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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    “अमरावती शताब्दियों से भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को अपने में समेटे हुए है, जिसकी महत्ता आज भी विस्मृत नहीं हुई है।” परीक्षण कीजिये।

    06 Aug, 2018 सामान्य अध्ययन पेपर 1 संस्कृति

    उत्तर :

    उत्तर की रूपरेखा

    • प्रभावी भूमिका में अमरावती की संस्कृति का परिचय दें।
    • तार्किक एवं संतुलित विषय-वस्तु में तर्कों के आधार पर कथन की वैधता की पहचान करें।

    अमरावती एक ऐसा नगर है जो संपन्न सांस्कृतिक विरासत और धरोहर को वहन करता है। इसकी संस्कृति विविध समुदायों, धर्मों, जातियों आदि के मिश्रण का प्रतिनिधित्व करती है। इस नगर को पुण्यक्षेत्र या अमरेश्वरम् भी कहते हैं। अमरावती और इसके निकटस्थ धरणीकोटा का अभिलेखित इतिहास दूसरी शताब्दी ई.पू. पुराना है। यह सातवाहनों की राजधानी थी, जिन्होंने दूसरी शताब्दी ई. पू. से तीसरी शताब्दी ई. तक शासन किया। सातवाहनों के पतन के बाद आंध्र के इक्ष्वाकु और परवर्ती पल्लव राजाओं ने कृष्णा नदी घाटी पर शासन किया। इसके बाद पूर्वी चालुक्य और तेलुगू चोलों ने इस क्षेत्र पर आधिपत्य जमाए रखा। मध्यकाल में अमरावती कोटा राजाओं के नियंत्रण में था। कोटा राजाओं को 11वीं सदी में काकतीयों ने अपदस्थ कर दिया और अमरावती संयुक्त तेलुगू साम्राज्य का अंग बन गया।

    अमरावती को तीन कारणों से पवित्र माना जाता है- कृष्णा नदी, एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र ‘स्थल महात्यम’ और श्री महालिंगा मूर्ति। इसके अतिरिक्त, वज्रयान के पारंपरिक स्रोतों के अनुसार, बुद्ध ने धरनीकोटा / धान्यकटक में उपदेश दिया और कालचक्र महोत्सव आयोजित किया, जो अमरावती की प्राचीनता को 500 ई.पू. तक ले जाता है।

    इस नगर के विरासतों में अमरेश्वर मंदिर (भगवान शिव को समर्पित, 15 फीट ऊँचे सफेद संगमरमर के शिव लिंग के रूप में उपस्थित), महाचैत्य (महास्तूप जिसका निर्माण लगभग दूसरी शताब्दी में किया गया एवं जिसमें गूढ़ नक्काशी की गई है और जो भगवान बुद्ध के जीवन एवं उनकी शिक्षा को प्रतिबिंबित करता है), बौद्ध मूर्तियाँ और तख्ते (जिन पर बौद्ध अभिलेख लिखे हुए हैं) शामिल हैं। अमरेश्वर मंदिर में आयोजित होने वाले प्रमुख उत्सव हैं- महाशिवरात्रि जो ‘माघ बहुला दशमी’ को मनाई जाती है, नवरात्रि और कल्याण उत्सव। वर्ष 2006 में यहाँ 30वें कालचक्र का आयोजन किया गया और इस आयोजन में दलाई लामा भी आए थे। यह पूरे भारत में उन 12 शहरों/नगरों में से एक है, जिन्हें विरासत नगर घोषित किया गया है। हाल ही में इसे आंध्र प्रदेश की राजधानी घोषित किया गया है।

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