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स्कूल बैग नीति, 2020

  • 05 Jan 2021
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

शिक्षा निदेशालय ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा जारी नई ‘स्कूल बैग नीति, 2020’ (School Bag Policy 2020) का पालन करने के लिये सभी स्कूलों को एक परिपत्र जारी किया है।

प्रमुख बिंदु

परिपत्र

  • परिपत्र के मुताबिक, शिक्षकों के लिये यह अनिवार्य है कि वे छात्रों को पहले से ही यह सूचित करें कि किसी विशिष्ट दिवस पर कौन-सी किताबें और नोटबुक स्कूल में लानी हैं, साथ ही शिक्षक समय-समय पर यह भी जाँच करेंगे कि छात्र अनावश्यक किताबें या नोटबुक तो नहीं ला रहे हैं।
  • विद्यालय प्रबंधन का यह कर्त्तव्य और दायित्त्व है कि वे सभी छात्रों को पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण पीने योग्य पानी उपलब्ध कराएँ, ताकि छात्रों को अपने घर से पानी की बोतल लाने की आवश्यकता न हो।

स्कूल बैग नीति, 2020

  • इस नीति में कक्षा- I से XII तक के छात्रों के होमवर्क और उनके बैग के वज़न से संबंधित दिशा-निर्देश शामिल किये गए हैं।
    • नीति के मुताबिक, कक्षा I से X तक के छात्रों का स्कूल बैग उनके शरीर के वज़न के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिये, साथ ही पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों के लिये स्कूल बैग होना ही नहीं चाहिये।
    • कक्षा II तक के छात्रों को कोई भी होमवर्क नहीं दिया जाना चाहिये, जबकि कक्षा III से V तक के छात्रों को प्रति सप्ताह अधिकतम दो घंटे, कक्षा VI से VIII तक के छात्रों को प्रति दिन अधिकतम एक घंटे और कक्षा IX तथा उससे अधिक के छात्रों को प्रतिदिन अधिकतम दो घंटे का ही होमवर्क दिया जाना चाहिये।
  • इस नीति में विद्यालयों के लिये अवसंरचनात्मक बदलाव की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया गया है, क्योंकि छात्र प्रतिदिन कई सारी पुस्तकें साथ ले जाने में सक्षम नहीं हैं।
    • स्कूलों को प्री-स्कूल से सीनियर सेकेंडरी तक के छात्रों को लॉकर उपलब्ध कराने चाहिये, ताकि वे कुछ किताबें विद्यालय में ही छोड़ सकें और आवश्यकतानुसार घर ले जा सकें।
  • इसमें कहा गया है कि शिक्षकों को प्रत्येक तीन महीने पर छात्रों के स्कूल बैग के वज़न की जाँच करने की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिये और माता-पिता को भारी बैग के बारे में जानकारी देनी चाहिये।
    • इसके अनुसार, भारी भरकम किताबों की तुलना में हल्की और कम वज़न वाली किताबों को प्राथमिकता दी जानी चाहिये।

भारी स्कूल बैग की समस्या:

  • भारी स्कूल बैग के कारण बच्चों शरीर पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जो उनके कशेरुक स्तंभ (Vertebral Column) और घुटनों (Knees) को नुकसान पहुँचा सकता है।
  • भारी स्कूल बैग के कारण गर्दन की मांसपेशियों में खिचाव आ सकता है जो सिरदर्द, कंधे के दर्द, पीठ के निचले हिस्से में दर्द और गर्दन तथा हाथ के दर्द का कारण बन सकता है।
  • शरीर मुद्रा (Body Posture) भी काफी हद तक प्रभावित हो सकती है तथा लंबे समय तक यह स्थिति रहने से शारीरिक असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है और तंत्रिका तंत्र भी प्रभावित हो सकता है।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT)

  • यह शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education- MoE) के तहत एक स्वायत्त संगठन है जो निम्नलिखित कार्यों को सुनिश्चित करने हेतु समर्पित संस्थान है:
    • स्कूली शिक्षा से संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा स्कूली शिक्षा में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करना।
    • मॉडल पाठ्यपुस्तक, पूरक सामग्री तैयार करना और उनका प्रकाशन करना।
  • नवीन शैक्षिक तकनीकों का विकास और उनका प्रसार करना।
  • सार्वभौमिक शिक्षा के लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करना।

स्रोत: द हिंदू

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