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प्रश्न :
प्रश्न: स्पष्ट कीजिये कि सेमीकंडक्टर तकनीक में प्रगति किस प्रकार AI, 6G संचार और क्वांटम कंप्यूटिंग के विकास का आधार है। (150 शब्द)
14 Jan, 2026 सामान्य अध्ययन पेपर 3 विज्ञान-प्रौद्योगिकीउत्तर :
हल करने का दृष्टिकोण:
- उत्तर की शुरुआत सेमीकंडक्टर तकनीक का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए कीजिये।
- मुख्य भाग में स्पष्ट कीजिये कि इसमें हुई प्रगति किस प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), 6G संचार और क्वांटम कंप्यूटिंग के विकास को आधार प्रदान करती है।
- तद्नुसार उचित निष्कर्ष दीजिये।
परिचय:
भारत के सेमीकंडक्टर मिशन द्वारा रेखांकित किये गए, सेमीकंडक्टर डिजिटल अर्थव्यवस्था का रणनीतिक आधार बनकर उभरे हैं, जो सूक्ष्मीकृत, उच्च-गति और ऊर्जा-दक्ष इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों की आधारशिला हैं तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भावी पीढ़ी के संचार एवं क्वांटम कंप्यूटिंग को गति प्रदान करते हैं।
मुख्य भाग:
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के विकास में सेमीकंडक्टर की भूमिका
- उन्नत चिप्स के माध्यम से उच्च-प्रदर्शन संगणना: AI कार्यभारों के लिये बड़े पैमाने पर समानांतर संगणना की आवश्यकता होती है, जिसे उन्नत सेमीकंडक्टर नोड्स, विशेषीकृत आर्किटेक्चर और उच्च ट्रांजिस्टर घनत्व सक्षम बनाते हैं। नोड आकार के घटने से गति बढ़ती है और ऊर्जा खपत कम होती है।
- उदाहरण के लिये: NVIDIA का H100 GPU (4 नैनोमीटर प्रक्रिया) बड़े भाषा मॉडल और AI प्रशिक्षण को संभव बनाता है, जो पेटाफ्लॉप-स्तरीय प्रदर्शन प्रदान करता है।
- एज AI के लिये ऊर्जा दक्षता: कम-ऊर्जा सेमीकंडक्टर डिज़ाइन में प्रगति एज पर AI इन्फरेंस को संभव बनाती है, जिससे क्लाउड डेटा सेंटर पर निर्भरता घटती है और रियल-टाइम निर्णय-निर्माण संभव होता है।
- उदाहरण के लिये: एप्पल का न्यूरल इंजन (SoC-आधारित AI एक्सेलेरेटर) वाणी पहचान और छवि प्रसंस्करण के लिये ऑन-डिवाइस AI को सक्षम बनाता है।
- मेमोरी और लॉजिक का एकीकरण: AI का प्रदर्शन तीव्र मेमोरी एक्सेस पर अत्यधिक निर्भर करता है। उन्नत मेमोरी–चिप एकीकरण संगणना और भंडारण के बीच विलंब (लेटेंसी) और ऊर्जा हानि को कम करता है।
- उदाहरण के लिये: AI एक्सेलेरेटर्स में प्रयुक्त हाई बैंडविड्थ मेमोरी (HBM3) डीप लर्निंग कार्यों के लिये डेटा थ्रूपुट को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाती है।
6G संचार के विकास में सेमीकंडक्टर की भूमिका
- अत्यधिक उच्च आवृत्ति और टेराहर्ट्ज़ उपकरण: 6G उप-टेराहर्ट्ज़ (sub-THz) और टेराहर्ट्ज़ (THz) बैंड में कार्य करेगा, जिसके लिये ऐसे कंपाउंड सेमीकंडक्टरों की आवश्यकता होगी जो अत्यधिक उच्च आवृत्तियों को कम सिग्नल हानि के साथ सॅंँभाल सकें।
- उदाहरण के लिये: 6G अनुसंधान में टेराहर्ट्ज़ ट्रांसीवरों के लिये वैश्विक स्तर पर गैलियम नाइट्राइड (GaN) और सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) चिप्स विकसित किये जा रहे हैं।
- सूक्ष्मीकरण और एंटीना एकीकरण: उन्नत सेमीकंडक्टर निर्माण तकनीकें एंटीना, RF सर्किट और प्रोसेसर को एक ही चिप पर एकीकृत करने में सक्षम बनाती हैं, जिससे छोटे, अधिक दक्ष उपकरण संभव होते हैं।
- अत्यल्प विलंबता और स्मार्ट नेटवर्क: नेटवर्क हार्डवेयर के भीतर सेमीकंडक्टर-सक्षम AI प्रोसेसिंग वास्तविक समय यातायात प्रबंधन, अत्यंत कम विलंबता और नेटवर्क के स्व-उपयुक्तिकरण को सक्षम बनाती है।
- उदाहरण के लिये: 5G-एडवांस्ड में परीक्षण किये जा रहे AI-सक्षम बेसबैंड चिप्स, जो 6G की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण चरण हैं।
क्वांटम कंप्यूटिंग के विकास में सेमीकंडक्टर की भूमिका
- क्वांटम बिट्स (क्यूबिट्स) का निर्माण: क्वांटम कंप्यूटिंग के लिये नैनोमीटर स्तर पर अत्यंत सटीक सेमीकंडक्टर निर्माण की आवश्यकता होती है, ताकि न्यूनतम डीकोहेरेंस के साथ स्थिर क्यूबिट्स तैयार किये जा सकें।
- उदाहरण के लिये: CMOS-संगत सेमीकंडक्टर प्रक्रियाओं का उपयोग करके बनाए गए सिलिकॉन स्पिन क्यूबिट्स, जिन पर वैश्विक और भारतीय अनुसंधान प्रयोगशालाएँ कार्य कर रही हैं।
- क्रायोजेनिक और नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक्स: क्वांटम प्रणालियों में क्यूबिट नियंत्रण और रीडआउट के लिये ऐसे सेमीकंडक्टर चिप्स की आवश्यकता होती है जो लगभग परम शून्य तापमान पर कार्य कर सकें।
- उदाहरण के लिये: सुपरकंडक्टिंग क्वांटम प्रोसेसरों में प्रयुक्त क्रायोजेनिक CMOS नियंत्रण चिप्स।
- क्लासिकल कंप्यूटिंग के साथ एकीकरण: क्वांटम कंप्यूटर नियंत्रण, त्रुटि-सुधार और हाइब्रिड कंप्यूटिंग वर्कफ्लो के लिये क्लासिकल सेमीकंडक्टर प्रोसेसरों पर निर्भर करते हैं।
- उदाहरण के लिये: सेमीकंडक्टर CPU और क्वांटम प्रोसेसिंग यूनिट (QPU) को संयोजित करने वाली क्वांटम–क्लासिकल हाइब्रिड आर्किटेक्चर।
निष्कर्ष:
सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी गति, दक्षता और सूक्ष्मीकरण में प्रगति के माध्यम से AI, 6G एवं क्वांटम कंप्यूटिंग की मूल आधारशिला है। भारत ने नीतिगत समर्थन, ATMP सुविधाओं और वैश्विक डिज़ाइन नेतृत्व के माध्यम से ठोस प्रगति की है। भावी पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों का पूर्ण लाभ उठाने के लिये भारत को उन्नत फैब्रिकेशन, गहन अनुसंधान और कुशल मानव संसाधन की दिशा में निर्णायक कदम उठाने होंगे, ताकि सेमीकंडक्टर वास्तव में तकनीकी संप्रभुता का एक सशक्त स्तंभ बन सकें।
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