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स्मोग-ईटिंग फोटोकैटेलिटिक कोटिंग

  • 23 Mar 2026
  • 21 min read

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

दिल्ली के बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने की दिशा में एक कदम के रूप में, दिल्ली सरकार ने IIT मद्रास के साथ साझेदारी की है, जिसके तहत शहरी सतहों पर ‘स्मोग-ईटिंग’ फोटोकैटलिटिक कोटिंग्स का परीक्षण किया जा रहा है, ताकि शहर के बुनियादी ढाँचे में मौजूद गंभीर वायु प्रदूषकों को निष्क्रिय किया जा सके।

  • ‘स्मोग-ईटिंग’ फोटोकैटलिटिक कोटिंग्स: इस परियोजना का मुख्य आधार $TiO_2$ (टाइटेनियम डाइऑक्साइड) से निर्मित कोटिंग्स हैं। यह पदार्थ न केवल रासायनिक रूप से स्थिर और सस्ता है, बल्कि बाजार में आसानी से उपलब्ध भी है, जो इसे शहरी प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक व्यावहारिक समाधान बनाता है।
    • जब टाइटेनियम डाइऑक्साइड (TiO₂) सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आता है, तो यह एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है और सतह पर इलेक्ट्रॉनों का निर्माण करता है, जो नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCs) जैसे प्रमुख वायु प्रदूषकों के साथ अभिक्रिया कर उन्हें विघटित कर देते हैं।
    • सड़कों, इमारतों और फुटपाथों जैसी सतहों पर लगाए जाने पर ये कोटिंग्स एक निष्क्रिय वायु-शुद्धीकरण प्रणाली के रूप में लगातार कार्य करती हैं।
  • द्वितीयक प्रदूषकों पर प्रभाव: यद्यपि यह तकनीक सीधे तौर पर प्राथमिक कणीय पदार्थ (जैसे– PM2.5/PM10) को फिल्टर नहीं करती, लेकिन यह उनके रासायनिक पूर्वगामी तत्त्वों को सक्रिय रूप से नष्ट करके द्वितीयक कणीय पदार्थ और अत्यधिक विषैले ज़मीनी स्तर पर ओज़ोन के निर्माण को रोकने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • पर्यावरणीय चुनौतियाँ: यद्यपि यह तकनीक किफायती, स्थिर और विस्तार योग्य है, इसकी वास्तविक प्रभावशीलता कई बाधाओं से प्रभावित होती है, जैसे– घने स्मॉग के दौरान सूर्य के प्रकाश की कम तीव्रता, बदलते पवन पैटर्न तथा भारी धूल जमाव, जो सूर्य के प्रकाश को अवरुद्ध कर सकता है और नियमित सफाई की आवश्यकता पैदा करता है।
    • यह यूट्रोफिकेशन (शैवाल वृद्धि/एल्गल ब्लूम) को बढ़ावा दे सकता है, जिससे पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और सावधानीपूर्वक क्रियान्वयन की आवश्यकता को बल मिलता है।
    • ‘स्मोग-ईटिंग’ वाली कोटिंग्स का बड़े पैमाने पर उपयोग शहरी जल-निकासी प्रणालियों में नाइट्रेट के बहाव का कारण बन सकता है, जिससे यमुना नदी जैसे जल निकायों में पोषक तत्त्वों का स्तर बढ़ सकता है।
  • तुलनात्मक विश्लेषण: स्मोग टावर या मौसम पर निर्भर क्लाउड सीडिंग जैसी केंद्रीकृत, ऊर्जा-गहन और काफी हद तक अप्रभावी तकनीकी हस्तक्षेपों के विपरीत, फोटोकैटलिटिक कोटिंग्स एक विकेंद्रीकृत, शून्य-ऊर्जा तथा निष्क्रिय शमन रणनीति प्रस्तुत करती है।
    • यह तकनीक एक स्वतंत्र समाधान नहीं है, बल्कि एक निरंतर पृष्ठभूमि प्रक्रिया के रूप में कार्य करती है और ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) जैसे उपायों के पूरक के रूप में उपयोगी होती है।

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