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श्री कुनाल मेहरा एक तीव्र गति से औद्योगीकरण कर रहे ज़िले के ज़िला कलेक्टर हैं, जिसने हाल ही में राज्य की ईज़-ऑफ-डूइंग-बिज़नेस पहल के तहत बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित किया है। 3,000 से अधिक स्थानीय श्रमिकों को रोज़गार देने वाली एक बड़ी विनिर्माण इकाई ने संचालन शुरू कर दिया है और इसे एक आदर्श सफलता-कथा के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
ज़िला प्रशासन में कार्यरत एक कनिष्ठ पर्यावरण अभियंता गोपनीय रूप से श्री मेहरा से संपर्क करता है तथा दस्तावेज़ी साक्ष्य प्रस्तुत करता है, जिनसे संकेत मिलता है कि कंपनी नियमित रूप से प्रदूषण मानकों का उल्लंघन कर रही है विशेष रूप से भूजल प्रदूषण और खतरनाक अपशिष्ट के अनुचित निपटान के मामले में। अभियंता यह भी स्वीकार करता है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने राजनीतिक और व्यावसायिक हितों के दबाव में निरीक्षण रिपोर्टों की अनदेखी की है। यह मुखबिर आशंकित है कि यदि उसकी पहचान उजागर हुई, तो उसे प्रतिशोध, स्थानांतरण या करियर में ठहराव का सामना करना पड़ सकता है।
यदि श्री मेहरा औपचारिक जाँच के आदेश देते हैं या इकाई को बंद कर देते हैं, तो इससे रोज़गार में कमी, निवेशकों की तीखी प्रतिक्रिया तथा उन्हें ‘विकास-विरोधी’ कहे जाने जैसे आरोप लग सकते हैं। राजनीतिक कार्यपालिका अनौपचारिक रूप से यह संकेत देती है कि राज्य की निवेश छवि को नुकसान से बचाने के लिये इस मामले को “आंतरिक रूप से सुलझा लिया जाएँ”।इसी बीच, स्थानीय किसानों द्वारा फसल उत्पादन में गिरावट और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शिकायतें सामने आने लगी हैं, जिनका संबंध औद्योगिक प्रदूषण से हो सकता है। मीडिया की रुचि बढ़ रही है और नागरिक समाज संगठन जवाबदेही तथा पारदर्शिता की माँग कर रहे हैं।
ऐसी स्थिति में श्री मेहरा को पर्यावरणीय न्याय, आर्थिक विकास और संस्थागत अखंडता के बीच संतुलन बनाते हुए मुखबिर की शिकायत से निपटने का निर्णय लेना है।
सामान्य अध्ययन पेपर 4 केस स्टडीज़
प्रश्न
1. इस मामले में कौन-कौन से नैतिक मुद्दे सम्मिलित हैं?
2. श्री मेहरा के सामने कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हैं? प्रत्येक के गुण-दोष का मूल्यांकन कीजिये।
3. श्री मेहरा के लिये सर्वाधिक उपयुक्त कार्यवाही क्या होनी चाहिये? अपने उत्तर को नैतिक सिद्धांतों और संवैधानिक मूल्यों के संदर्भ में स्पष्ट कीजिये।