रैपिड फायर
द्वारका बेसिन
- 27 Mar 2026
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वैज्ञानिकों ने हाल ही में द्वारका बेसिन में जीवाश्म स्थल खोजे हैं, जो प्रारंभिक मियोसीन युग (23 मिलियन से 5.3 मिलियन वर्ष पहले) का झरोखा प्रस्तुत करते हैं। यहाँ 42 घोंघा प्रजातियों की पहचान की गई, जो इस क्षेत्र के ऐतिहासिक रूप से उष्ण और पोषक तत्त्वों से समृद्ध होने का संकेत देती हैं।
घोंघों के अलावा, तलछटी परतें फोरामिनिफेरा (सूक्ष्म समुद्री जीव जिनके खोल/शेल्स होते हैं) से समृद्ध हैं। यह बेसिन ऊर्जा कंपनियों के लिये भी आकर्षण का केंद्र है, जो ज्वालामुखीय चट्टानों की परतों के नीचे तेल और गैस के भंडार की खोज कर रही हैं।
द्वारका बेसिन
- परिचय: द्वारका बेसिन (जलमग्न द्वारका शहर) गुजरात, भारत के आधुनिक द्वारका और बेट द्वारका के तट के पास स्थित एक शृंखला है, जिसमें जल-पुरातात्त्विक अवशेष पाए जाते हैं। यह गुजरात के सौराष्ट्र प्रायद्वीप के पश्चिमी छोर पर स्थित है।
- भूविज्ञानी सुझाव देते हैं कि यह शहर ग्लेशियल युग के बाद समुद्र स्तर में वृद्धि, टेक्टोनिक गतिविधियों या सैकड़ों वर्षों में तटीय क्षरण के कारण जलमग्न हो सकता है।
- हालाँकि, कई लोगों का व्यापक रूप से यह मानना है कि यह भगवान कृष्ण का पौराणिक राज्य था, जिसे महाभारत और पुराणों के अनुसार उनके संसार से प्रस्थान करने के बाद अरब सागर ने निगल लिया। इसे पारंपरिक रूप से कलियुग में संक्रमण के रूप में देखा जाता है।
- समयरेखा: कुछ पुरातत्त्वविदों, जैसे कि दिवंगत डॉ. एस.आर. राव, ने इन अवशेषों की उम्र लगभग 1500-2000 ईसा पूर्व (प्रोटोऐतिहासिक काल) निर्धारित की है, जो हड़प्पा सभ्यता की समाप्ति के समय से संबंधित है।
- पुरापुरातात्त्विक विरासत: 1980 के दशक से, भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) ने विशाल बलुआ पत्थर के ब्लॉकों, अर्द्धवृत्ताकार संरचनाओं और दीवार जैसी बनावटों का दस्तावेज़ीकरण किया है। विभिन्न प्रकार के 120 से अधिक पत्थर के लंगर/एंकर्स (त्रिकोणीय, ग्रैप्नेल और रिंग-स्टोन) पाए गए हैं, जो इस क्षेत्र के प्राचीन समय में एक प्रमुख बंदरगाह और घाट/जेटी होने की पुष्टि करते हैं।
- खुदाई में मिट्टी के बर्तन के टुकड़े, तांबे की वस्तुएँ, लोहे के अयस्क और मनके प्राप्त हुए हैं। एक महत्त्वपूर्ण खोज एक मुहर थी जिसमें तीन सिर वाले पशु का चित्रण किया गया था।
- आधुनिक महत्त्व: वर्तमान द्वारका शहर में द्वारकाधीश मंदिर (जगत मंदिर) स्थित है, जो एक प्रमुख कृष्ण भक्ति स्थल है और जिसे 1472 में महमूद बेगड़ा द्वारा ध्वंस किये जाने के बाद 15वीं-16वीं शताब्दी में पुनर्निर्मित किया गया था। यहाँ शारदा पीठ भी स्थित है, जो आदिशंकराचार्य द्वारा स्थापित पश्चिमी मठ है।
- गुजरात सरकार इन जल-स्थल संरचनाओं तक आम जनता की पहुँच के लिये सबमरीन पर्यटन शुरू करने की योजना बना रही है।
- यह चार धाम तीर्थस्थलों में से एक है, जिसमें उत्तर में बद्रीनाथ, पूर्व में जगन्नाथपुरी और दक्षिण में रामेश्वरम शामिल हैं।
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