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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    बौद्ध धर्म और जैन धर्म के मूल सिद्धांतों के बीच समानताओं तथा असमानताओं पर चर्चा कीजिये।

    18 Mar, 2021 सामान्य अध्ययन पेपर 1 भारतीय समाज

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण

    • दोनों धर्मों की उत्पत्ति का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रारंभ करें।
    • बौद्ध धर्म और जैन धर्म के बीच समानता और असमानता पर चर्चा करें।
    • संक्षिप्त निष्कर्ष दें।

    उत्तर: महावीर और बुद्ध ने क्रमशः जैन और बौद्ध धर्म की स्थापना की। बौद्ध धर्म की तरह जैन धर्म का उदय भी वैदिक धर्म में व्याप्त कर्मकांड की प्रतिक्रिया स्वरूप हुआ। यद्यपि दोनों धर्म समकालीन थे एवं आमतौर पर उनमें कई समानताएँ भी थीं किंतु उनकी कुछ अलग-अलग विशेषताएँ भी थीं।

    समानताएँ

    • दोनों धर्म उपनिषदों और अन्य हिंदू धार्मिक संप्रदायों के दर्शन से प्रेरित थे। उदाहरणतः जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष है।
    • दोनों धर्मों ने सामाजिक रूप से वंचित और हाशिये पर रहने वाले वर्गों के प्रति सहानुभूति दिखाई और अपने साथ समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को शामिल किया।
    • दोनों का मानना ​​था कि निर्वाण या मोक्ष जन्म और मृत्यु की शाश्वत शृंखला से मुक्त होता है।
    • दोनों ने मोक्ष प्राप्ति के साधन के रूप में कर्मकांड या ईश्वर की आराधना और भक्ति के बजाय मज़बूत नैतिक सिद्धांतों पर ज़ोर दिया।

    असमानताएँ

      • बौद्ध धर्म के विपरीत जैन धर्म इतिहास में कई तरह के परिवर्तनों का सामना करने के बावजूद भारत में बना रहा। ऐसा इसलिये हुआ क्योंकि जैन धार्मिक अनुशासन का सख्ती से पालन करते हैं। हालाँकि विदेशों में इसकी तुलना में बौद्ध धर्म उदार बना रहा और फलता-फूलता रहा।
      • जैन धर्म जीवन के प्रति अधिक समग्र दृष्टिकोण में विश्वास करता है। इसके अनुसार प्रकृति की हर जीवित और निर्जीव चीज़ की अपनी आत्मा होती है, जबकि बौद्ध धर्म ऐसा नहीं मानता है।
      • बौद्ध धर्म पुरुषों और महिलाओं के बीच भेदभाव नहीं करता है, लेकिन जैन धर्म के अनुसार गृहस्थ महिला और पुरुष मोक्ष नहीं प्राप्त कर सकते हैं।
      • जैन शिक्षण का तत्त्व अहिंसा है जैसे- पशु बलि का विरोध करना। बौद्ध धर्म में अहिंसा की अवधारणा (अहिंसा) अलग है। बौद्ध धर्म के अनुसार, लोगों की आवश्यकता या पारंपरिक आहार के तौर पर जानवरों का मांस खाने की अनुमति दी गई थी।

      निष्कर्ष

      बौद्ध धर्म और जैन धर्म कभी-कभी एक समान माता-पिता के दो बच्चों के रूप में दिखाई पड़ते हैं किंतु उनमें बहुत कुछ अलग होता है। डब्ल्यू डब्ल्यू हंटर लिखते हैं “जैन धर्म अन्य संप्रदायों से उतना ही स्वतंत्र है, खासकर बौद्ध धर्म से, जितना कि किसी अन्य संप्रदाय से उम्मीद की जा सकती है।

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