रैपिड फायर
बालकों एवं किशोरों में उच्च रक्तचाप
- 10 Jan 2026
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हाल ही में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने रेखांकित किया है कि वर्ष 2000 से 2020 के बीच बालकों और किशोरों में उच्च रक्तचाप की व्यापकता वैश्विक स्तर पर लगभग दोगुनी हो गई है, जो बाल्यकालीन सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिये एक बढ़ती हुई चिंता का संकेत देती है।
- परिचय : बालकों में उच्च रक्तचाप बालकों एवं किशोरों में लगातार उच्च रक्तचाप को संदर्भित करता है, जिसका निदान वयस्कों के लिये निर्धारित की निश्चित सीमा के बजाय बालकों की आयु, लिंग और लंबाई-आधारित प्रतिशतक चार्ट (Percentile Chart) के माध्यम से किया जाता है।
- बाल्यकालीन बनाम वयस्क उच्च रक्तचाप : वयस्कों, जहाँ उच्च रक्तचाप प्रायः प्राथमिक प्रकृति का होता है, के विपरीत बालकों में पाया जाने वाला उच्च रक्तचाप अक्सर द्वितीयक प्रकृति का होता है, जो सामान्यतः गुर्दे, अधिवृक्क ग्रंथियों तथा रक्त वाहिकाओं से संबंधित विकारों से संबंधित होता है।
- कारण एवं जोखिम कारक (Causes and Risk Factors) : तीव्र शहरीकरण ने बालकों की जीवनशैली में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन किये हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रसंस्कृत एवं अधिक नमक युक्त खाद्य पदार्थों का बढ़ता सेवन, शारीरिक गतिविधियों/व्यायाम में कमी, अत्यधिक स्क्रीन टाइम तथा पर्यावरणीय तनाव कारकों जैसे- ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण और शैक्षणिक दबाव के प्रति अधिक संपर्क देखने को मिल रहा है।
- बाल्यावस्था में बढ़ता मोटापा, विशेषकर तेज़ी से वज़न बढ़ना और उदर मोटापा (Central Adiposity), बाल उच्च रक्तचाप (Paediatric Hypertension) के लिये सबसे महत्त्वपूर्ण संसोधन-योग्य जोखिम कारक बने हुए हैं।
- नैदानिक विशेषताएँ (Clinical Features) : यह स्थिति आरंभिक चरणों में प्रायः लक्षणहीन होती है और नियमित स्क्रीनिंग के अभाव में अक्सर इसकी पहचान नहीं हो पाती।
- स्वास्थ्य पर प्रभाव : बाल्यावस्था में लगातार बना रहने वाला उच्च रक्तचाप जीवनभर कोरोनरी हृदय रोग, स्ट्रोक, टाइप-2 मधुमेह तथा दीर्घकालिक गुर्दा रोग के जोखिम को बढ़ाता है। इसके अतिरिक्त, इससे रक्त वाहिकाओं को प्रारंभिक क्षति पहुँचती है तथा धमनियों में अपरिवर्तनीय कठोरता (Arterial Stiffness) विकसित होने लगती है।
- रोकथाम एवं प्रबंधन : रोकथाम की शुरुआत प्रारंभिक अवस्था से ही होनी चाहिये और इसका केंद्र जीवनशैली में सुधार होना चाहिये, जिसमें नमक एवं चीनी के सेवन में कमी, अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से परहेज़, नियमित शारीरिक व्यायाम, पर्याप्त नींद तथा तनाव प्रबंधन शामिल हैं।
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