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जापान ने रक्षा निर्यात नियमों को उदार बनाया

  • 22 Apr 2026
  • 21 min read

स्रोत: द हिंदू 

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की अपनी शांतिवादी नीति से ऐतिहासिक मोड़ लेते हुए जापान ने अप्रैल 2026 में हथियार निर्यात पर "पाँच श्रेणी" प्रतिबंध को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया। इस कदम से अन्य देशों को मारक आयुधों के निर्यात की अनुमति मिल गई।

  • द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद, हिरोशिमा और नागासाकी की तबाही के बाद, जापान ने एक शांतिवादी संविधान अपनाया। इसके अंतर्गत अनुच्छेद 9 युद्ध का त्याग करता है और युद्ध क्षमता वाले बलों को बनाए रखने पर प्रतिबंध लगाता है, जो गैर-आक्रामकता और अंतर्राष्ट्रीय शांति के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करता है।
  • 'पाँच श्रेणी" प्रतिबंध का अंत: पूर्व में निर्यात पाँच गैर-मारक क्षेत्रों जैसे- बचाव, परिवहन, चेतावनी, निगरानी और सुरंग-मार्जन, तक सीमित था।
    • वर्ष 2026 का संशोधन मिसाइलों, विध्वंसकों और लड़ाकू जेटों के निर्यात की अनुमति देता है। यह बदलाव जापान के घरेलू रक्षा उद्योग को पुनरुज्जीवित करने का लक्ष्य रखता है।
  • GCAP उत्प्रेरक: इस निर्णय को ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) द्वारा त्वरित किया गया, जो यूके और इटली के साथ वर्ष 2035 तक छठी पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान बनाने के लिये एक त्रिपक्षीय परियोजना है।
    • जापान को उत्पादन लागत का प्रबंधन करने और एक व्यवहार्य परियोजना भागीदार बने रहने के लिये इस जेट को तीसरे देशों को निर्यात करने की क्षमता की आवश्यकता है।
  • प्राप्तकर्त्ता और सुरक्षा उपाय: मारक आयुधों का निर्यात उन 17 देशों (अप्रैल 2026 तक) तक सीमित है, जिन्होंने टोक्यो के साथ द्विपक्षीय रक्षा-प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं (जिनमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, फिलिपींस और अमेरिका शामिल हैं)।
    • इसके अतिरिक्त ऐसे अंतरणों के लिये जापान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की स्वीकृति की आवश्यकता होती है, जो आमतौर पर सक्रिय संघर्षों में शामिल देशों या संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के अधीन देशों के लिये निषिद्ध हैं, जबकि प्राप्तकर्त्ताओं को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार उपकरण का उपयोग करने के लिये प्रतिबद्ध होना चाहिये।

भारत-जापान रक्षा सहयोग  

  • रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग: रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी सहयोग पर संयुक्त कार्यसमूह (JWG-DETC) और वर्ष 2017 से बढ़ते B2B एंगेजमेंट, बढ़े हुए उद्योग और MSME लिंकेज के माध्यम से भारत-जापान सहयोग गहरा हुआ है, जिसे वर्ष 2023 में जापान के "उपकरण और प्रौद्योगिकी अंतरण के लिये तीन सिद्धांतों" में संशोधन द्वारा और बढ़ावा मिला है, जो अधिक रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग को सक्षम बनाता है।
  • उन्नत सैन्य अंतर-संचालन क्षमता: नियमित त्रि-सेवा जुड़ाव और JIMEX, मालाबार, धर्म गार्जियन और वीर गार्जियन (वायु सेना) जैसे संयुक्त अभ्यास, साथ ही तटरक्षक सहयोग ने समन्वय और परिचालन समन्वय में सुधार किया है।

और पढ़ें:  भारत-जापान संबंधों का पुनर्मूल्यांकन 

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