दृष्टि ज्यूडिशियरी का पहला फाउंडेशन बैच 11 मार्च से शुरू अभी रजिस्टर करें
ध्यान दें:

मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    भारतीय एकता को मज़बूत करने में भाषाई विविधता ने कहाँ तक मदद की है? (150 शब्द)

    18 Apr, 2022 सामान्य अध्ययन पेपर 1 भूगोल

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • भारत की भाषायी विविधता पर संक्षेप में प्रकाश डालिये।
    • भाषायी विविधता भारतीय एकता को किस प्रकार बढ़ावा दे रही है, परीक्षण कीजिये।
    • साथ ही, भाषायी विविधता से संबंधित मुद्दों पर चर्चा कीजिये।
    • आगे की राह के साथ निष्कर्ष लिखिये।

    भारत विविध भाषाओं का देश है, जिसमें सबसे प्रमुख 75% भारतीयों द्वारा बोली जाने वाली इंडो-आर्यन भाषाएँ और 20% भारतीयों द्वारा बोली जाने वाली द्रविड़ भाषाएँ हैं। इसकी 22 अनुसूचित भाषाएँ और कई बोलियाँ हैं, जो परस्पर सह-अस्तित्व में हैं।

    भाषायी विविधता और राष्ट्रीय एकता

    • भाषायी राज्यों जैसे कि आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब आदि के गठन ने भारत की संघीय विशेषता को सुदृढ़ किया है तथा इस प्रकार क्षेत्रों की अलगाववादी प्रवृत्ति को रोका है जिससे राष्ट्रीय एकता बनी रहे।
    • भाषायी विविधता दर्शाती है कि अल्पसंख्यक और आदिवासी भाषाओं सहित क्षेत्रीय भावनाओं का सम्मान है। इसके अलावा, अनुच्छेद 29,30,347,350 के अंतर्गत संवैधानिक प्रावधान प्रत्येक भाषा की सुरक्षा, सद्भाव को बढ़ावा देने और सभी लोगों के बीच सामान्य भाईचारे की भावना को बढ़ावा देते हैं।
    • यदि भाषाओं में विविधता है, तो भी वे मुख्य रूप से इंडो-आर्यन और द्रविड़ भाषाओं से निकले हैं। इन भाषाओं की समान उत्पत्ति की इस भावना ने भी एकता को बढ़ावा दिया है।
    • समकालीन समय में, ‘हिंग्लिश’, जो कि हिंदी और अन्य भाषाओं के साथ अंग्रेज़ी भाषा का सम्मिश्रण है, देश में बोली जाती है, भारत में विभिन्न भाषाओं के मध्य एक कड़ी का कार्य करती है और इस प्रकार यह ‘अखिल भारतीय की सामान्य शब्दावली’ बन गई है।

    निहित मुद्दे:

    • बढ़ता क्षेत्रवाद और प्रांतीयता (स्थानीय भावना): विभिन्न भाषायी समूहों के लोग जो एक राज्य में निवास करते हैं, वे केवल अपने राज्यों के हितों के संदर्भ में सोचते हैं। यह राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार को प्रभावित करता है और स्थानीय भावनाओं का कारण बनता है।
    • अलग राज्यों की मांग: भाषायी आधार पर अलग राज्य की मांग संबंधित राज्य के साथ-साथ केंद्र के लिये भी विभिन्न समस्याओं को जन्म देती हैं।
    • भाषायी अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न: यह अलगाववाद को जन्म दे सकता है और राष्ट्रीय एकता को प्रभावित कर सकता है।
    • राष्ट्रीय भावना का क्षरण: भाषायी और क्षेत्रीय निष्ठा के फलस्वरूप राष्ट्रीय भावना का क्षरण होता है। राष्ट्रीय भावना के क्षरण के परिणामस्वरूप देश की संप्रभुता को संकट है।

    आगे की राह

    • एक नए राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया जा सकता है जो विशेष राज्यों के विभाजन या नए राज्यों के गठन के पक्ष तथा विरोध में लोगों के सुझावों और दलीलों को आमंत्रित करेगा।
    • भाषायी अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न को रोकने के लिये आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करना।
    • भारत में आवास तथा सहिष्णुता की उल्लेखनीय गुणवत्ता के कारण भाषायी विविधता राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में सहायता प्रदान करती है। सामान्य भाषा को बलपूर्वक लागू करने का कोई भी प्रयास राष्ट्रीय एकता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

    To get PDF version, Please click on "Print PDF" button.

    Print
close
एसएमएस अलर्ट
Share Page
images-2
images-2