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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    प्र. संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के अनुसार भारत वर्ष 2023 तक विश्व का सबसे अधिक आबादी वाला देश बनने वाला है। बढ़ती जनसंख्या की चुनौतियों और अवसरों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिये। (250 शब्द)

    21 Nov, 2022 सामान्य अध्ययन पेपर 1 इतिहास

    उत्तर :

    दृष्टिकोण:

    • संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की नवीनतम रिपोर्ट के तथ्यों पर संक्षेप में चर्चा करते हुए अपना उत्तर प्रारंभ कीजिये।
    • बढ़ती हुई जनसंख्या की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा कीजिये।
    • बढ़ती हुई जनसंख्या की समस्या के समाधान हेतु कुछ उपाय बताते हुए निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय:

    • संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNPFA) के अनुसार, विश्व भर में मानव आबादी 8 बिलियन तक पहुँच गई है।
    • विश्व जनसंख्या संभावना, 2022 में चीन की 1.426 बिलियन जनसंख्या की तुलना में वर्ष 2022 में भारत की जनसंख्या 1.412 बिलियन होने का अनुमान लगाया है।
      • वर्ष 2048 तक भारत की जनसंख्या चरम स्थिति के साथ 1.7 बिलियन तक पहुँचने की संभावना है और फिर इस सदी के अंत तक गिरावट के साथ इसके 1.1 बिलियन तक पहुँचने की संभावना है।

    मुख्य भाग:

    • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार भारत की प्रजनन दर 2.1 तक पहुँच गई है (अर्थात् प्रतिस्थापन स्तर तक) और इसमें और भी गिरावट जारी है।
    • वर्ष 2022 के आँकड़ों के अनुसार दुनिया की आधी से अधिक आबादी एशिया में रहती है। चीन और भारत (प्रत्येक की 1.4 बिलियन से अधिक आबादी) दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं।
    • भारत की जनसंख्या वृद्धि स्थिर होने के बावजूद अभी भी यह 0.7% प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रही है और वर्ष 2023 में इसकी जनसंख्या विश्व के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश, चीन से अधिक होने की संभावना है।
    • चुनौतियाँ:
      • स्थिर जनसंख्या: नमूना पंजीकरण प्रणाली डेटा के अनुसार बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में स्थिर जनसंख्या वृद्धि के लक्ष्य को प्राप्त करना बड़ी चुनौती बनी हुई है।
      • जीवन की गुणवत्ता: नागरिकों को न्यूनतम जीवन गुणवत्ता प्रदान करने के लिये शिक्षा और स्वास्थ प्रणाली के विकास पर निवेश करना होगा, अनाजों और खाद्यान्नों का अधिक-से-अधिक उत्पादन करना होगा, लोगों को रहने के लिये घर देना होगा, स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति बढ़ानी होगी एवं सड़क, परिवहन और विद्युत उत्पादन तथा वितरण जैसे बुनियादी ढाँचे को मज़बूत बनाने पर काम करना होगा।
      • जनसांख्यिकीय विभाजन: भारत की निम्न साक्षरता दर और मानव पूंजी का अभाव, जनसांख्यिकीय लाभांश को बोझ में परिणत कर देगा।
      • बुजुर्गों की संख्या में वृद्धि: संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (United Nations Population Fund) द्वारा जारी इंडिया एजिंग रिपोर्ट (India Ageing Report) 2017 के अनुसार, एक ओर जहाँ वर्ष 2015 में भारत की कुल आबादी का 8 प्रतिशत हिस्सा 60 वर्ष की उम्र से अधिक का था वहीं वर्ष 2050 में यह संख्या 19 प्रतिशत से अधिक होने की संभावना है। भारत को स्वास्थ्य पर अधिक खर्च करने की आवश्यकता होगी
      • असमान आय वितरण: आय का असमान वितरण और लोगों के बीच बढ़ती असमानता, अत्यधिक जनसंख्या के नकारात्मक परिणामों के रूप में सामने आएगी।
    • अवसर:
      • विशाल मानव संसाधन पूल: भारत एक युवा राष्ट्र है जहाँ विश्व स्तर पर युवाओं का सबसे बड़ा समूह है यहाँ पर जनसांख्यिकीय लाभांश को प्राप्त करने की काफी संभावना है। विश्व स्तर पर बुजुर्गों की संख्या में होने वाली वृद्धि के आलोक में, भारत की युवा आबादी वैश्विक समस्याओं को हल करने के लिये एक वैश्विक संसाधन हो सकती है।
      • पिछले एक दशक में भारत, विश्व स्तर पर प्रमुख सेवा प्रदाता के रूप में उभरा है, जहाँ वैश्विक कंपनियाँ देश में कम वेतन पर शिक्षित और अंग्रेजी बोलने वाले कर्मचारियों का लाभ उठाने के लिये आउटसोर्सिंग करती हैं।
      • भारत में हर साल 2.5 मिलियन युवा आईटी, इंजीनियरिंग और जीव विज्ञान में स्नातक होते हैं। इसके अलावा विज्ञान और आईटी से संबंधित विषयों में लगभग 650,000 पोस्ट ग्रेजुएट करते हैं। आईटी क्षेत्र में अकेले लगभग 850,000 स्नातकों और पेशेवरों को रोजगार प्राप्त है। इसके साथ ही फार्मास्युटिकल और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र भी काफी लोगों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं।

    निष्कर्ष:

    • युवा और किशोर जनसंख्या के लिये कौशल प्रदान करने की आवश्यकता है जो इन्हें अधिक उत्पादक बनाने के साथ इनकी बेहतर आय सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका है।
    • महिलाओं की स्थिति को उन्नत करना : हमारे समाज के कई वर्गों में अभी भी महिलाओं को दोयम दर्जे का माना जाता है। शिक्षा के कम अवसर होने के कारण इन्हें घर का काम करते हुए अपना जीवन व्यतीत करना पड़ता है। महिलाओं को घर के कामों तक सीमित रखने के बजाय अन्य क्षेत्रों में इनकी भागीदारी को बढ़ावा देकर महिलाओं की स्थिति को उन्नत करने के साथ इनके लिये आय का अतिरिक्त स्रोत मिल सकता है।
    • गर्भ निरोधकों के उपयोग हेतु जागरूकता बढ़ाना: गर्भ निरोधकों के बारे में बात करना अभी भी हमारे समाज के विभिन्न वर्गों में सही नहीं माना जाता है। गर्भ निरोधकों के बारे में जागरूकता का प्रसार करने वाले शिविर लगाए जाने चाहिये।
    • परिवार नियोजन: जनसंख्या को नियंत्रित करने की दिशा में, परिवार नियोजन महत्त्वपूर्ण कदमों में से एक है। बेहतर परिवार नियोजन से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आ सकती है।
    • विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के संभावित लाभों को अधिकतम करने के लिये देश को स्वास्थ्य देखभाल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करने के साथ उत्पादक रोजगार और अवसरों पर बल देकर मानव पूंजी के विकास में निवेश करने की आवश्यकता है।

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