रैपिड फायर
असम में शीतकालीन प्रवासी पक्षी
- 10 Jan 2026
- 14 min read
प्रत्येक वर्ष शीतकाल में साइबेरिया, तिब्बत और यूरोप की कठोर शीत जलवायु से बचने के लिये मध्य एशियाई फ्लाईवे के माध्यम से आने वाले विभिन्न प्रवासी पक्षियों के लिये असम की आर्द्रभूमि, नदी तल, बाढ़ मैदान, प्राकृतिक और कृत्रिम जलाशय महत्त्वपूर्ण मौसमी आवास बन जाते हैं।
- मध्य एशियाई फ्लाईवे: असम मध्य एशियाई फ्लाईवे के साथ स्थित है, जो आर्कटिक और समशीतोष्ण क्षेत्रों को दक्षिण एशिया से जोड़ने वाला एक प्रमुख प्रवासी मार्ग है। जिसके चलते यह राज्य को लंबी दूरी के प्रवासी पक्षियों के लिये एक महत्त्वपूर्ण शीतकालीन विश्राम स्थल बनाता है।
- उल्लेखनीय प्रवासी प्रजातियाँ: सिट्रीन वैगटेल असम की आर्द्रभूमि, बाढ़ के मैदानों और दलदलों में आने वाला पहला आगंतुक पक्षी है।
- बार-हेडेड गीज़, व्हाइट-फ्रंटेड गीज़, ग्रेलैग गीज़।
- नॉर्दर्न पिंटेल, कॉमन पोचर्ड्स, फेरुगिनस पोचर्ड्स।
- पाइड एवोकेट्स, फालकेटेड डक्स, ग्रेट क्रेस्टेड ग्रीब्स।
- ग्लॉसी आइबिस, यूरेशियन विगियन्स, पर्पल हेरॉन।
- महत्त्वपूर्ण आर्द्रभूमि और पक्षी अवलोकन स्थल: प्रमुख प्रवासी पक्षी पर्यावासों में शामिल हैं दीपोर बील (रामसर स्थल), मागुरी मोटापुंग बील, पानी दिहिंग बील, सोन बील (असम की सबसे बड़ी आर्द्रभूमि), काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य (आर्द्रभूमि झीलें) और पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य।
- राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण ढाँचा: प्रवासी प्रजातियों पर अभिसमय (CMS) के एक पक्षकार के रूप में, भारत ने महत्त्वपूर्ण पर्यावासों और प्रवासी गलियारों की सुरक्षा के उद्देश्य से मध्य एशियाई फ्लाईवे के साथ प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण के लिये राष्ट्रीय कार्ययोजना शुरू की है।
- भारत अन्य प्रमुख प्रवासी प्रजातियों जैसे अमूर फाल्कन, ब्लैक-नेक्ड क्रेन, समुद्री कछुओं और हम्पबैक व्हेल का भी अस्थायी आवास भी है।
|
और पढ़ें: प्रवासी पक्षी और चिल्का झील |
.webp)