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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    एक सिविल सेवक के रूप में आपको अपने ज़िले के ज़िला कलेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया है। एक दिन आपको एक स्थानीय एनजीओ से शिकायत मिलती है कि आपके ज़िले के एक दूरस्थ गाँव का एक सरकारी स्कूल छात्रों को उचित सुविधाएँ और बुनियादी ढाँचा प्रदान नहीं कर रहा है। इस एनजीओ ने आपको स्कूल की खराब स्थिति के सबूत के तौर पर तस्वीरें और वीडियो भी उपलब्ध कराए हैं।

    जाँच करने पर आपको पता चलता है कि एनजीओ द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं और आपके ज़िले के स्कूल वास्तव में दयनीय स्थिति में हैं। आपको यह भी पता चलता है कि उनके पास बुनियादी सुविधाओं जैसे स्वच्छ पेयजल, उचित वातावरण और स्वच्छता आदि का भी अभाव है।

    इस स्थिति में आप दुविधा में हैं - एक तरफ तो आप तत्काल कार्रवाई द्वारा छात्रों को बेहतर माहौल प्रदान करने के लिये अपने ज़िले के स्कूलों की स्थिति में सुधार करना चाहते हैं। दूसरी ओर आप जानते हैं कि स्कूल की सुविधाओं की सुधार प्रक्रिया में समय और धन की आवश्यकता होगी और आप यह भी सुनिश्चित नहीं हैं कि ज़िले के लिये आवंटित धन इन खर्चों को पूरा करने के लिये पर्याप्त होगा भी या नहीं।

    ज़िला कलेक्टर के रूप में आप इस स्थिति में क्या करेंगे?

    06 Jan, 2023 सामान्य अध्ययन पेपर 4 केस स्टडीज़

    उत्तर :

    दृष्टिकोण:

    • इस मामले को संक्षेप में बताते हुए अपना उत्तर शुरू कीजिये।
    • इस मामले में शामिल विभिन्न हितधारकों के बारे में बताइए।
    • इस मामले में शामिल विभिन्न नैतिक मुद्दों पर चर्चा कीजिये।
    • इस संदर्भ में ज़िला मजिस्ट्रेट द्वारा की जाने वाली आवश्यक कार्रवाई के बारे में चर्चा कीजिये।
    • तदनुसार निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय:

    • यह मामला एक एनजीओ द्वारा की गई जाँच से संबंधित है जिसमें ज़िले के विभिन्न सरकारी स्कूलों में बुनियादी जरूरतों की कमी को उजागर किया गया है और यह इस बात से भी संबंधित है कि एक ज़िला मजिस्ट्रेट के रूप में मैं इस मुद्दे को हल करने के लिये क्या कार्रवाई करूँगा।

    मुख्य भाग:

    • इसमें शामिल हितधारक:
      • ज़िला कलेक्टर के रूप में स्वयं मैं
      • स्थानीय एनजीओ, जो स्कूलों में खराब स्थिति का विवरण प्रदान करता है।
      • स्कूलों के लिये फंड से संबंधित सरकारी अधिकारी
      • जो छात्र इन स्कूलों में पढ़ रहे हैं।
      • इन छात्रों के परिवार।
      • समाज।
    • इसमें शामिल नैतिक मुद्दे:
      • लोगों के प्रति कर्त्तव्य: एक सिविल सेवक के रूप में मेरा कर्त्तव्य है कि मैं जनता की सेवा करने के साथ सुनिश्चित करूँ कि नागरिकों को बुनियादी सुविधाएँ और सेवाएँ प्रदान की जाएँ (खासकर उन बच्चों को जो शिक्षा के हकदार हैं)।
      • पारदर्शिता और जवाबदेहिता: मेरे लिये अपने कार्यों और निर्णयों में पारदर्शी और जवाबदेह होने के साथ यह सुनिश्चित करना महत्त्वपूर्ण है कि ज़िले के लिये आवंटित धन का कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए।
      • उत्तरदायित्व का विरोधाभास: इस मामले में मैं जनता के प्रति अपने कर्त्तव्य और वरिष्ठों के प्रति अपनी वफादारी के बीच द्वंद महसूस कर सकता हूँ, जो बजट की कमी के कारण स्कूल की सुविधाओं में सुधार को प्राथमिकता नहीं दे सकते हैं।
      • व्यावसायिक नैतिकता: एक सिविल सेवक के रूप में मेरा व्यावसायिक दायित्व है कि मैं समुदाय के सर्वोत्तम हित में कार्य करूँ और यह सुनिश्चित करूँ कि शासन प्रणाली पर जनता का विश्वास बना रहे। ज़िले में स्कूलों की खराब स्थिति को दूर करने में विफल रहना, इस दायित्व का उल्लंघन होगा।
      • बच्चों के प्रति उत्तरदायित्व: सरकार द्वारा संचालित स्कूल में बच्चे उचित शिक्षा और सुरक्षित सीखने का माहौल प्राप्त करने के हकदार हैं। स्कूल की खराब स्थिति उन्हें इस अधिकार से वंचित कर रही है। एक सिविल सेवक के रूप में बुनियादी ढाँचे के रखरखाव के साथ-साथ स्कूल परिसर में बुनियादी जरूरतों को सुनिश्चित करना मेरा उत्तरदायित्व है।
      • माता-पिता की जिम्मेदारी: एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में माता-पिता को उस स्कूल के कामकाज पर नजर रखनी चाहिये जहाँ उनके छात्र पढ़ रहे हैं और इसकी संबंधित अधिकारियों से शिकायत करना चाहिये।
      • समाज के मूल्य: एक जिम्मेदार समुदाय के रूप में समाज को मानवाधिकारों का उल्लंघन और देश के भविष्य के शोषण से संबंधित इस मुद्दे के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है। इसके अलावा समाज विभिन्न प्रकार के विरोध प्रदर्शन कर सरकार तक इस मुद्दे को पहुँचा सकता है।
    • कार्रवाई का क्रम:
      • समस्या का दस्तावेजीकरण करना: सबसे पहले मैं स्वयं इस मुद्दे का निरीक्षण कर, इस मामले की जाँच करूँगा और साथ ही एनजीओ द्वारा प्रदान किये गए साक्ष्य का दस्तावेजीकरण करूँगा क्योंकि यह मेरे कार्यों को सही ठहराने और धन को प्राप्त करने के लिये आवश्यक होगा।
      • तत्काल जरूरतों को प्राथमिकता देना: मैं यह सुनिश्चित करूँगा कि यहाँ शौचालय, स्वच्छता के साथ पीने के पानी जैसी बुनियादी जरूरतों को सबसे पहले पूरा किया जाए।
      • अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इस समस्या के बारे में बताना: मैं अपने वरिष्ठों को इस समस्या की रिपोर्ट कर स्कूल की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिये अतिरिक्त धनराशि प्राप्त करने का अनुरोध कर सकता हूँ। मैं उन्हें अपने अनुरोध के समर्थन में एनजीओ द्वारा एकत्र किये गए साक्ष्य भी प्रदान कर सकता हूँ।
      • बाहरी संसाधनों पर ध्यान देना: यदि ज़िले के लिये आवंटित धन अपर्याप्त है तो मैं ऐसे संगठनों या व्यक्तियों से धन की मांग करूँगा जो स्कूल की सुविधाओं में सुधार हेतु सहायता देने के लिये प्रेरित रहते हैं।
      • स्थानीय समुदाय के साथ समन्वय करना: मैं स्कूल की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिये वैकल्पिक समाधानों की पहचान करने के क्रम में स्थानीय समुदाय की सहायता लूँगा। उदाहरण के लिये स्वयंसेवकों को इसकी मरम्मत में मदद करने के लिये कहा जा सकता है या स्थानीय व्यवसायों से सामग्री की मांग की जा सकती है।
      • परिवर्तन हेतु अन्य प्रयास करना: यदि मैं स्थानीय स्तर पर इस समस्या का समाधान करने में असमर्थ रहूँगा तो मैं इस मुद्दे को उच्च अधिकारियों या मीडिया के ध्यान में लाकर राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाश में लाऊँगा।

    निष्कर्ष:

    इस मामले में मेरे लिये छात्रों की भलाई को प्राथमिकता देना और यह सुनिश्चित करना महत्त्वपूर्ण है कि उनके पास उचित सुविधाओं के साथ बुनियादी ढाँचे तक पहुँच हो। मेरे लिये अपने कार्यों में पारदर्शी और जवाबदेह होना और निर्णय लेने से पहले सभी संभावित विकल्पों पर विचार करना भी महत्त्वपूर्ण है। एक सिविल सेवक के रूप में मेरा यह कर्त्तव्य है कि मैं जनता की सेवा करने के साथ उनके सर्वोत्तम हित में कार्य करूँ, भले ही इसका अर्थ यथास्थिति को चुनौती देना या तत्काल जिम्मेदारियों से परे जाना हो।

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