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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • स्मॉग क्या है ? राजधानी दिल्ली व आस-पास के क्षेत्र में इसके प्रभावी होने के क्या कारण हैं? स्मॉग को नियंत्रित करने तथा इसके होने की स्थिति में उठाए जा सकने वाले कदम कौन-से हैं?

    13 Nov, 2017 सामान्य अध्ययन पेपर 3 पर्यावरण

    उत्तर :

    यह स्मोक और फॉग से मिलकर बना है जिसका मतलब है स्मोकी फॉग अर्थात् धुआं-युक्त कोहरा। इस तरह के वायु प्रदूषण में हवा में नाइट्रोजन ऑक्साइड्स, सल्फर ऑक्साइड्स, ओजोन, स्मोक और पार्टिकुलेट्स घुले होते हैं। हमारे द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले वाहनों से निकलने वाला धुआं, फैक्ट्रियों और कोयले, पराली आदि के जलने से निकलने वाला धुआं इस तरह के वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण होता है। बैड ओज़ोन या धरातलीय ओज़ोन स्मॉग का मुख्य अवयव है।

    • एनसीआर-दिल्ली की सीमाएं पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से लगती हैं जहाँ बहुतायत मात्रा में कृषि की जाती है। यहां के लोग फसल कटने के बाद उसके अवशेषों को जला देते हैं जिससे स्मॉग की समस्या उत्पन्न होती है। 
    • राजधानी की सड़कों पर चलने वाले वाहन तो सदैव ही स्वच्छ पर्यावरण के विरोधी रहे हैं। 
    • इसके अलावा राजधानी व उसके आस-पास चल रही औद्योगिक गतिविधियों के कारण हो रहा वायु प्रदूषण भी स्मॉग का मुख्य जिम्मेदार कारक है। 
    • सर्दी के मौसम में वायु की गति कम होती है। ऐसे में डस्ट पार्टिकल्स और प्रदूषण वातावरण में स्थिर हो जाता है जिससे स्मॉग जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

    उपाय-

    • फसल अवशेषों को जलाने पर पूर्णतः पाबंदी लगनी चाहिये।
    • राजधानी में ठण्ड के मौसम के दौरान वाहनों के लिये ‘ऑड-इवन’ प्रणाली लागू की जानी चाहिये।
    • ठण्ड के मौसम में केवल अत्यंत आवश्यक निर्माण गतिविधियाँ (जैसे- सार्वजनिक महत्त्व की) ही जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिये एवं वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर होने पर निर्माण संबंधी सभी गतिविधियों पर पूर्णतः रोक लगा दी जानी चाहिये।  
    • सार्वजनिक परिवहन के साधनों जैसे मेट्रो ट्रेन, सिटी बस आदि के फेरों की संख्या बढ़ा दी जानी चाहिये। 
    • आवश्यकता पड़ने पर चीन की तरह ज़रूरी सेवाओं को छोड़कर शहर को पूर्णतः बंद (कंप्लीट लॉकडाउन) कर देना चाहिये, जिसमें सभी औद्योगिक इकाइयाँ, शिक्षण संस्थाएँ, सभी कार्यालय, बाज़ार व अन्य प्रतिष्ठान   शामिल हैं। 
    • कृषि अवशेषों का प्रयोग बायोमास ऊर्जा संयंत्रों में बिजली उत्पादन में किया जा सकता है। इससे अवशेषों का निपटान तो होगा ही, साथ ही किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।

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