रैपिड फायर
SIDBI में इक्विटी पूंजी निवेश
- 29 Jan 2026
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को ऋण प्रवाह बढ़ाने के लिये स्मॉल इंडस्ट्रीज़ डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) में ₹5,000 करोड़ की इक्विटी पूंजी निवेश (अगले 3 वर्षों में) को मंज़ूरी दी है।
- अपेक्षित प्रभाव: यह पूंजी निवेश FY 25 में 76.26 लाख MSME लाभार्थियों की संख्या को FY 28 तक बढ़ाकर लगभग 102 लाख करने का अनुमान है, जिससे लगभग 25.74 लाख नए MSME जुड़ेंगे।
- रोज़गार सृजन: भारत के लगभग 6.9 करोड़ MSME में 30.16 करोड़ लोग कार्यरत हैं अर्थात औसतन प्रति इकाई 4.37 व्यक्ति। नए लाभार्थियों से FY 2027-28 तक लगभग 1.12 करोड़ अतिरिक्त रोज़गार सृजित होने की संभावना है।
- मज़बूत CRAR: अतिरिक्त पूंजी निवेश से SIDBI को पूंजी-से-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (CRAR) सुदृढ़ बनाए रखने में सहायता मिलेगी, क्योंकि MSME ऋण विस्तार के साथ जोखिम-भारित परिसंपत्तियों में वृद्धि होने की संभावना है।
SIDBI
- परिचय: SIDBI भारत में MSME के वित्तपोषण और विकास को बढ़ावा देने तथा उसके समन्वय हेतु शीर्ष वित्तीय संस्था है, जो वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करती है।
- कानूनी एवं विनियामक ढाँचा: इसे भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक अधिनियम, 1989 के अंतर्गत स्थापित किया गया था। यह RBI द्वारा विनियमित पाँच अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों (AIFI) में से एक है तथा इसका मुख्यालय लखनऊ में स्थित है।
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विनियमित अन्य चार अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाएँ (AIFI) हैं, एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ऑफ इंडिया (EXIM Bank), राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD), नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) तथा नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट (NaBFID)।
- मुख्य दायित्व: MSME के संवर्द्धन, वित्तपोषण और विकास के त्रि-आयामी एजेंडे को क्रियान्वित करना, जिसमें पूंजी तक पहुँच, मूल्य शृंखला में एकीकरण तथा सतत विकास पर विशेष बल दिया जाता है।
- प्रमुख कार्य: SIDBI बैंकों और MSME को पुनर्वित्त तथा प्रत्यक्ष वित्तपोषण उपलब्ध कराता है, जिसमें टर्म लोन और कार्यशील पूंजी शामिल हैं।
- यह ऋण गारंटी सहायता प्रदान करता है तथा क्षमता निर्माण और नवाचार को बढ़ावा देने जैसी प्रोत्साहनात्मक गतिविधियाँ भी करता है।
- परिचालन भूमिका: यह उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं तथा डिजिटल क्रेडिट प्लेटफॉर्म जैसे प्रमुख सरकारी उपक्रमों के लिये शीर्ष समन्वयकारी निकाय के रूप में कार्य करता है।
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