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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    हाल ही में सेबी द्वारा गठित कार्यकारी समूह ने गैर-लाभकारी संगठनों को बॉण्ड जारी करके सीधे सोशल स्टॉक एक्सचेंज(SSE) पर सीधे सूचीबद्ध होने की अनुमति देने की सिफारिश की है। SSE से आप क्या समझते हैं? वर्तमान में इसकी आवश्यकता के बिंदुओं पर प्रकाश डालें।

    17 Jul, 2020 सामान्य अध्ययन पेपर 3 अर्थव्यवस्था

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण: 

    • भूमिका

    • SSE क्या है?

    • इसकी आवश्यकता क्यों?

    • निष्कर्ष।

    वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने सामाजिक उद्यम और स्वैच्छिक संगठनों को सूचीबद्ध करने के लिये SEBI के विनियामक दायरे के तहत एक सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) गठित करने की दिशा में कदम उठाने का प्रस्ताव दिया था। SSE एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो निवेशकों को सामाजिक उद्यमों में शेयर खरीदने की अनुमति देता है।
    इस संबंध में घोषणा करते हुए वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि ‘यह समय पूंजी बाज़ार को आम जनता के और अधिक करीब ले जाने और समावेशी विकास तथा वित्तीय समावेशन से संबंधित विभिन्न सामाजिक कल्याण उद्देश्यों को पूरा करने का समय है।

    अपने गठन के बाद सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) एक सामान्य मंच के रूप में कार्य करेगा जहाँ सामाजिक उद्यम आम जनता और निवेशकों से धन जुटा सकते हैं।

    SSE की आवश्यकता-

    संयुक्त राष्ट्र जैसे विभिन्न वैश्विक निकायों द्वारा निर्धारित मानव विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिये आगामी वर्षों में भारत को बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होगी और यह केवल सरकारी व्यय अथवा निवेश के माध्यम से नहीं किया जा सकता है।

    सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वाले निजी उद्यमों को भी अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

    वर्तमान में, भारत में सामाजिक उद्यम बहुत सक्रिय हैं, हालाँकि उन्हें धन जुटाने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिसमें सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है आम निवेशकों में विश्वास की कमी।

    इस विषय पर प्रस्तुत एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एक संपन्न सामाजिक उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र है, हालाँकि देश में कई संगठनों को अपनी ज़रूरत की पूंजी प्राप्त करने के लिये संघर्ष का सामना करना पड़ता है।

    SSE एक ऐसा मंच प्रदान करने का प्रयास करेगा जहाँ निवेशक स्टॉक एक्सचेंज द्वारा अधिकृत सामाजिक उद्यमों में निवेश कर सकेंगे, जिससे निवेशकों में विश्वास पैदा होगा।

    ऐसे सामाजिक उद्यमों को अपनी गतिविधियों और निवेशों का विवरण पारदर्शी तरीके से आम जनता के साथ साझा करना होगा।

    निष्कर्षतः भारत में दो मिलियन से भी अधिक सामाजिक उद्यम हैं। इसलिये सामाजिक उद्यमों हेतु SSE का निर्माण करते समय काफी सावधानीपूर्वक योजना के निर्माण की आवश्यकता है।

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