रैपिड फायर
विश्व पृथ्वी दिवस 2026
- 22 Apr 2026
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विश्व पृथ्वी दिवस, जिसे अंतर्राष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस भी कहा जाता है, एक वैश्विक आयोजन है जो प्रतिवर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता ह्रास जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सामूहिक कार्रवाई को प्रेरित करना है।
- वर्ष 2026 की थीम: 2026 की थीम ‘हमारी शक्ति, हमारा ग्रह’ (Our Power, Our Planet) है, जो सामुदायिक सहभागिता, नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण तथा पर्यावरणीय क्षति के लिये जवाबदेही बढ़ाने पर विशेष बल देती है।
- ऐतिहासिक उत्पत्ति: पृथ्वी दिवस का आरंभ 22 अप्रैल, 1970 को हुआ, जिसे आधुनिक पर्यावरण आंदोलन की शुरुआत माना जाता है। इसकी पहल अमेरिका के सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन द्वारा वर्ष 1969 में हुए सांता बारबरा तेल रिसाव की घटना के बाद की गई थी।
- 1970 की प्रारंभिक रैलियों और विरोध प्रदर्शनों ने सीधे तौर पर प्रमुख पर्यावरणीय कानूनों के निर्माण तथा अमेरिका में पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) की स्थापना में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2009 में एक प्रस्ताव पारित कर 22 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस के रूप में नामित किया।
- वैश्विक पहुँच: यह अब 190 से अधिक देशों में मनाया जाता है, जिसमें सरकारें, गैर-सरकारी संगठन (NGO) और आम नागरिक एक साथ जुड़कर भागीदारी करते हैं।
- मुख्य महत्त्व: यह प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण हेतु नीतियों को आगे बढ़ाने का एक महत्त्वपूर्ण मंच है तथा भावी पीढ़ियों के लिये स्थायी जीवनशैली अपनाने के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाता है।
- पृथ्वी के संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता: भारत का सतत विकास की ओर रुख उसके पंचामृत संकल्पों में परिलक्षित होता है, जिनमें वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (नेट-ज़ीरो), वर्ष 2030 तक 50% नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना शामिल है। यह विकास को वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के साथ जोड़ते हुए कथन से उत्तरदायित्व की ओर परिवर्तन का संकेत देता है।
- इसे पर्यावरण संरक्षण हेतु एक बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण द्वारा और सुदृढ़ किया गया है, जिसमें सौर ऊर्जा विस्तार, FAME के तहत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, प्रोजेक्ट टाइगर के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण तथा राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के ज़रिये प्रदूषण नियंत्रण जैसी पहलें शामिल हैं, जो मिलकर सतत विकास के लिये व्यावहारिक मार्ग प्रदान करती हैं।
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