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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    प्रश्न. क्वांटम प्रौद्योगिकियों से संगणन, संचार और साइबर सुरक्षा में क्रांतिकारी परिवर्तन की अपेक्षा की जा रही है। इस क्षेत्र में भारत की तैयारी का विश्लेषण कीजिये तथा उन चुनौतियों पर चर्चा कीजिये जिनका समाधान किया जाना आवश्यक है। (250 शब्द)

    24 Dec, 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 3 विज्ञान-प्रौद्योगिकी

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण: 

    • क्वांटम प्रौद्योगिकियों की क्षमता को रेखांकित करते हुए अपने उत्तर की शुरुआत कीजिये।
    • मुख्य भाग में, क्वांटम प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भारत की तैयारियों का उल्लेख कीजिये।
    • उन चुनौतियों का उल्लेख कीजिये जिनका समाधान किया जाना आवश्यक है।
    • आगे की राह बताते हुए उचित निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय: 

    क्वांटम प्रौद्योगिकियाँ क्वांटम गति में वृद्धि, क्वांटम-सुरक्षित लिंक और अति-सटीक संवेदन जैसी अभूतपूर्व उपलब्धियों को सक्षम बनाकर कंप्यूटिंग, संचार एवं साइबर सुरक्षा में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती हैं। भारत ने इसे एक रणनीतिक क्षेत्र के रूप में मान्यता दी है तथा मिशन-मोड क्षमता का निर्माण कर रहा है, लेकिन यह पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी प्रारंभिक चरण में है और हार्डवेयर, प्रतिभा एवं तैनाती के मामले में असमान है।

    मुख्य भाग: 

    क्वांटम प्रौद्योगिकी के लिये भारत की तैयारी: 

    • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के माध्यम से मिशन-मोड पुश: भारत ने क्वांटम इकोसिस्टम के अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने तथा उसे व्यापक स्तर पर विकसित करने के लिये कुल ₹6,003.65 करोड़ के परिव्यय के साथ राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (2023-24 से 2030-31) की शुरुआत की। 
    • अनुसंधान केंद्र और बहु-संस्थागत सहयोग: NQM के तहत, चार टी-हब 43 संस्थानों के 152 शोधकर्ताओं को एक साथ लाते हैं, जो प्रौद्योगिकी विकास और मानव संसाधन विकास जैसे विषयों पर एक समन्वित राष्ट्रीय अनुसंधान पाइपलाइन का संकेत देते हैं। 
    • क्वांटम संचार और रक्षा सुरक्षा में प्रारंभिक प्रगति: DRDO और IIT दिल्ली ने 1 किमी से अधिक क्षेत्र में उलझाव-आधारित मुक्त-स्थान क्वांटम सुरक्षित संचार का प्रदर्शन किया, जो क्वांटम साइबर सुरक्षा एवं भविष्य के क्वांटम नेटवर्क के लिये प्रासंगिक है।
    • अकादमिक जगत और उद्योग के बीच बढ़ते संबंध: भारतीय संस्थान वैश्विक मंचों से जुड़ रहे हैं तथा केंद्र स्थापित कर रहे हैं— उदाहरण के लिये, IIT मद्रास, IBM क्वांटम नेटवर्क से जुड़कर क्वांटम अनुसंधान क्षमता का विस्तार कर रहा है।
    • कौशल विकास और राज्य-स्तरीय पारितंत्र निर्माण: कौशल पहल और राज्य के नेतृत्व वाले केंद्र उभर रहे हैं। उदाहरण के लिये आंध्र प्रदेश द्वारा क्वांटम स्किलिंग को बढ़ावा देना तथा क्वांटम कंप्यूटिंग केंद्र अथवा पार्क की परिकल्पना के माध्यम से प्रतिभा समूह का निर्माण।

    समाधान की आवश्यकता वाले प्रमुख चुनौतीपूर्ण क्षेत्र:

    • हार्डवेयर की कमी और विदेशी आपूर्ति शृंखलाओं पर निर्भरता: फॉल्ट-टॉलरेंट क्वांटम कंप्यूटरों के निर्माण के लिये क्रायोजेनिक्स, नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक्स, निर्माण और उच्च-शुद्धता वाली सामग्रियों की आवश्यकता होती है। इन क्षेत्रों में भारत की घरेलू क्षमता अभी सीमित है, जिससे रणनीतिक निर्भरता का जोखिम उत्पन्न होता है।
    • स्टैक के विभिन्न स्तरों पर प्रतिभा की कमी: सैद्धांतिक और सॉफ्टवेयर क्षमताओं में भारत की स्थिति मज़बूत है, परंतु क्वांटम हार्डवेयर इंजीनियरिंग, क्रायोजेनिक्स, फोटॉनिक्स, एरर करेक्शन एवं सिस्टम इंटीग्रेशन में कमी बनी हुई है, जिससे प्रयोगशाला से बाज़ार तक उत्पादों के अंतरण में विलंब हो रहा है।
    • अनुसंधान से उत्पाद तक रूपांतरण में विखंडन: स्टार्ट-अप्स और प्रयोगशालाओं को दीर्घकालिक पेशेंट कैपिटल, टेस्टबेड्स (परीक्षण स्थल), खरीद-नीतियाँ और मानकों की आवश्यकता है, अन्यथा प्रोटोटाइप निम्न प्रौद्योगिकी तत्परता स्तरों पर ही अटके रह जाते हैं।
    • साइबर सुरक्षा संक्रमण और ‘हार्वेस्ट-नाउ-डिक्रिप्ट-लेटर’ का जोखिम: क्वांटम कंप्यूटर व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली पब्लिक-की क्रिप्टोग्राफी को भेद/तोड़ सकते हैं। इसलिये पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) की ओर संक्रमण तथा चयनित परिदृश्यों में QKD को अपनाने के लिये सरकार, BFSI और महत्त्वपूर्ण अवसंरचना में समन्वय के साथ करना आवश्यक है।
    • मानक, अंतर-संचालनीयता और वैश्विक प्रौद्योगिकी-नियामक बाधाएँ: वैश्विक निर्यात नियंत्रण, मानकों को लेकर होने वाली प्रतिस्पर्द्धा और बौद्धिक संपदा का केंद्रीकरण घटकों तक अभिगम्यता एवं सहयोग को सीमित कर सकता है; भारत को स्वयं को अलग-थलग किये बिना मानक क्षमता एवं विश्वसनीय आपूर्ति शृंखलाओं का निर्माण करने की आवश्यकता है।

    आगे की राह:

    • स्वदेशी हार्डवेयर और टेस्टबेड को तीव्र करना: सुपरकंडक्टिंग/ट्रैप्ड-आयन/फोटोनिक्स मार्गों के लिये मिशन-लिंक्ड राष्ट्रीय टेस्टबेड को वित्त पोषित किया जाना चाहिये, जिसमें रणनीतिक उपयोगकर्ताओं के लिये सुनिश्चित खरीद एवं स्टार्ट-अप के लिये साझा सुविधाएँ शामिल हों।
    • एक फुल-स्टैक टैलेंट पाइपलाइन का निर्माण: M.Tech/PhD फेलोशिप, संयुक्त उद्योग डॉक्टरेट और व्यावहारिक प्रयोगशाला कार्यक्रमों (हार्डवेयर + नियंत्रण + एल्गोरिदम) का विस्तार किया जाना चाहिये, जिसमें रक्षा, दूरसंचार एवं BFSI के लिये लक्षित प्रतिभा ट्रैक शामिल हों।
    • एक राष्ट्रीय क्वांटम-सुरक्षित रोडमैप का अंगीकरण: महत्त्वपूर्ण प्रणालियों के लिये समयबद्ध तरीके से PQC में माइग्रेशन, क्रिप्टो-एजिलिटी जनादेश और QKD के लिये क्षेत्रीय पायलट परियोजनाएँ संचालित की जानी चाहिये, जहाँ यह लागत प्रभावी एवं खतरे के निवारण के अनुरूप हो।
    • उद्योग की भागीदारी और व्यावसायीकरण को सुदृढ़ करना: चैलेंज ग्रांट्स, नियामक सैंडबॉक्स और PPP मॉडलों के माध्यम से लॉजिस्टिक्स अनुकूलन, औषधि खोज, पावर ग्रिड एवं सुरक्षित नेटवर्क में उपयोग के मामलों का विस्तार किया जाना चाहिये।
    • मानकों में नेतृत्व और विश्वसनीय अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में अग्रणी भूमिका: वैश्विक निकायों के अनुरूप एक मानक प्रकोष्ठ बनाया जाना चाहिये, अंतर-संचालनीय प्रोटोकॉल को बढ़ावा दिया जाना चाहिये तथा बौद्धिक संपदा की रक्षा करते हुए अत्याधुनिक घटकों एवं ज्ञान तक अभ्गिम्यता को सक्षम बनाने वाली साझेदारियों का अनुसरण किया जाना चाहिये।

    निष्कर्ष: 

    भारत ने क्वांटम गुणवत्ता प्रबंधन (NQM), राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत विस्तारित हब्स और क्वांटम-सुरक्षित संचार में स्पष्ट प्रगति के माध्यम से एक मज़बूत रणनीतिक शुरुआत की है, परंतु व्यापक स्तर पर परिनियोजन के लिये यह पारितंत्र अभी तैयार नहीं है। हार्डवेयर संबंधी कमियों को दूर करना, प्रतिभाओं का विकास करना और क्वांटम-सुरक्षित साइबर सुरक्षा परिवर्तन को क्रियान्वित करना ही यह निर्धारित करेगा कि भारत प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अग्रणी बनता है या केवल एक अनुवर्ती उपभोक्ता बना रहता है।

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