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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    भारत की जैव विविधता के संरक्षण में पश्चिमी घाट के महत्त्व का मूल्यांकन कीजिये। (150 शब्द)

    01 Mar, 2023 सामान्य अध्ययन पेपर 3 पर्यावरण

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • पश्चिमी घाट के बारे में संक्षेप में बताते हुए अपना उत्तर प्रारंभ कीजिये।
    • भारत में जैव विविधता के संरक्षण में इसके महत्त्व की चर्चा कीजिये।
    • तदनुसार निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय:

    • पश्चिमी घाट जैव विविधता हॉटस्पॉट होने के साथ भारत में संरक्षण के लिये सबसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। यह क्षेत्र विभिन्न प्रकार के पौधों और जानवरों की प्रजातियों का आवास है, जिनमें से कई इस क्षेत्र के लिये स्थानिक हैं।
      • पश्चिमी घाट में भारत के लगभग 30% फूलों वाले पौधों की प्रजातियाँ, 50% उभयचर और 14% स्तनधारी पाए जाते हैं।
      • इसके अतिरिक्त यह क्षेत्र कई लुप्तप्राय प्रजातियों जैसे नीलगिरि ताहर, लायन-टेल्ड मकाक, मालाबार सिवेट और ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल का आवास स्थल है।

    मुख्य भाग:

    जैव विविधता के संरक्षण में पश्चिमी घाट का महत्त्व:

    • स्थानिक प्रजातियाँ: यह क्षेत्र बड़ी संख्या में स्थानिक प्रजातियों का आवास स्थल है। स्थानिक प्रजातियाँ ऐसी प्रजातियाँ होती हैं जो केवल एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में पाई जाती हैं और पश्चिमी घाटों में ऐसी प्रजातियों की संख्या अधिक है।
      • यह इस क्षेत्र को संरक्षण के लिये महत्त्वपूर्ण बनाता है क्योंकि आवास के नुकसान से इन प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा है।
    • वाटरशेड संरक्षण: पश्चिमी घाट गोदावरी, कृष्णा और कावेरी सहित कई नदियों का स्रोत है। ये नदियाँ कृषि, पीने के जल और अन्य मानवीय जरूरतों के लिये महत्त्वपूर्ण हैं।
      • इस क्षेत्र में कई बाँध और पनबिजली परियोजनाएँ भी हैं। इसलिये इन जल स्रोतों के संरक्षण और इस क्षेत्र में जल की कमी की रोकथाम के लिये पश्चिमी घाटों का संरक्षण आवश्यक है।
    • जलवायु नियमन: पश्चिमी घाट क्षेत्रीय जलवायु को विनियमित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
      • इस क्षेत्र में भारी मात्रा में वर्षा होती है और इस क्षेत्र के वनों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित एवं ऑक्सीजन उत्सर्जित करने के माध्यम से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भूमिका निभायी जाती है।
    • सांस्कृतिक महत्त्व: पश्चिमी घाट कई स्वदेशी समुदायों का आवास स्थल है जिनका जीवन और संस्कृति इस क्षेत्र की जैव विविधता से निकटता से संबंधित है।
      • इसलिये पश्चिमी घाटों का संरक्षण इन समुदायों की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिये आवश्यक है।

    पश्चिमी घाट में किये गए संरक्षण प्रयासों के उदाहरण:

    • इस क्षेत्र की जैव विविधता को संरक्षित करने के लिये पश्चिमी घाट में कई संरक्षण प्रयास किये जा रहे हैं जैसे:
      • वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान: पश्चिमी घाट में कई वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान स्थापित किये गए हैं जिनमें साइलेंट वैली नेशनल पार्क, पेरियार नेशनल पार्क और भद्रा वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं।
        • ये संरक्षित क्षेत्र यहाँ के वन्य जीवों के लिये सुरक्षित आश्रय प्रदान करते हैं।
      • स्थानिक प्रजातियों का संरक्षण: पश्चिमी घाटों में स्थानिक प्रजातियों का संरक्षण करना, संरक्षण का एक महत्त्वपूर्ण पहलू है।
        • भारतीय वन्यजीव संस्थान सहित कई संगठन इस क्षेत्र में शेर-पूँछ वाले मकाक, नीलगिरी ताहर और ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल जैसी प्रजातियों के संरक्षण पर काम कर रहे हैं।
      • समुदाय-आधारित संरक्षण: समुदाय-आधारित संरक्षण में क्षेत्र की जैव विविधता की रक्षा के लिये स्थानीय समुदायों के साथ कार्य करना शामिल है।
        • कीस्टोन फाउंडेशन जैसे कई संगठन पश्चिमी घाट में समुदाय आधारित संरक्षण प्रयासों पर कार्य कर रहे हैं।
          • इन प्रयासों में जैव विविधता के संबंध में स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने और इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना शामिल है।
      • पश्चिमी घाट के संरक्षण हेतु की गई सरकारी पहलें:
        • वर्ष 2012 में भारत के पर्यावरण और वन मंत्रालय ने पश्चिमी घाट को पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया था और इस क्षेत्र के संरक्षण और सतत विकास के लिये दिशानिर्देश विकसित करने हेतु पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल (WGEEP) को गठित किया था।
          • WGEEP रिपोर्ट ने पश्चिमी घाट की जैव विविधता की रक्षा के लिये नए संरक्षित क्षेत्रों के निर्माण, अवक्रमित आवासों की बहाली और स्थायी पर्यटन पहलों के विकास सहित कई उपायों का प्रस्ताव दिया था।
          • भारत सरकार ने इस क्षेत्र की जैव विविधता की रक्षा के लिये पश्चिमी घाट में राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभ्यारण्यों सहित कई संरक्षित क्षेत्रों की स्थापना की है।

    निष्कर्ष:

    • पश्चिमी घाट भारत की जैव विविधता के संरक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इस क्षेत्र का संरक्षण, इस क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक अखंडता को बनाए रखने के लिये आवश्यक है।
    • पश्चिमी घाट में कई संरक्षण प्रयास चल रहे हैं लेकिन जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई एवं खनन जैसी मानवीय गतिविधियों के आलोक में पश्चिमी घाट की जैव विविधता को संरक्षित करने के लिये निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है।
    • पश्चिमी घाट के प्रभावी संरक्षण और इसके प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के लिये सरकार, नागरिक समाज और स्थानीय समुदायों को शामिल करते हुए एक बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

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