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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • पवन द्वारा निर्मित विभिन्न आकृतियों का वर्णन करें।

    03 Jan, 2018 सामान्य अध्ययन पेपर 1 भूगोल

    उत्तर :

    उत्तर.

    अपनी गतिज ऊर्जा के द्वारा पवन अपरदन तथा निषेचन की प्रक्रिया से कई भू-आकृतियों का निर्माण करती है। पवन द्वारा निर्मित  विभिन्न स्थलाकृतियों को निम्नलिखित रूप में देखा जा सकता है

    छत्रक

    मरुस्थलों में बहुस्तरीय चट्टानों के निचले हिस्से के अपरदन से छातानुमा आकृतियों का निर्माण होता है, जिसे छत्रक कहते हैं। इसमें निचले स्तर की चट्टानें अपेक्षाकृत कमजो़र होती हैं जिससे इनका अपरदन सरलता से हो जाता है।

    chhatrak

    अपवहन  गर्त

    पवनों  के  एक ही दिशा में स्थाई बहाव  से चट्टानों का अपक्षय होता है तथा उथले गर्तों  का निर्माण होता है, जिसे अपवहन गर्त कहते हैं।

    वात गर्त

     पवनों के प्रभाव से होने वाली अपवहन की प्रक्रिया के कारण भूमि पर छोटे-छोटे गड्ढों का निर्माण होता है जिसे वात गर्त कहते हैं।

    इंसेलबर्ग

    पवन तथा जल के प्रभाव से पर्वतों के लगातार अपरदन से पर्वत इंसेलबर्ग में बदल जाते हैं।

    मेसा और ब्युट

    मेसा का निर्माण मरुस्थलीय प्रदेश में चट्टानों  के अवशेष से होता है। ब्युट का निर्माण मेसा के अपरदन से होता है। 

    यारडंग

    यारडंग का निर्माण ऐसी संरचना में होता है, जहां कठोर तथा कमजोर चट्टानें क्रम से संयोजित होती हैं कमजोर चट्टानों के अपरदन से यारडंग का निर्माण होता है।

    yardung

    निक्षेपित स्थल

    रेत की आपूर्ति, पवन की गति तथा दिशा और धरातल पर वनस्पति की उपस्थिति के अनुसार पवन द्वारा निक्षेपित आकृतियों का निर्माण होता है। इसे निम्नलिखित रूपों में देखा जा सकता है।

    बालू टिब्बे

    मरुस्थलीय प्रदेशों में पवन द्वारा बालू के निक्षेपण से बालू टिब्बों का निर्माण होता है। इसका अग्र ढाल मंद और पश्च ढाल तीव्र होता है। 

    बरखान

    यह चंद्राकर बालू के टिब्बे हैं जिनकी भुजाएँ पवनों की दिशा में निकली होती हैं।

    barkhan

    सीफ

    सीफ का निर्माण पवनों की दिशा में बदलाव के कारण होता है। इसमें परवलय की दोनों भुजाएँ विकसित नहीं हो पाती हैं  और केवल एक ही भुजा का विकास होता है।

    अनुदैर्ध्य टिब्बे

    ये अपेक्षाकृत अधिक लंबाई तथा ऊँचाई की कटकनुमा आकृति हैं। इनका निर्माण तब होता है, जब रेत की आपूर्ति वाले स्थान पर पवन स्थायी रूप से बहती हैं।

    अनुप्रस्थ टिब्बे

    जब पवनों की दिशा निश्चित हो तथा रेत का स्रोत पवनों के लंबवत हो तो अनुप्रस्थ टिब्बों का निर्माण होता है।

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