE) आधारित वाहनों (पेट्रोल और डीज़ल-इंजन आधारित सभी वाहन) की GST दर सर्वाधिक यानी 28% है और इन पर 1% से 22% अतिरिक्त मुआवज़ा उपकर लगता है। समिति ने सुझाव दिया कि GST की 18% दर से कीमतों में कमी होगी और इन वाहनों की मांग में वृद्धि होगी। बिक्री बढ़ने से GST राजस्व में कमी की भरपाई होगी। इसके अतिरिक्त समिति ने सुझाव दिया कि प्रयुक्त कारों (Used Cars) पर GST दर की मौजूदा 12% या 18% से घटाकर 4% किया जाना चाहिये। 
  • राहत पैकेज: समिति ने कहा कि सरकार के राहत पैकेज से ऑटोमोबाइल क्षेत्र की समस्याएँ पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई है, क्योंकि पैकेज का लक्ष्य सिर्फ अर्थव्यवस्था के आपूर्ति पक्ष को बढ़ावा देना था। उसने सुझाव दिया कि सरकार को ऑटोमोबाइल क्षेत्र में मांग बढ़ाने के लिये प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करनी चाहिये।
  • अन्य उपाय: समिति ने निम्नलिखित सुझाव दिये: (i) ऑटो क्षेत्र की कंपनियों ने लॉकडाउन के दौरान अस्थायी और अनुबंध पर कार्य करने वाले श्रमिकों को जो भुगतान किया है, उस व्यय को कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (Corporate Social Responsibility-CSR) व्यय का पात्र बनाया जाए, (ii) सरकारी एजेंसियों के परीक्षण और मंज़ूरी के स्थान पर उत्पादक को नियामक शर्तों के लिये स्व-प्रमाणन की अनुमति दी जानी चाहिये।

खेल

ओलंपिक गेम्स, 2021 

शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा एवं खेलों से संबंधित स्थायी समिति ने ओलंपिक गेम्स, 2021 की तैयारी पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। समिति के प्रमुख निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • कोच की कमी को पूरा करना: समिति ने कहा कि कोच के 561 पद रिक्त हैं। उसने सुझाव दिया कि समय रहते इन पदों को भरा जाए। 
  • प्रशिक्षण: हेड कोच को योग्य एथलीटों के लिये 200 दिनों का तद्नुकूल योजना बनाना चाहिये। योजना मनोवैज्ञानिक, मानसिक, शारीरिक एवं पोषण संबंधी मूल्यांकनों पर आधारित होनी चाहिये। 
  • खेल उपकरणों की खरीद: समिति ने मुख्य खरीद अधिकारी (Chief Procurement Officer) नियुक्त करने का सुझाव दिया जिससे खेल उपकरणों की खरीद में समन्वय हो और यह खरीद जल्द-से-जल्द हो सके। 
  • वित्तीय सहायता: समिति ने सुझाव दिया कि खिलाड़ियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिये निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं: 
    (i) राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने वाले प्रत्येक एथलीट के लिये न्यूनतम निश्चित वित्तीय सहायता की गारंटी देना।
    (ii) कॅरियर के दौरान उसके बाद भी योगदान के आधार पर खिलाड़ियों और कोचों के लिये वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने हेतु एक व्यवस्था तैयार करना। 
    (iii) सभी ओलंपियंस के लिये जीवन और स्वास्थ्य बीमा को कवर करना। इसके अतिरिक्त समिति ने सुझाव दिया कि सरकारी नौकरियों में मेडल जीतने वाले सभी एथलीटों के लिये 3% स्पोर्ट्स कोटा आरक्षण का प्रावधान किया जाए।
  • अनुदान: समिति ने सुझाव दिया कि भारतीय ओलंपिक गेम्स के कॉर्पोरेट प्रायोजन के लिये भारतीय ओलंपिक संघ को एक प्रायोजन प्रबंधन कंपनी के साथ साइन करना चाहिये। 
  • निवेश: समिति ने सुझाव दिया कि राज्य सरकारों को अपनी औद्योगिक नीतियों में खेल को 'उद्योग' के रूप में मान्यता देनी चाहिये ताकि इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ाया जा सके। उसने यह सुझाव भी दिया कि खेलों में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR)  योगदान को बढ़ाने के उपाय किये जाएँ जिसमें वर्तमान में सभी CSR फंड का लगभग 2% ही शामिल है।

शहरी मामले

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कानून अधिनियम 

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) दूसरा (संशोधन) अध्यादेश, 2020 को 30 दिसंबर, 2020 को जारी किया गया था। यह अध्यादेश राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) दूसरा अधिनियम, 2011 में संशोधन करता है।

2011 के अधिनियम में निम्नलिखित प्रावधान हैं: 

(i) दिल्ली आश्रय सुधार बोर्ड अधिनियम, 2010 और दिल्ली मास्टर प्लान, 2021 के प्रावधानों के अनुसार स्लम निवासियों और झुग्गी-झोंपड़ी समूहों को स्थानांतरित करना। 
(ii) अनधिकृत कालोनियों, ग्रामीण आबादी क्षेत्रों (और उनके विस्तार) को नियमित करना।
(iii) अनुमत भवन निर्माण की सीमाओं को तोड़कर बनाए गए फार्म हाउस और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के अन्य सभी क्षेत्रों के लिये नीति या योजना बनाना।
(iv) दिल्ली के मास्टर प्लान के अंतर्गत किसी निर्माण के मामले में तोड़फोड़ या सीलिंग की स्थिति में कोई दंडात्मक कार्रवाई न करना ताकि लोगों को कम-से-कम असुविधा हो। 

दिल्ली मास्टर प्लान, 2021 को केंद्र सरकार द्वारा 7 फरवरी, 2007 को अधिसूचित किया गया था। इसमें शहरी निर्धन वर्ग के लिये आवास की रणनीति दी गई है, साथ ही अनौपचारिक क्षेत्र से जुड़े मामलों का समाधान भी दिया गया है।

2011 का अधिनियम 31 दिसंबर, 2020 तक वैध था। अध्यादेश ने इस समयसीमा को 31 दिसंबर, 2023 तक बढ़ा दिया है।

वर्ष 2011 के अधिनियम में अनधिकृत कालोनियों के नियमितीकरण का प्रावधान है:

(i) जो 31 मार्च, 2002 को अस्तित्व में थी। 
(ii) जहाँ 1 जून, 2014 तक निर्माण हुआ था। 

अध्यादेश में संशोधन कर यह प्रावधान किया गया है कि अनधिकृत कालोनियों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों की संपत्ति के अधिकारों को मान्यता) अधिनियम, 2019 और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों की संपत्ति के अधिकारों को मान्यता) विनियम, 2019 के अनुसार चिह्नित किया जाएगा।

इस प्रकार अनधिकृत वे कॉलोनियाँ:

(i) जो 1 जून 2014 को अस्तित्व में थीं। 
(ii) 1 जनवरी, 2015 तक 50% विकसित हो गई थी, नियमितीकरण के लिये पात्र होंगे।


संचार

पीएम वाणी योजना

दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications- DoT) ने सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क के माध्यम से ब्रॉडबैंड के प्रसार के लिये प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस (Prime Minister Wi-Fi Access Network Interface- PM-WANI) नामक एक नई रूपरेखा जारी की है। 

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स्पेक्ट्रम की नीलामी 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 700 मेगाहर्ट्ज़, 800 मेगाहर्ट्ज़, 900 मेगाहर्ट्ज़, 1,800 मेगाहर्ट्ज़, 2,100 मेगाहर्ट्ज़, 2,300 मेगाहर्ट्ज़ और 2,500 मेगाहर्ट्ज़ आवृत्ति बैंड वाले स्पेक्ट्रम की नीलामी के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी। 

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दूरसंचार कनेक्टिविटी में सुधार 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दूरस्थ क्षेत्रों में दूरसंचार कनेक्टिविटी में सुधार के लिये दो परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है। इन परियोजनाओं का वित्तपोषण यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (Universal Service Obligation Fund- USOF) से किया जाएगा। USOF की स्थापना ग्रामीण और दूरदराज़ के क्षेत्रों में लोगों तक सूचना और संचार प्रौद्योगिकी सेवाओं की व्यापक, गैर-भेदभावपूर्ण और वहन योग्य सुविधा प्रदान करने के लिये की गई है। विभिन्न लाइसेंसों के अंतर्गत सभी दूरसंचार ऑपरेटरों द्वारा अर्जित राजस्व पर एक राशि ली जाती है और इसी से USOF के लिये संसाधन जुटाए जाते हैं, जिन दो परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई है वे इस प्रकार हैं:

  • कोच्चि और लक्षद्वीप द्वीप समूह के बीच सबमरीन ऑप्टिकल फाइबर केबल लिंक: इस परियोजना के तहत कोच्चि और लक्षद्वीप के 11 द्वीपों के बीच सबमरीन ऑप्टिकल फाइबर केबल के माध्यम से एक सीधा संचार लिंक बनाया जाएगा। वर्तमान में लक्षद्वीप द्वीप समूह को दूरसंचार कनेक्टिविटी प्रदान करने का एकमात्र माध्यम उपग्रह (Satellites) है और उपलब्ध बैंडविड्थ 1 गीगाबिट प्रति सेकंड (Gbps) तक सीमित है। परियोजना की अनुमानित लागत 1,072 करोड़ रुपए है। परियोजना को मई 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य है। 
  • अरुणाचल प्रदेश और असम के कुछ हिस्सों में मोबाइल कवरेज: यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश के 1,683 अनकवर्ड गाँवों और असम के करबी आंगलोंग और दीमा हसाओ (Karbi Anglong and Dima Hasao) ज़िलों के 691 गाँवों में मोबाइल कवरेज प्रदान करेगी। परियोजना की अनुमानित लागत 2,029 करोड़ रुपए है। इस परियोजना को दिसंबर 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

सूचना और प्रसारण

DTH सेवाएँ 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत में डायरेक्ट-टू-होम (Direct-to-Home- DTH) प्रसारण सेवाओं के लिये संशोधित दिशा-निर्देशों को मंज़ूरी दे दी है। 

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कृषि

एथेनॉल उत्पादन क्षमता में वृद्धि

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एथेनॉल उत्पादन क्षमता में वृद्धि के लिये चीनी मिलों और डिस्टिलरीज़ को ब्याज अनुदान प्रदान करने हेतु योजना के विस्तार को मंज़ूरी दी। ब्याज उपकार प्रतिवर्ष 6% की दर से या ब्याज दर के 50% (जो भी कम हो) प्रदान किया जाता है। इससे पहले केवल चीनी मिलें और शीरा (Molasses) आधारित स्टैंडअलोन डिस्टलरीज़ जो गन्ने के रस, चीनी सिरप, चीनी और B-हैवी शीरा से एथेनॉल का उत्पादन करती थीं, योजना के तहत पात्र थीं। संशोधित योजना का उद्देश्य अन्य फीड स्टॉक जैसे- चुकंदर और अनाज, चावल, गेहूँ, ज्वार, मक्का और जौ के साथ  पहली पीढ़ी के एथेनॉल के उत्पादन क्षमता बढ़ाना है।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक पेट्रोल के साथ ईंधन-ग्रेड एथेनॉल के 20% के सम्मिश्रण का लक्ष्य तय किया था, जिसे वर्ष 2025 तक पूरा करने की योजना है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा कि सम्मिश्रण लक्ष्य केवल गन्ने और चीनी से इथेनॉल उत्पादन से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। इसके लिये अन्य फीड स्टॉक से एथेनॉल के उत्पादन की भी आवश्यकता होती है, लेकिन उनकी वर्तमान उत्पादन क्षमता पर्याप्त नहीं है।

संशोधित योजना के अंतर्गत निम्नलिखित की स्थापना या विस्तार के लिये ऋण लेने पर ब्याज अनुदान मिलेगा: 

(i) अन्य फीड स्टॉक से पहली पीढ़ी एथेनॉल का उत्पादन करने वाले डिस्टलरीज़। 
(ii) ड्राई मिलिंग प्रक्रिया का उपयोग करने वाली अन्न आधारित डिस्टलरीज़। 
(iii) दोहरी फीड डिस्टिलरीज़ (शीरा और अन्न या दूसरे फीड स्टॉक का उपयोग करने वाली)। 

अगर कोई शीरा आधारित डिस्टिलरी या अन्न आधारित डिस्टिलरी को दोहरी फीड डिस्टिलरी में बदलने के लिये लिये लोन लेती है, तो उसे भी ब्याज अनुदान मिलेगा। संशोधित योजना के अंतर्गत डिस्टिलरीज भी होगीं जो पेट्रोल के साथ सम्मिश्रण के लिये तेल विपणन कंपनियों को अतिरिक्त क्षमता द्वारा उत्पादित एथेनॉल का न्यूनतम 75% आपूर्ति करती हैं।


शिक्षा

स्कूल बैग नीति, 2020 

शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित एक कार्यकारी समूह ने स्कूल बैग नीति, 2020 जारी किया है। इस कार्य समूह का गठन वर्ष 2018 में मद्रास उच्च न्यायालय के उस निर्णय के बाद किया गया था जिसमें न्यायालय ने केंद्र सरकार को स्कूल बैग पर नीति बनाने का निर्देश दिया था। इस नीति में स्कूल बैग के वज़न को कम करने के सुझावों का प्रावधान किया गया है।

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पर्यावरण 

पेरिस समझौते का कार्यान्वयन 

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change- MoEF) ने पेरिस समझौते के कार्यान्वयन के लिये एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया। पेरिस समझौता जलवायु परिवर्तन पर एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना है। समिति में 17 सदस्य हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: 

(i) अध्यक्ष के रूप में मंत्रालय का सचिव। 
(ii) उपाध्यक्ष के रूप में मंत्रालय का अतिरिक्त सचिव। 
(iii) मंत्रालय का अतिरिक्त महानिदेशक (वन)।  
(iv) वित्त, स्वास्थ्य और बिजली सहित 14 मंत्रालयों के संयुक्त सचिव सदस्य के रूप में।

समिति भारत में कार्बन बाज़ारों के लिये राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण होगी। उसके कार्यों में निम्नलिखित शामिल होंगे: 

(i) भारत के घरेलू जलवायु परिवर्तन को अंतर्राष्ट्रीय बाध्यताओं के अनुकूल करने के लिये नीतियाँ और कार्यक्रम बनाना।
(ii) राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) का जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के साथ समन्वय करना।
(iii) भारत के NDC लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये संबंधित मंत्रालयों की ज़िम्मेदारियों को स्पष्ट करना।

विश्व के विभिन्न देशों में जलवायु संबंधी पहल को NDC कहा जाता है। इसमें पेरिस समझौते के अंतर्गत लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने की कार्य योजनाएँ शामिल हैं।


ऊर्जा

विद्युत (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम, 2020 

उर्जा मंत्रालय ने विद्युत (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम, 2020 जारी किया है जो देश में उपभोक्ताओं को विद्युत की विश्वसनीय एवं निरंतर आपूर्ति तक पहुँच की सुविधा प्रदान करेगा। 

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नवीन एवं अक्षय  ऊर्जा

पीएम-कुसुम योजना के घटक-सी 

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने प्रधानमंत्री किसान उर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के घटक-सी के अंतर्गत फीडर स्तर के सौरीकरण के कार्यान्वयन के लिये दिशा-निर्देश जारी किये हैं।

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अंतरिक्ष

प्रौद्योगिकी हस्तांतरण नीति 

अंतरिक्ष विभाग ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण नीति और दिशा-निर्देश (Technology Transfer Policy and Guidelines), 2020 जारी किया है। दिशा-निर्देश भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation- ISRO) द्वारा भारतीय उद्योगों के लिये विकसित प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण के सिद्धांतों और प्रणालियों  का प्रावधान किया गया है।

इसरो उन प्रौद्योगिकियों को चिह्नित करने के लिये ज़िम्मेदार होगा जिनका हस्तांतरण किया जाना है। अंतरिक्ष विभाग इसका समर्थन निकाय (Approval Body) होगा। तकनीकों का हस्तांतरण न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (New Space India Limited- NSIL) के माध्यम से किया जाएगा जो कि हस्तांतरण के लिये लाइसेंस शुल्क और अन्य शुल्क को तय करेगा।

इसरो के प्रत्येक केंद्र को उन तकनीकों को चिह्नित करना चाहिये जिनका हस्तांतरण किया जा सकता है और वे निम्नलिखित कारकों पर आधारित होंगे:

(i) प्रौद्योगिकी की तैयारी। 
(ii) प्रौद्योगिकी का पुष्ट प्रयोग। 
(iii) प्राप्तकर्त्ता संगठन की सफलता की संभावना। 
(iv) सामाजिक-आर्थिक या वाणिज्यिक व्यवहार्यता। 

एक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सेल अंतिम समन्वय के लिये ज़िम्मेदार होगा ताकि प्रौद्योगिकियों का सफल वाणिज्यिकीकरण सुनिश्चित हो सके।

इसके अतिरिक्त दिशा-निर्देश कहते हैं कि प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण किसी भी व्यक्ति को नहीं किया जाना चाहिये।  सामाजिक अनुप्रयोग (Societal Application) हेतु प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण की मांग करने वाले गैर-लाभकारी या गैर-सरकारी संगठनों से हस्तांतरण की लागत नहीं वसूली जाएगी। आमतौर पर हस्तांतरण की लागत में निम्नलिखित शामिल होंगे: 

(i) प्रत्यक्ष सामग्री या घटकों की लागत। 
(ii) प्रत्यक्ष कर्मचारियों की लागत। 
(iii) यात्रा और रसद व्यय। 
(iv) बौद्धिक व्यय (नाममात्र, कुल अनुमानित लागत का अधिकतम 5%)।

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