रैपिड फायर
प्रीह विहियर मंदिर
- 27 Mar 2026
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खमेर वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण, प्रीह विहियर मंदिर, कंबोडिया और थाईलैंड के बीच तीव्र सैन्य झड़पों के बाद वर्तमान में गंभीर संरचनात्मक क्षरण का सामना कर रहा है।
प्रीह विहियर मंदिर
- परिचय: यह खमेर साम्राज्य द्वारा निर्मित एक प्राचीन हिंदू मंदिर है, जो कंबोडिया और थाईलैंड की सीमा पर दांगरेक पर्वत शृंखला में 525 मीटर ऊँची चट्टान के शीर्ष पर स्थित है।
- मूल रूप से यह मंदिर हिंदू देवता शिव को समर्पित था, लेकिन बाद में यह बौद्ध स्थल में परिवर्तित हो गया, जो इस क्षेत्र के धार्मिक विकास और परिवर्तन को दर्शाता है।
- निर्माण: हालाँकि इस मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में शुरू हुआ था, लेकिन इसके सबसे महत्त्वपूर्ण संरचनात्मक हिस्से खमेर राजाओं सूर्यवर्मन प्रथम और सूर्यवर्मन द्वितीय के शासनकाल में बनाए गए थे। सूर्यवर्मन द्वितीय ने ही अंकोर वाट का भी निर्माण किया था, जो कंबोडिया में स्थित एक हिंदू-बौद्ध मंदिर परिसर है।
- विशिष्ट संरचना: अधिकांश खमेर मंदिरों के विपरीत, जो पूर्व दिशा की ओर मुख किये हुए आयताकार योजना में बने होते हैं, प्रीह विहियर मंदिर लगभग 800 मीटर लंबी उत्तर-दक्षिण धुरी पर निर्मित है।
- इसमें अभयारण्यों की एक शृंखला शामिल है, जो मार्गों और सीढ़ियों से जुड़ी हुई है और चट्टान के किनारे की ओर ऊपर उठती जाती है। यह संरचना पवित्र मेरु पर्वत (जो हिंदू, जैन और बौद्ध ब्रह्मांडीय मान्यताओं में वर्णित पाँच शिखरों वाला पवित्र पर्वत है) का प्रतीक है।
- यूनेस्को स्थिति: इसे वर्ष 2008 में UNESCO द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था, क्योंकि यह ‘खमेर वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति’ है और इसमें असाधारण पत्थर की नक्काशीदार सजावट पाई जाती है।
- क्षेत्रीय विवाद: वर्ष 1904 में फ्राँस (जो उस समय कंबोडिया पर शासन कर रहा था) और सियाम (थाईलैंड) के बीच हुए एक संधि में प्रीह विहियर मंदिर को थाईलैंड में स्थित माना गया था। हालाँकि वर्ष 1907 में फ्राँसीसी अधिकारियों द्वारा बनाए गए एक मानचित्र में इसे कंबोडिया के क्षेत्र में दर्शाया गया और थाईलैंड ने कई दशकों तक इस मानचित्र पर आधिकारिक आपत्ति नहीं जताई।
- ICJ निर्णय: अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने वर्ष 1962 में निर्णय दिया कि यह मंदिर कंबोडिया का है और इस निर्णय की वर्ष 2013 में भी पुनः पुष्टि की गई। वर्तमान में यह मंदिर कंबोडिया के प्रशासन के अधीन है।
- वर्ष 2025 के अंत और वर्ष 2026 की शुरुआत में कंबोडिया और थाईलैंड के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव के दौरान सभी पाँच प्रवेश मंडप (गोपुरम) क्षतिग्रस्त हो गए।
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