रैपिड फायर
ऑलिव रिडले कछुए
- 10 Jan 2026
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ऑलिव रिडले कछुओं (ORT) के प्रजनन और निडन (नेस्टिंग) के मौसम को मानवीय हस्तक्षेप ने गंभीर रूप से प्रभावित किया है, हाल ही में मत्स्य ग्रहण जालों में फँसकर हुई कछुओं की मृत्यु और तटीय क्षेत्रों में कृत्रिम प्रकाश से उत्पन्न होने वाले व्यवधान, इन लुप्तप्राय जीवों के अस्तित्व के लिये प्रमुख चिंता का विषय बन गए हैं।
- परिचय: ऑलिव रिडले कछुए विश्व के सबसे छोटे समुद्री कछुए होते हैं और इनका कवच (कैरापेस) हृदयाकार, जैतूनी या धूसर-हरे रंग का होता है।
- इनका वितरण मुख्य रूप से प्रशांत, हिंद और अटलांटिक महासागरों के उष्णकटिबंधीय (Tropical) क्षेत्रों तक विस्तृत है। ये जीव खुले महासागरीय परिवेश (Pelagic) और तटीय जल—दोनों ही प्रकार के पर्यावासों में निवास करने के लिये अनुकूलित हैं।
- आहार और व्यवहार: ORT सर्वाहारी जीव हैं, जो जेलीफिश, घोंघे, केकड़े और शैवाल का सेवन करते हैं। यह प्रशांत महासागर से हिंद महासागर तक लंबी दूरी का प्रवास कर नवंबर-दिसंबर माह के मध्य भारतीय तटों पर पहुँचकर अप्रैल-मई माह तक वहीं रहते हैं।
- यह प्रजाति खाड़ियों और संकरे रेतीले समुद्र तटों पर अपने मॉस नेस्टिंग (अरिबाडा) के लिये जानी जाती है, जहाँ प्रत्येक मादा एक बार में लगभग 100-140 अंडे देती है।
- भारत में प्रमुख स्थल गहिरमाथा (सबसे बड़ा सामूहिक निडन (मास नेस्टिंग) स्थल), रुशिकुल्या, ओडिशा में देवी नदी का मुहाना, विशाखापत्तनम और काकीनाडा (आंध्र प्रदेश) तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह हैं।
- विधिक संरक्षण: भारत में पाई जाने वाली समुद्री कछुओं की सभी 5 प्रजातियाँ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I और CITES सम्मेलन के परिशिष्ट I के अंतर्गत कानूनी रूप से संरक्षित हैं। समुद्री कछुए IUCN की रेड लिस्ट में संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध हैं।
- संरक्षण उपाय: भारतीय तटरक्षक बल द्वारा संचालित 'ऑपरेशन ओलिविया' के तहत मत्स्य ग्रहण पर प्रतिबंध लागू किया गया है। ओडिशा में टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइसेस (TED) अनिवार्य हैं। टैगिंग कार्यक्रम प्रवास पर नज़र रखने में सहायक होते हैं।
- तमिलनाडु में ऑलिव रिडले कछुओं के आवागमन, नेस्टिंग तथा मत्स्य गतिविधियों के साथ उनकी अंतःक्रिया की निगरानी हेतु उपग्रह एवं फ्लिपर टैग के माध्यम से वर्ष 2025–2027 के दौरान एक द्विवर्षीय टेलीमेट्री अध्ययन किया जाएगा।
- प्रमुख खतरे: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर प्रतिबंध के बावजूद ऑलिव रिडले कछुए अवैध शिकार और अंडों के व्यापार के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हैं। इनमें सर्वाधिक मृत्यु दर निडन (नेस्टिंग) के मौसम में ट्रॉल और गिल जालों में फँसने के कारण होती है
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