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प्रारंभिक परीक्षा

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 28 मार्च, 2020

  • 28 Mar 2020
  • 11 min read

इल्युशिन (IL) 38 SD  

Ilyushin (IL) 38 SD 

COVID-19 के मद्देनज़र 21 दिन के लॉकडाउन के कारण गोवा में फेस मास्क की आपूर्ति करने के लिये भारतीय नौसेना के एक लॉन्ग रेंज मैरीटाइम रिकोनिसेंस एयरक्राफ्ट (Long Range Maritime Reconnaisence Aircraft) इल्युशिन (आईएल) 38 एसडी (IlyushinIL- 38 SD) का उपयोग किया गया।

इल्युशिन (आईएल) 38 एसडी के बारे में 

  • IL 38 SD विमान इल्युशिन (IL) 18 का उन्नत संस्करण है। यह एक समुद्री गश्ती और एंटी सबमरीन वारफेयर (ASW) विमान है जिसे रूस स्थित इल्युशिन ऐविऐशन कॉम्प्लेक्स  (Ilyushin Aviation Complex) द्वारा डिज़ाइन किया गया है।
  • IL 38 SD विमान के पहले वायु गतिकीय प्रोटोटाइप ने वर्ष 1961 में अपनी पहली उड़ान भरी थी।
  • वर्तमान में यह विमान रूसी नौसेना एवं भारतीय नौसेना में सेवाएँ प्रदान कर रहा है। भारतीय नौसेना ने वर्ष 2001 में पाँच विमानों को उन्नत करने के लिये रूस से अनुबंध किया था। 
  • रूसी नौसेना और भारतीय नौसेना के उन्नत IL 38 को क्रमशः IL 38N और IL 38SD के रूप में नामित किया गया।
  • विमान के एंटी-सब सिस्टम को आधुनिक एवं कॉम्पैक्ट सिस्टम से बदल दिया गया जिसे नोवेल्ला (Novella) अर्थात् सी ड्रैगन (Sea Dragon) के रूप में जाना जाता है।
  • वर्तमान में यह विमान आईएनएस हंसा (INS Hansa) में तैनात है, आईएनएस हंसा भारत के गोवा राज्य में डाबोलिम (Dabolim) के पास स्थित एक भारतीय नौसैनिक हवाई अड्डा है। 

अर्र-रिनाम 

Arr-Rinam

26 मार्च, 2020 को पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश में एक जनजातीय लाकडाउन अनुष्ठान अर्र-रिनाम (Arr-Rinam) आयोजित किया गया। अरुणाचल प्रदेश भौगोलिक रूप से चीन के हुबेई प्रांत से सबसे नज़दीक है जहाँ से COVID-19 का प्रकोप शुरू हुआ था।

मुख्य बिंदु: 

  • सीमावर्ती राज्य अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी सियांग (West Siang) ज़िले में औपचारिक रूप से 26 मार्च, 2020 को शाम 5 बजे से यह जनजातीय लॉकडाउन शुरू किया गया था। 
  • 48 घंटे का यह लॉकडाउन अनुष्ठान गालो (Galo) जनजाति द्वारा COVID-19 महामारी के प्रकोप से बचने के लिये स्थानीय लोगों की सर्वसम्मति से लगाया गया है।
    • गालो अरुणाचल प्रदेश की 26 प्रमुख जनजातियों में से एक है जो पश्चिमी सियांग ज़िले में निवास करती है।
  • महामारी से बचने के लिये अर्र रिनाम में गालो संस्कृति के अली-तरणम (Ali-Ternam) अनुष्ठान का पालन किया जाता है।
    • अली-तरणम में अली (Ali) का अर्थ ‘महामारी’ जबकि तरणम (Ternam) का अर्थ ‘पहले से ही रोकना’ है। 
    • अर्र-रिनाम को अंतिम बार लगभग चार दशक पहले जब पानी से होने वाली बीमारी ने गालो जनजाति के लोगों को प्रभावित किया था, मनाया गया था।
    • गालों लोगों द्वारा समय-समय पर पशुओं, मुख्य रूप से जंगली मिथुन (Mithun) के लिये ये अनुष्ठान किया जाता है, जो संक्रामक रोगों से बहुत जल्दी ग्रस्त हो जाते हैं। 40 वर्षों में यह पहली बार है जब यह अनुष्ठान मनुष्यों की सुरक्षा के लिये किया गया। 
  • इस अनुष्ठान में भारत सरकार के सोशल डिस्टेंसिंग दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए केवल कुछ लोगों ने ही भाग लिया और पश्चिमी सियांग ज़िले के पाँच प्रमुख प्रवेश बिंदुओं को सील करने के साथ यह अनुष्ठान समाप्त हो गया। तथा लोगों ने 48 घंटे के लिये अपने आपको घरों में बंद कर लिया और बाहर से किसी के भी प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया।

मोटोर (Motor): 

  • पूर्वी सियांग और लोअर दिबांग घाटी ज़िलों में निवास करने वाले आदि (Adi) समुदाय ने भी अर्र-रिनाम की तरह का एक अनुष्ठान मोटोर (Motor) का आयोजन किया जो उन्हें विश्वास दिलाता है कि महामारी से निपटने हेतु जंगली जड़ी-बूटियों का पता लगाने के लिये पौराणिक शक्तियाँ ओझा (झाड़-फूंक करने वाला) को आज्ञा देती हैं।

अर्रुए (Arrue):

  • अरुणाचल प्रदेश के पापुम पारे (Papum Pare) और पूर्वी कामेंग (East Kameng) जैसे ज़िलों के प्रमुख न्याशी (Nyishi) समुदाय ने अर्रुए (Arrue) का आयोजन किया जिसके तहत लोगों ने खुद को क्वारंटाइन किया।
  • अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी कामेंग (East Kameng) ज़िले के गाँवों में महामारी को रोकने के लिये ख्यासंग-रातार (Khyasang-Ratar) और मेरी (Merii) जैसे अनुष्ठान भी आयोजित किये जाते हैं

COVID-19 से निपटने के लिये सार्क का इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म

Electronic Platform for SAARC To Fight COVID-19

27 मार्च, 2020 को भारत ने COVID-19 महामारी से निपटने हेतु दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (South Asian Association for Regional Cooperation- SAARC) के सदस्य देशों की मदद के लिये एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म स्थापित करने की घोषणा की 

मुख्य बिंदु: 

  • भारत द्वारा की गई इस घोषणा को 15 मार्च, 2020 के वर्चुअल सार्क शिखर सम्मेलन के दौरान तय किया गया था।
  • इस इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म के माध्यम से संयुक्त रूप से सार्क देशों के बीच COVID-19 महामारी से निपटने हेतु सूचनाओं एवं ज्ञान, विशेषज्ञता और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान किया जाएगा।
  • जब तक कि इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म शुरू नहीं हो जाता तब तक सार्क देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान में मदद करने के लिये एक व्हाट्सएप या ईमेल समूह की मदद ली जा रही है।
  • भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा सार्क COVID-19 इमरजेंसी फंड (SAARC COVID-19 Emergency Fund) के लिये 10 मिलियन डॉलर की घोषणा के बाद COVID-19 महामारी से निपटने हेतु इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म की घोषणा इस दिशा में भारत द्वारा उठाया गया पहला कदम है।
    • सार्क COVID-19 इमरजेंसी फंड में भारत के अतिरिक्त नेपाल, मालदीव, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका के सहयोग से $15 मिलियन का फंड इकठ्ठा किया गया है।
  • प्रस्तावित इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म से आपातकालीन कर्मियों के प्रशिक्षण, रोग निगरानी और संयुक्त अनुसंधान में मदद मिलने की उम्मीद है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का सॉलिडेरिटी ट्रायल

Solidarity Trial of World Health Organisation 

27 मार्च, 2020 को भारत ने COVID -19 के उपचार हेतु वैश्विक स्तर पर दवाओं की खोज के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन के सॉलिडेरिटी ट्रायल (Solidarity Trial) में शामिल होने की घोषणा की।

मुख्य बिंदु:

  • सॉलिडैरिटी ट्रायल चार अलग-अलग दवाओं या संयोजनों का परीक्षण करेगा जिनमें रेमडेसिविर (Remdesivir), दो दवाओं लोपिनावीर (Lopinavir) एवं रिटोनावीर (Ritonavir) का संयोजन, प्लस इंटरफेरॉन बीटा (Plus Interferon Beta) और क्लोरोक्वीन (Chloroquine) शामिल की गई हैं।
  • सॉलिडैरिटी ट्रायल में इन दवाओं की प्रभावशीलता का तुलनात्मक अध्ययन किया जायेगा। इन दवाओं को COVID-19 रोगियों की देखभाल के मानक के तौर पर उपयोग किया जाता हैं।
  • वर्तमान में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical Research- ICMR)  COVID-19 का इलाज खोजने के उद्देश्य से दवाओं की आण्विक संरचना का विश्लेषण कर रहा है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद

(Indian Council of Medical Research):

  • जैव चिकित्सा अनुसंधान के निर्माण, समन्वय एवं संवर्धन के लिये भारत का यह शीर्ष निकाय विश्व के सबसे पुराने चिकित्सा अनुसंधान निकायों में से एक है। यह मुख्यालय नई दिल्ली में है।
  • इसे भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health & Family Welfare) के अंतर्गत स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (Department of Health Research) द्वारा वित्त पोषित किया जाता है।
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