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प्रारंभिक परीक्षा

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 23 फरवरी, 2019

  • 23 Feb 2019
  • 4 min read

वेस्ट टू वंडर पार्क

औद्योगिक एवं अन्य अपशिष्टों का इस्तेमाल कर दिल्ली के एक थीम पार्क में दुनिया के सात अज़ूबों की प्रतिकृति बनाई गई है।

  • इन सातों अज़ूबों की प्रतिकृति बनाने में 150 टन कचरे का इस्तेमाल किया गया है जिसमें वेस्ट मैटेरियल जैसे- पुराने बेंच, स्क्रैप मेटल, टाइपराइटर, एंगल, नट बोल्ट, साइकिल, मेटल शीट, ऑटोमोबाइल पार्ट, पुराने बर्तन और बेकार पड़े लोहे का भी इस्तेमाल किया गया है।
  • ताजमहल के ऊपरी गुंबद को बनाने में साइकिल की रिम का उपयोग किया गया है।
  • थीम पार्क के निर्माण में कचरे के इस्तेमाल के कारण ही इसे ‘वेस्ट टू वंडर’ (Waste to Wonder) नाम दिया गया है। इसे कुल 5 महीने की मेहनत तथा साढ़े सात करोड़ रूपये की लागत से बनाया गया है।
  • पार्क में बनाई गई प्रतिकृतियाँ इस प्रकार हैं-
  1. ताजमहल की 20 फुट ऊँची प्रतिकृति
  2. ग्रेट पिरामिड ऑफ गीजा की 18 फुट ऊँची प्रतिकृति
  3. एफिल टावर की 60 फुट ऊँची प्रतिकृति
  4. लीनिंग टावर ऑफ पीसा की 25 फुट ऊँची प्रतिकृति
  5. रियो डि जेनेरियो की क्राइस्ट द रिडीमर की 25 फुट ऊँची प्रतिकृति
  6. रोम के कोलोसियम की 15 फीट ऊँची प्रतिकृति
  7. न्यू यार्क के स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की 30 फुट ऊँची प्रतिकृति

दुनिया की सबसे बड़ी मधुमक्खी

हाल ही में शोधकर्त्ताओं ने इंडोनेशिया के एक दूरदराज हिस्से में दुनिया की सबसे बड़ी मधुमक्खी को लगभग 40 वर्षों बाद देखा है।

  • ब्रिटिश प्रकृतिविद् अल्फ्रेड रसल वॉलेस ने 1859 में पहली बार इसकी खोज की इसलिये इसे वॉलेस मधुमक्खी भी कहा जाता है।
  • दुनिया की सबसे बड़े आकार की इस मधुमक्खी को 1981 से ही विलुप्त माना जा रहा था जिसे 40 साल बाद ढूंढ लिया गया है।
  • इसे वैज्ञानिक भाषा में वॉलेस जाइंट बी और आम भाषा में फ्लाइंग बुलडॉग कहा जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

  • भाषायी और सांस्कृतिक विविधता तथा बहुभाषावाद को बढ़ावा देने के लिये 2000 के बाद से 21 फरवरी को हर साल अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने का विचार बांग्लादेश की पहल थी। इसे 1999 के यूनेस्को के सम्मेलन में अनुमोदित किया गया था और 2000 के बाद से दुनिया भर में मनाया जाने लगा।
  • अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2019 की थीम है-

♦ ‘विकास, शांति और सामंजस्य हेतु स्वदेशी भाषाएँ मायने रखती हैं।’

  • यूनेस्को के अनुसार, दुनिया में बोली जाने वाली अनुमानित 6,000 भाषाओं में से कम-से-कम 43 प्रतिशत संकटग्रस्त हैं।
  • यूनेस्को के मुताबिक, 10,000 से कम लोगों द्वारा बोली जाने वाली कोई भी भाषा संभावित रूप से संकटग्रस्त है।
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