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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • ‘आधार’ की संकल्पना राष्ट्रीय सुरक्षा को सकारात्मक रूप से सुदृढ़ करने वाले एक उपकरण के रूप में की गई थी, किंतु संपूर्ण आबादी के लिये डाटाबेस का निर्माण राष्ट्रीय सुरक्षा के जोखिमों को बढ़ा सकता है।चर्चा कीजिये।

    28 Nov, 2017 सामान्य अध्ययन पेपर 3 अर्थव्यवस्था

    उत्तर :

    आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया में लापरवाही और आधार के आँकड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित न होना इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये एक चुनौती बना देता है। कारगिल समिति ने अशांत सीमावर्ती इलाकों के निवासियों के लिये ‘बहुद्देश्यी राष्ट्रीय पहचान पत्र’ जारी करने की सिफारिश की थी, जो आगे चलकर संपूर्ण देश के नागरिकों के लिये आधार कार्ड योजना के रूप में लागू कर दी गई।

    बायोमीट्रिक आँकड़ों के चलते आधार आतंकवाद, तस्करी के लिये अवैध लेन-देन आदि की निगरानी में सहायता कर राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करता है। जहाँ तक सीमावर्ती इलाकों के निवासियों के ऐसे पहचान-पत्र की बात होती, तो इसके आँकड़ों को सुरक्षित तथा इसके दुरुपयोग की रोकथाम किया जाना आसान होता, परंतु देश की इतनी बड़ी आबादी के लिये आधार कार्ड के आँकड़ों की सुरक्षा निम्नलिखित रूप में चुनौती उत्पन्न करती है-

    • सरकार ने जिन निजी एजेंसियों को आधार कार्ड बनाने का ज़िम्मा दिया है, वे बिना किसी जाँच-पड़ताल के कार्ड बना रही हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये बड़ा खतरा साबित हो सकता है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर से एक आतंकी के पास से आधार कार्ड का मिलना और एक अफगानी युवक का आधार कार्ड बना दिया जाना इस बात के उदाहरण हैं।  
    • इतने बड़े पैमाने पर एकत्रित आँकड़ों की निगरानी करना तथा इनके दुरुपयोग को रोकना एक बड़ी चुनौती है। 
    • आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया के दौरान लापरवाही और जालसाज़ी के चलते भारत में रह रहे शरणार्थियों और अवैध प्रवासियों के भी आधार कार्ड बनाए जाने के तथ्य सामने आए हैं। यह न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा उत्पन्न करता है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक कल्याण योजनाओं के लाभों के वितरण को भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है।  
    • इस कार्ड का डुप्लीकेशन आसान है। 

    एक सकारात्मक उद्देश्य के लिये शुरू किया गया आधार, कुछ अवसंरचनात्मक और प्रक्रियागत खामियों के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये चिंता का विषय बन गया है। हालाँकि आधार आँकड़ों की सुरक्षा के लिये सरकार ने कुछ प्रयास किये हैं, जैसे- आधार डाटा के प्रकाशन पर तीन वर्ष के कारावास की सज़ा आदि। लेकिन ये प्रयास नाकाफी हैं। अतः सरकार को ठोस गोपनीयता कानून का निर्माण , साइबर सुरक्षा आदि के कारगर उपाय ढूँढने के प्रयास करने चाहिये। 

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