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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • अफ्रीका में अपरिमित प्राकृतिक संसाधन है फिर भी औद्योगिक दृष्टि से यह बहुत पिछड़ा महाद्वीप है। समीक्षा कीजिये।

    14 Feb, 2018 सामान्य अध्ययन पेपर 1 भूगोल

    उत्तर :

    उत्तर की रूपरेखा:

    • अफ्रीका महाद्वीप के प्राकृतिक संसाधनों पर प्रकाश डालें।
    • यहाँ के औधोगिक पिछड़ेपन को कारणों सहित स्पष्ट करें।

    भौगोलिक विस्तार तथा जनसंख्या की दृष्टि से विश्व का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप अफ्रीका प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है। किंतु संसाधनों की प्रचुरता के बाद भी यह महाद्वीप औद्योगिक दृष्टि अपेक्षाकृत कमजोर है।

    संसाधनों की दृष्टि से देखा जाए तो अफ्रीका में हीरा,प्लेटिनम, कोबाल्ट तथा क्रोमियम जैसी बहुमूल्य धातुओं का वृहद भंडार पाया जाता है। उदाहरण के लिये, बोत्सवाना तथा कांगो गणराज्य हीरे के उत्पादन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका के किम्बरले तथा प्रिटोरिया विश्व के प्रमुख हीरा-उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हैं। वर्तमान समय में सर्वाधिक बहुमूल्य धातु में से एक माने जाने वाले सोना का सर्वाधिक उत्पादन दक्षिण अफ्रीका में होता है। यहाँ का जोहान्सबर्ग स्वर्ग खनन हेतु विश्व प्रसिद्ध है। इसके अलावा, यूरेनियम, तांबा, मैंगनीज तथा एस्बेस्टस जैसे खनिज भी अफ्रीका में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। अफ्रीका में सर्वाधिक बॉक्साइट उत्खनन गिनी मे, तांबे का भंडार जायरे की कटंगा प्रदेश में तथा ग्रेफाइट का निक्षेप मेडागास्कर देश में पाया जाता है।

    धातु के अलावा यहाँ जीवाश्म आधारित खनिज भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। अफ्रीका के नाइजीरिया, ट्यूनीशिया तथा अल्जेरिया जैसे प्रदेश पेट्रोलियम की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।

    इसके अलावा कृषि आधारित संसाधन भी अफ्रीका में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। केन्या चाय उत्पादन के लिये प्रसिद्ध है, वहीं दक्षिण अफ्रीका का डरबन रसदार फलों के उत्पादन के लिये प्रसिद्ध है। घाना के आसपास का क्षेत्र कोको उत्पादन और निर्यात के लिये विश्व प्रसिद्ध है वहीं अफ्रीका के मरुस्थल पशुपालन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।

    किंतु प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के बाद भी औद्योगिक दृष्टि से यह महाद्वीप अत्यंत पिछड़ा है। अफ्रीका के कमजोर औद्योगिक विकास की पृष्ठभूमि को इसके उपनिवेशीकरण से जोड़कर देखा जा सकता है। लंबे समय तक पश्चिमी देशों के उपनिवेश बने रहने के कारण यहाँ उद्योगों का पर्याप्त विकास नहीं हो पाया। वस्तुतः पश्चिमी देश अपने उद्योगों के विकास के लिये अफ्रीका का प्रयोग कच्चा माल के स्रोत तथा तैयार उत्पादों को के गंतव्य के रूप में करते रहे हैं। जिससे अफ्रीका का औद्योगिक विकास बाधित हुआ। इसके अलावा, उपनिवेशीकरण से न केवल अफ्रीका में गरीबी का विस्तार हुआ बल्कि वहां के मानव संसाधनों का भी अपेक्षित विकास नहीं हो पाया। गरीबी के कारण उद्योगों के विस्तार के लिये यहाँ अपेक्षित निवेश की कमी को देखा जा सकता है। वहीं मानव संसाधनों के अपर्याप्त विकास के कारण प्रौद्योगिकी या नवाचार की कमी को भी देखा जा सकता है। कमजोर प्रौद्योगिकी के कारण कच्चे माल का दोहन यहाँ एक दुरूह कार्य बन गया है। अवसंरचना तथा बाजा़र की कमी और आतंकवादी गतिविधियों के विस्तार ने भी उद्योगों के विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया।

    अफ्रीका के संसाधनों के उचित प्रयोग को सुनिश्चित कर यहाँ उद्योगों का पर्याप्त विकास किया जा सकता है।

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