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स्टार्टअप मान्यता रूपरेखा में संशोधन

  • 07 Feb 2026
  • 63 min read

चर्चा में क्यों? 

स्टार्टअप इंडिया कार्ययोजना के अंतर्गत भारत ने स्टार्टअप मान्यता रूपरेखा में संशोधन किया है, जो स्टार्टअप इंडिया पहल के दूसरे दशक में प्रवेश के साथ एक महत्त्वपूर्ण नीतिगत संशोधन को चिह्नित करता है।

  • वर्ष 2024 में उद्योग संवर्द्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से लगभग 10% ही डीप टेक श्रेणी से संबंधित थे। इस स्तर को अपर्याप्त मानते हुए भविष्य-उन्मुख वातावरण के निर्माण हेतु सुधारों के लिये पहल की गई है, ताकि भारत के नवाचार, विनिर्माण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों से संबंधित लक्ष्यों के अनुरूप एक सुदृढ़ पारितंत्र विकसित किया जा सके।

भारत की स्टार्टअप मान्यता रूपरेखा में प्रमुख संशोधन क्या हैं?

  • डीप टेक स्टार्टअप श्रेणी की शुरुआत: वास्तविक नवाचार की पहचान हेतु विशिष्ट मानदंडों के साथ “डीप टेक स्टार्टअप” के लिये स्टार्टअप की एक समर्पित उप-श्रेणी की शुरुआत की गई:
    • परिभाषा: इस इकाई को नवीन वैज्ञानिक अथवा अभियांत्रिकी ज्ञान पर आधारित समाधान विकसित करने चाहिये, जिनमें दीर्घ विकास चक्र, विस्तारित परिपक्वता अवधि, उच्च पूंजी तथा अवसंरचना आवश्यकताएँ, साथ ही उल्लेखनीय तकनीकी अथवा वैज्ञानिक अनिश्चितता सम्मिलित हो।
    • अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर केंद्रित: इकाई को अपने राजस्व या वित्तपोषण की तुलना में अनुसंधान एवं विकास पर व्यय का एक उच्च प्रतिशत व्यय करना चाहिये।
    • बौद्धिक संपदा (IP) की आवश्यकता: इकाई के पास महत्त्वपूर्ण नवीन बौद्धिक संपदा का स्वामित्व होना चाहिये अथवा वह इसके सृजन की प्रक्रिया में हो, साथ ही उसके व्यवसायीकरण हेतु कदम उठाए जा रहे हों।
    • परिसंपत्ति प्रतिबंध: मान्यता अवधि के दौरान डीप टेक स्टार्टअप को अपने मुख्य व्यवसाय से असंबद्ध परिसंपत्तियों अथवा गतिविधियों में निवेश की स्पष्ट अनुमति नहीं होगी।
    • प्राधिकरण: उद्योग संवर्द्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) यह निर्धारित करने वाला अंतिम प्राधिकरण होगा कि कोई कंपनी स्टार्टअप अथवा डीप टेक स्टार्टअप के रूप में योग्य है या नहीं। 
      • यह निर्णय अंतर-मंत्रालयी प्रमाणन बोर्ड से प्राप्त “मार्गदर्शन” के आधार पर लिया जाएगा।
  • कारोबार के टर्नओवर की सीमा और मान्यता अवधि: नए DPIIT मानदंडों के तहत स्टार्टअप मान्यता के लिये टर्नओवर की सीमा ₹100 करोड़ से बढ़ाकर ₹200 करोड़ कर दी गई है, जो स्थापना की तिथि से 10 वर्ष तक की इकाइयों पर लागू होगी।
    • डीप टेक स्टार्टअप्स के लिये मान्यता अवधि को पंजीकरण की तिथि से 10 वर्ष से बढ़ाकर 20 वर्ष कर दी गई है और कारोबार की सीमा को बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
  • सहकारी समितियाँ: अब बहु-राज्य सहकारी समितियाँ (बहु-राज्य सहकारी समितियाँ अधिनियम, 2002 के अंतर्गत) तथा राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के सहकारी अधिनियमों के तहत पंजीकृत सहकारी समितियाँ दोनों स्टार्टअप मान्यता के लिये पात्र होंगी।
    • यह कदम विशेष रूप से कृषि, ग्रामीण विकास और संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
  • दुरुपयोग रोकने के लिये प्रतिबंध: यह सुनिश्चित करने हेतु कि लाभ केवल वास्तविक स्टार्टअप्स तक ही सीमित रहें, संशोधित ढाँचा कड़े सुरक्षा उपाय लागू करता है, जिनमें सरकार द्वारा अधिसूचित सट्टेबाजी या गैर-उत्पादक परिसंपत्तियों अथवा गतिविधियों में संलग्न इकाइयों पर प्रतिबंध शामिल है।
    • यह प्रावधान मौजूदा उद्यमों के विभाजन या पुनर्गठन के माध्यम से गठित व्यवसायों को भी स्टार्टअप के रूप में मान्यता देने से स्पष्ट रूप से बाहर करता है।

नोट: अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान एवं विकास नवाचार (RDI) कोष का संरक्षक है, जिसके तहत सात वर्षों में उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश और अनुसंधान को वित्तपोषित किये जाने की उम्मीद है।

  • इन निवेशों का एक हिस्सा वित्तीय संस्थानों जैसे द्वितीयक फंड प्रबंधकों के माध्यम से किया जाएगा, जो डीप टेक स्टार्टअप्स को आवंटित होगा।

स्टार्टअप इंडिया पहल क्या है?

  • परिचय: 16 जनवरी, 2016 को शुरू की गई 'स्टार्टअप इंडिया' पहल, जो वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत DPIIT के नेतृत्व में है, अब एक 'फुल-स्टैक प्लेटफॉर्म' (व्यापक मंच) के रूप में विकसित हो चुकी है, जो स्टार्टअप्स को विचार से लेकर विस्तार तक सहायता प्रदान करती है।
  • स्टार्टअप इंडिया कार्ययोजना: स्टार्टअप इंडिया के लिये एक कार्ययोजना वर्ष 2016 में प्रस्तुत की गई थी।
    • कार्ययोजना में कुल 19 कार्य बिंदु शामिल हैं, जो ‘सरलीकरण एवं मार्गदर्शन’, ‘वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन’ तथा ‘उद्योग–अकादमिक साझेदारी और ऊष्मायन’ जैसे प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित हैं।
    • कार्ययोजना ने देश में एक सशक्त और जीवंत स्टार्टअप पारिस्थितिक तंत्र विकसित करने के उद्देश्य से परिकल्पित सरकारी समर्थन, योजनाओं और प्रोत्साहनों की आधारशिला रखी।
  • प्रमुख योजनाएँ और सहायता स्तंभ: स्टार्टअप्स के लिये 'फंड ऑफ फंड्स' (FFS), घरेलू जोखिम पूंजी के विस्तार हेतु सेबी में पंजीकृत 'वैकल्पिक निवेश कोष' (AIFs) के माध्यम से 10,000 करोड़ रुपये के कोष को संचालित करता है।
  • स्टार्टअप इंडिया हब: यह एक सिंगल-विंडो डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है, जो स्टार्टअप्स को निवेशकों, मेंटर्स, इनक्यूबेटर्स, कॉर्पोरेट्स और सरकारी संस्थाओं से जोड़ता है।
    • संघीय स्तर पर, राज्यों की स्टार्टअप रैंकिंग रूपरेखा राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में स्टार्टअप नीति के प्रदर्शन का आकलन कर प्रतिस्पर्द्धी संघवाद को प्रोत्साहित करती है।  
    • मेंटरशिप एवं नेटवर्किंग मंच, जैसे– मेंटॉरशिप, एडवाइज़री, असिस्टेंस, रेज़िलिएंस तथा ग्रोथ (MAARG) और स्टार्टअप इंडिया इन्वेस्टर कनेक्ट पोर्टल उद्यम संस्थापकों को मार्गदर्शकों तथा निवेशकों से जोड़ते हैं, जिससे समग्र स्टार्टअप ईकोसिस्टम सुदृढ़ होता है।
  • प्रभाव एवं उपलब्धियाँ:
    • विस्तार: भारत अब विश्व के सबसे बड़े स्टार्टअप पारिस्थितिक तंत्रों में से एक है, जहाँ 2 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स सक्रिय हैं।
    • यूनिकॉर्न्स: यूनिकॉर्न्स (USD 1 बिलियन+ मूल्यांकन वाले स्टार्टअप्स) की संख्या वर्ष 2014 में केवल 4 से बढ़कर 120 से अधिक हो गई है।
    • समावेशन: 45% से अधिक स्टार्टअप्स में कम-से-कम एक महिला निदेशक हैं, जबकि लगभग 50% मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स टियर II तथा टियर III नगरों से आते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. स्टार्टअप मान्यता रूपरेखा में संशोधन का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
एक पूर्वानुमेय, समावेशी तथा नवाचार-केंद्रित ईकोसिस्टम का निर्माण करना, साथ ही यह सुनिश्चित करना कि लाभ वास्तविक स्टार्टअप्स तक ही पहुँचें।

2. नई रूपरेखा के अंतर्गत डीप टेक स्टार्टअप की पात्रता क्या है?
वे स्टार्टअप्स जो वैज्ञानिक अथवा अभियांत्रिकी प्रगति पर आधारित हों, जिनका अनुसंधान एवं विकास (R&D) व्यय अधिक हो तथा जिनके पास नवीन बौद्धिक संपदा का स्वामित्व हो।

3. स्टार्टअप्स के टर्नओवर एवं आयु-सीमा में क्या परिवर्तन किये गए हैं?
सामान्य स्टार्टअप्स के लिये अब 10 वर्ष की आयु-सीमा तथा ₹200 करोड़ तक का टर्नओवर निर्धारित किया गया है, जबकि डीप टेक स्टार्टअप्स के लिये 20 वर्ष की आयु-सीमा तथा ₹300 करोड़ तक की सीमा प्रदान की गई है।

4. स्टार्टअप मान्यता में सहकारी समितियों को क्यों शामिल किया गया है?
कृषि, ग्रामीण विकास तथा संबद्ध क्षेत्रों में सहकारिता-आधारित उद्यमिता के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहित करने हेतु।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

प्रिलिम्स 

प्रश्न. 'स्टैंडअप इंडिया स्कीम' (Stand Up India Scheme) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (2016)

1. इसका प्रयोजन SC/ST एवं महिला उद्यमियों में उद्यमिता को प्रोत्साहित करना है।

2. यह SIDBI के माध्यम से पुनर्वित्त का प्रावधान करता है।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: C 


प्रश्न. जोखिम पूंजी से क्या तात्पर्य है? (2014)

(a) उद्योगों को उपलब्ध कराई गई अल्पकालीन पूंजी

(b) नए उद्यमियों को उपलब्ध कराई गई दीर्घकालीन प्रारंभिक पूंजी

(c) उद्योगों को हानि उठाते समय उपलब्ध कराई गई निधियाँ

(d) उद्योगों के प्रतिस्थापन एवं नवीकरण के लिये उपलब्ध कराई गई निधियाँ

उत्तर: (b)

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