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भारत के वन कार्बन भंडारण का भविष्य

  • 21 Apr 2026
  • 23 min read

स्रोत: द हिंदू 

हाल ही में एनवायर्नमेंटल रिसर्च: क्लाइमेट में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि भारत के वन वर्ष 2100 तक अपने कार्बन भंडारण को लगभग दोगुना कर सकते हैं, जो एक ओर जलवायु परिवर्तन के शमन की बड़ी संभावनाओं को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर उभरते पारिस्थितिकीय जोखिमों को भी उजागर करता है।

  • अनुमानित कार्बन बायोमास वृद्धि: अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2100 तक वनस्पति कार्बन बायोमास में निम्न-उत्सर्जन परिदृश्य में 35% की वृद्धि, मध्यम-उत्सर्जन मार्ग में 62% की वृद्धि तथा उच्च-उत्सर्जन (जीवाश्म ईंधन-प्रधान) परिदृश्य में लगभग 97% तक वृद्धि होने का अनुमान है।
    • सबसे तीव्र वृद्धि वर्ष 2050 के बाद होने की संभावना है।
  • वृद्धि के प्रमुख कारक: यह वृद्धि दो परस्पर क्रियाशील कारकों से प्रेरित है, वायुमंडलीय CO₂ का बढ़ा हुआ स्तर (जो प्रकाश-संश्लेषण और जल-उपयोग दक्षता को बढ़ाता है) तथा बढ़ी हुई वर्षा (जो वृक्षों की वृद्धि के लिये उपलब्ध नमी को बढ़ाती है)।
  • अपरंपरागत भौगोलिक परिवर्तन: आश्चर्यजनक रूप से कार्बन भंडारण में सबसे अधिक सापेक्ष वृद्धि पारंपरिक वन क्षेत्रों के बजाय राजस्थान, गुजरात और पश्चिमी मध्य प्रदेश के मरुस्थलीय तथा अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में होने का अनुमान है।
    • भारत के सबसे पारिस्थितिक रूप से महत्त्वपूर्ण क्षेत्र, जैसे– पश्चिमी घाट और हिमालय में पारिस्थितिक संतृप्ति तथा विशिष्ट क्षेत्रीय जलवायु दबावों के कारण तुलनात्मक रूप से कम सापेक्ष वृद्धि देखी जाएगी।
  • ‘छिपे हुए दबाव’ (Masked Stress) की चेतावनी: शोधकर्त्ता सावधान करते हैं कि वन वनस्पति और कार्बन भंडारण में अनुमानित वृद्धि अनिवार्य रूप से सकारात्मक नहीं है, क्योंकि वर्तमान मॉडल मृदा पोषक तत्त्वों की सीमाओं तथा जलवायु-जनित व्यवधानों, जैसे– वनाग्नि, सूखा, कीट प्रकोप और वनोन्मूलन जैसे महत्त्वपूर्ण कारकों को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं करते हैं।
    • परिणामस्वरूप, कार्बन भंडार में दिखाई देने वाली वृद्धि गहरे पारिस्थितिकीय दबाव को छिपा सकती है, जिससे वनों की अस्थिरता, क्षरण और भविष्य में बड़े पैमाने पर कार्बन के उत्सर्जन के संभावित जोखिम को लेकर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।
  • आधिकारिक अनुमानों से भिन्नता: अध्ययन का दीर्घकालिक मॉडलिंग भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) के आधिकारिक आँकड़ों से भिन्न निष्कर्ष प्रस्तुत करता है।
    • भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) के अनुसार, वास्तविक क्षेत्रीय एवं रिमोट सेंसिंग आँकड़ों के आधार पर कार्बन भंडार में अपेक्षाकृत धीमी और स्थिर वृद्धि दर्ज की गई है, जो वर्ष 2013 में 6.94 बिलियन टन से बढ़कर वर्ष 2023 में 7.29 बिलियन टन हो गई है तथा वर्ष 2030 तक इसके 8.65 बिलियन टन तक पहुँचने का अनुमान है।
  • राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों के लिये महत्त्व: इन कार्बन गतिशीलताओं को समझना भारत के अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्यों (2031-35) को प्राप्त करने के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, जिसमें हाल ही में देश के वन कार्बन सिंक लक्ष्य को वर्ष 2035 तक 3.5-4 अरब टन CO₂ समतुल्य तक बढ़ाया गया है।

और पढ़ें: कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS) 

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