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सर्वोच्च न्यायालय ने दिव्यांग-अनुकूल जेल सुधारों के लिये पैनल का गठन किया

  • 22 Apr 2026
  • 14 min read

स्रोत: द हिंदू

सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट्ट की अध्यक्षता वाली एक उच्च-शक्ति प्राप्त समिति को जेलों को दिव्यांग-अनुकूल बनाने के लिये एक व्यापक योजना निर्माण का निर्देश दिया है, जिसमें सुरक्षा संबंधी विचारों के साथ सुधार को एकीकृत किया जाएगा।

  • परिचय: समिति मूल रूप से खुली सुधारक संस्थाओं में सुधार के लिये गठित की गई थी और इसके दायरे का विस्तार अब दिव्यांगता-समावेशी जेल सुधारों को शामिल करने के लिये किया गया है, जो एक व्यापक प्रणालीगत दृष्टिकोण को दर्शाता है।
    • समिति को अब सहायक उपकरणों की खरीद, रखरखाव और सुरक्षा के लिये समान मानदंड बनाने का कार्य सौंपा गया है, जो कैदियों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप हों।
  • उपाय: पिछले आदेशों न्यायालय ने सहायक उपकरणों, विशिष्ट चिकित्सा देखभाल और बढ़े हुए परिचारक अधिकारों का प्रावधान अनिवार्य किया, साथ ही उल्लंघनों के लिये दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत दंड की चेतावनी दी।
    • न्यायालय ने अधिकार-आधारित दृष्टिकोण पर ज़ोर दिया, यह कहते हुए कि दिव्यांग कैदियों को अनुच्छेद 14 और 21 के तहत संरक्षित किया जाना चाहिये, यह सुनिश्चित किया कि कारावास के दौरान समानता और गरिमा कमज़ोर न हों।
  • संरचना: समिति की संरचना का विस्तार सामाजिक न्याय और दिव्यांग सशक्तीकरण से संबंधित प्रमुख मंत्रालयों और विभागों को शामिल करने के लिये किया गया है, जिससे समन्वित संस्थागत प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो सके।
  • मूल्यांकन: न्यायालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मौजूदा कानूनों, प्रथाओं और सुविधाओं की एक संरचित, सतत और विशेषज्ञ-संचालित समीक्षा की परिकल्पना की है ताकि एकजुट कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
    • एक समयबद्ध तंत्र स्थापित किया गया है, जिसके तहत समिति को चार महीनों के भीतर एक समेकित स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

और पढ़ें: दिव्यांगजनों का सशक्तीकरण, जेल सुधार 

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