रैपिड फायर
भारत में FDI प्रवृत्तियाँ
- 10 Jan 2026
- 12 min read
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) के अनुसार, भारत में वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल–सितंबर 2025) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में प्रबल वृद्धि हुई, जो मुख्य रूप से IT क्षेत्र में निवेश प्रवाह दोगुना होने के कारण हुई।
- FDI प्रवाह: वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (H1 FY26) में FDI प्रवाह बढ़कर 35.2 अरब डॉलर हो गया, जो H1 FY25 के 29.8 अरब डॉलर की तुलना में 18% की वृद्धि है। अप्रैल 2000 से सितंबर 2025 तक संचयी FDI प्रवाह 1.12 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया।
- शीर्ष निवेशक देश: 12 अरब डॉलर के FDI के साथ कुल निवेश में सिंगापुर का 34% योगदान रहा, इसके बाद अमेरिका (6.6 अरब डॉलर) और मॉरीशस (3.5 अरब डॉलर) का स्थान है।
- राज्यवार निवेश प्रवाह: महाराष्ट्र FDI का शीर्ष प्राप्तकर्त्ता बना रहा, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 30% है। इसके बाद कर्नाटक (9.4 अरब डॉलर) और तमिलनाडु (3.6 अरब डॉलर) क्रमशः दूसरे और तीसरे सबसे बड़े प्राप्तकर्ता हैं, जबकि गुजरात का हिस्सा 6.4% तक घट गया।
- प्रमुख क्षेत्र: सर्विसेज़ सेक्टर और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर में से प्रत्येक की संचयी इक्विटी अंतर्वाह में 16% की हिस्सेदारी है। इसके अलावा ट्रेडिंग (6%), टेलीकॉम (5%) और ऑटोमोबाइल्स (5%) ने भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
- नीतिगत सशक्तीकरण: बीमा में FDI सीमा को 100% तक बढ़ाना, GST का कार्यान्वयन और विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZs) का विकास जैसे सुधारों ने भारत के निवेश पारिस्थितिक तंत्र को मज़बूत किया है।
|
और पढ़ें: भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश |
