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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • योजनाबद्ध विकास में औद्योगिक प्रकीर्णन की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिये।

    22 Jun, 2018 सामान्य अध्ययन पेपर 1 भूगोल

    उत्तर :

    प्रश्न-विच्छेद

    • योजनाबद्ध विकास में औद्योगिक प्रकीर्णन की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण करना है।

    हल करने का दृष्टिकोण

    • प्रभावी भूमिका में औद्योगिक प्रकीर्णन को स्पष्ट करते हुए योजनाबद्ध विकास में इसकी आवश्यकता पर संक्षेप में चर्चा करें।
    • तार्किक एवं संतुलित विषय-वस्तु में औद्योगिक प्रकीर्णन के कारणों की संक्षेप में चर्चा करते हुए इसके लाभ एवं हानियों को स्पष्ट करें।
    • प्रश्नानुसार संक्षिप्त एवं सारगर्भित निष्कर्ष लिखें।

    जब उद्योग-धंधे किसी स्थान विशेष पर संकेंद्रित न होकर देश के भिन्न-भिन्न स्थानों पर स्थापित किये जाते हैं तब औद्योगीकरण की इस प्रवृत्ति को औद्योगिक विकेंद्रीकरण या औद्योगिक प्रकीर्णन की संज्ञा दी जाती है।

    विभिन्न क्षेत्रों के संतुलित विकास के लिये विकेंद्रीकरण की नीति अपनाई जाती है। भारत में भी योजनाबद्ध विकास के लिये विकेंद्रीकरण की नीति पर अधिक बल दिया जा रहा है।

    कुछ विशिष्ट स्थानों या क्षेत्रों में ही उद्योगों के संकेंद्रित होने से देश का संतुलित विकास नहीं हो पाता है और राष्ट्रीय असुरक्षा, औद्योगिक एवं पर्यावरणीय प्रदूषण तथा जनसंख्या संकेंद्रण के कारण अधिक भीड़-भाड़ तथा महानगरीकरण की प्रवृत्ति से उत्पन्न अन्य समस्याओं को कम या समाप्त करने के लिये औद्योगिक विकेंद्रीकरण की नीति अपनाई जाती है।

    उद्योगों के विकेंद्रीकरण में कई प्रकार की अपकेंद्री शक्तियों का भी योगदान होता है जो उद्योगों के कुछ विशिष्ट स्थानों पर केंद्रित होने की अपेक्षा उन्हें अलग-अलग स्थानों पर स्थापित करने के लिये प्रेरित करती हैं। इनमें विद्युत शक्ति का विकास, परिवहन एवं संचार माध्यमों का विकास, बैंकिंग तथा व्यापारिक संस्थानों का विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, लागत बचत, संतुलित आर्थिक विकास आदि प्रमुख हैं। हालाँकि औद्योगिक विकेंद्रीकरण ने निश्चित रूप से संतुलित विकास को बढ़ाया है लेकिन इसकी कुछ हानियाँ भी हैं। इसके पक्ष तथा विपक्ष को निम्न प्रकार समझा जा सकता है :

    पक्ष में तर्क

    • इससे औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की क्षेत्रीय विषमताओं को दूर किया जा सकता है। साथ ही, संतुलित विकास का मार्ग प्रशस्त होता है और राष्ट्रीय एकता को बल मिलता है।
    • उद्योगों के विकेंद्रीकरण से परिवहन तथा संचार सुविधाओं का प्रसार देश के लगभग सभी भागों में हो जाता है।
    • नए क्षेत्र या स्थान पर उद्योगों की स्थापना होने से वहाँ बैंकिंग, बीमा तथा वित्तीय संस्थाओं का विकास होता है। इस प्रकार, व्यापारिक सेवाएँ छोटे-छोटे कस्बों तथा ग्रामों तक पहुँच जाती हैं।
    • देश के विभिन्न भागों में छोटे-बड़े कारखानों की स्थापना से स्थानीय लोगों को रोज़गार मिल जाता है और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्राप्त होती है।
    • विकेंद्रित औद्योगिक तथा आर्थिक विकास के उद्देश्य से देश के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों तथा पहाड़ी क्षेत्रों में भी बिजली पहुँचाई जाती है। इससे देश के समग्र विद्युतीकरण संबंधी योजनाएँ क्रियान्वित की जाती हैं।
    • उद्योगों के विकेंद्रीकरण से श्रमिकों के आवास, वर्ग, संघर्ष, औद्योगिक प्रदूषण आदि समस्याएँ कम पाई जाती हैं।
    • राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से उद्योगों का विकेंद्रीकरण लाभप्रद होता है। युद्ध के समय शत्रु देश अर्थव्यवस्था को नष्ट करने हेतु प्रमुख औद्योगिक केंद्रों पर हमला करके उसे नष्ट करने का प्रयास करते हैं किंतु विकेंद्रित उद्योगों को नष्ट करना अत्यंत कठिन है।

    विपक्ष में तर्क

    • सुदूरवर्ती ग्रामीण अंचलों तथा लघु केंद्रों पर रेल, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएँ कम प्राप्त होती हैं जिससे कच्ची सामग्री मंगाने तथा तैयार सामान भेजने में कठिनाई होती है और अधिक परिवहन व्यय करना पड़ता है।
    • बैंकिंग तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं के अभाव के कारण पर्याप्त मात्रा में पूंजी प्राप्त करना अत्यंत कठिन है।
    • किसी उद्योग के लिये कुशल श्रमिक क्षेत्र विशेष  में ही निवास करते हैं जिस कारण विकेंद्रित औद्योगिक इकाइयों को कुशल श्रमिक दूरवर्ती क्षेत्रों से मंगाने पड़ते हैं और उन्हें अधिक मज़दूरी देनी पड़ती है। इस कारण कुशल श्रमिकों का अभाव विकेंद्रीकरण की एक प्रमुख समस्या और दोष है।
    • विकेंद्रित कारखानों को औद्योगिक पूर्वारंभ और एकीकरण के लाभ प्राप्त नहीं हो पाते हैं। एकाकी उद्योग होने के कारण विकेंद्रित स्थानों पर अनुसंधान तथा प्रशिक्षण संबंधी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होती हैं।
    • संकेंद्रण की प्रवृत्ति वाले कुछ उद्योगों को यदि विकेंद्रित क्षेत्रों में स्थापित किया जाता है तो वे घाटे में चलते हैं और अंततः बंद हो जाते हैं।

    विपक्ष के तर्कों का समाधान यदि योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन के माध्यम से कर लिया जाता है तो निश्चित ही औद्योगिक प्रकीर्णन योजनाबद्ध विकास में पूर्णतः सहायक सिद्ध होगा जिससे समावेशी विकास को बल मिलेगा।

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