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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    सूफीवाद से आप क्या समझते हैं? वर्तमान समय में सूफीवाद कैसे प्रासंगिक है? स्पष्ट कीजिये।

    18 Oct, 2021 सामान्य अध्ययन पेपर 1 इतिहास

    उत्तर :

    सूफीवाद इस्लाम के भीतर एक उदारवादी सुधार आंदोलन था, जिसकी उत्पत्ति फारस में हुई थी। सूफीवाद भारत में 10-11वीं शताब्दी में आया और 12वीं शताब्दी में लोकप्रिय हुआ। 12वीं शताब्दी तक सूफियों को 12 सिलसिलों में संगठित किया गया था। सिलसिला आमतौर पर एक प्रमुख फकीर के नेतृत्त्व में होता था जो अपने शिष्यों के साथ खानकाह या धर्मशाला में रहता था।

    • चार सबसे लोकप्रिय सिलसिले थे:
      • चिश्ती,
      • सुहरावर्दी,
      • कादरी-रियास और
      • नक्शबंदी।

    सूफीवाद की मुख्य विशेषताएँ:

    • मौलिक सिद्धांत: ईश्वर एवं मनुष्य के बीच प्रेम का संबंध सूफीवाद का आधार है।
    • केंद्रीय विचार: आत्मा का विचार, दैवीय निकटता, दिव्य प्रेम और आत्म-विनाश सूफीवाद के सिद्धांत के केंद्र में हैं।
    • मानव प्रेम: सूफीवाद के अनुसार, ईश्वर से प्रेम का अर्थ मानवता से प्रेम है और इस प्रकार उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ईश्वर की सेवा मानवता की सेवा के अलावा और कुछ नहीं है।
    • समानता में विश्वास: सूफीवाद सभी धार्मिक और सांप्रदायिक भेदों से परे है तथा सभी मनुष्यों को समान मानता है।
    • आत्म अनुशासन: सूफीवाद आत्म अनुशासन पर भी ज़ोर देता है और इसे ईश्वर का ज्ञान प्राप्त करने के लिये आवश्यक मानता है।
    • आंतरिक पवित्रता: यह रूढ़िवादी मुस्लिम संप्रदायों (जो कि बाहरी आचरण पर ज़ोर देते हैं) के विपरीत सूफीवाद आंतरिक शुद्धता पर ज़ोर देता है।

    वर्तमान समय में सूफीवाद की प्रासंगिकता:

    • समाज में बढ़ती असहिष्णुता और हिंसा के साथ सूफीवाद वर्तमान समय में और भी महत्त्वपूर्ण हो गया है।
    • अहिंसा: सूफीवाद ईश्वर के प्रति प्रेम और भक्ति में विश्वास करता है। इसके आदेश में हिंसा के लिये कोई स्थान नहीं है। यह तालिबान द्वारा अनुसरण किये जाने वाले इस्लाम के हिंसक और कट्टरपंथी रूप के विपरीत है।
    • प्राणियों में समानता: यह किसी भी सामाजिक वर्गीकरण जैसे- धर्म, जाति, वर्ग या लिंग में विश्वास नहीं करता है। लोगों में बढ़ते मतभेदों के बीच सूफीवाद सभी मनुष्यों की आवश्यक समानता का संदेश देता है।
    • सामजिक कल्याण: यह सामाजिक कल्याण पर ज़ोर देता है जिसके परिणामस्वरूप धर्मार्थ प्रकृति के कार्यों के साथ-साथ अनाथालय और महिला सेवा केंद्रों की स्थापना करना है। निजामुद्दीन औलिया धर्म या जाति से परे ज़रूरतमंदों के बीच उपहार बाँटने के लिये प्रसिद्ध थे। सामाजिक कल्याण के कार्यों का महत्त्व कोविड-19 महामारी के दौरान महसूस किया गया।
    • नैतिकता: ऐसे समय में जब सत्ता के लिये संघर्ष प्रचलित पागलपन है, सूफीवाद लोगों को उनके नैतिक दायित्वों की याद दिलाता है। कलह और संघर्षपूर्ण इस दुनिया में यह शांति एवं सद्भाव का संदेश देता है।
    • ध्यान: सूफीवाद द्वारा ध्यान पर अत्यधिक बल दिया गया। ध्यान हमारे शरीर और दिमाग में बढ़ते तनाव को शांति और संतुलन प्रदान करता है जो भावनात्मक बल प्रदान कर व्यक्ति की भलाई और समग्र स्वास्थ्य दोनों का लाभ पहुँचा सकता है।

    निष्कर्ष

    सूफीवाद ने दुनिया में धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन पर एक व्यापक प्रभाव छोड़ा है। मानवता की सेवा और ईश्वर के प्रति प्रेम की इसकी शिक्षा आज भी लोगों के मन में गूँजती है। सूफी धार्मिक और सांप्रदायिक संघर्षों से दूर रहने के लिये दृढ़ थे और नागरिक समाज के शांतिपूर्ण तत्त्व बनने का प्रयास करते थे।

    इस कठिन और अनिश्चित समय में सूफीवाद की शिक्षाएँ दुनिया भर में मानवता के लिये मार्गदर्शक हो सकती हैं।

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