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एक ज़िला एक उत्पाद (ODOP)

  • 30 Jan 2026
  • 38 min read

स्रोत: पीआईबी 

हाल ही में एक ज़िला एक उत्पाद (ODOP) पहल राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के कारण खबरों में रही है, जो ज़िला  स्तर पर आर्थिक विकास और स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करने में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है।

एक ज़िला एक उत्पाद (ODOP) क्या है?

  • परिचय: एक ज़िला एक उत्पाद (ODOP) पहल वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसे इन्वेस्ट इंडिया के सहयोग से उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) द्वारा लागू किया जाता है
    • जापान के “वन विलेज वन प्रोडक्ट” मॉडल से प्रेरणा लेकर, ODOP प्रत्येक ज़िले के एक विशिष्ट उत्पाद की पहचान करती है तथा उसकी ब्रांडिंग और प्रचार को बढ़ावा देती है। वर्ष 2025 तक यह योजना 761 ज़िलों में 1,102 उत्पादों को शामिल करती है, जिनमें कृषि, हस्तशिल्प, वस्त्र तथा खाद्य पदार्थ शामिल हैं।
  • उद्देश्य: इस योजना का उद्देश्य स्थानीय विशेषताओं को वैश्विक ब्रांड में बदलना है, इसके लिये शिल्पकारों, किसानों और छोटे उद्यमों का समर्थन किया जाता है, साथ ही भारत की सांस्कृतिक धरोहर तथा पारंपरिक कौशल को संरक्षित किया जाता है।
    • वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश में शुरू हुई इस पहल की शुरुआत मुरादाबाद के पीतल के बर्तनों से हुई थी और इसने चिकनकारी कढ़ाई, मिट्टी के बर्तन, कालीन, चमड़े के उत्पाद तथा पीतल के बर्तन जैसी पारंपरिक शिल्प कलाओं को पुनरुज्जीवित करने में योगदान दिया।
  • दृष्टिकोण: एक ज़िला एक उत्पाद (ODOP) पहल, आत्मनिर्भर भारत और ‘वोकल फॉर लोकल’ के लक्ष्यों को पूरा करती है। यह पहल नवाचार, सतत उत्पादन और बाज़ार पहुँच को प्रोत्साहित करती है। साथ ही, यह पारंपरिक एवं पर्यावरण-सहायक उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों के लिये तैयार करने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • उत्पादों का चयन और कवरेज: राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा मौजूदा स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के आधार पर उत्पादों का चयन किया जाता है और इसकी जानकारी DPIIT (उद्योग संवर्द्धन और आंतरिक व्यापार विभाग) को दी जाती है।
    • वर्तमान में, वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और खनिज जैसे क्षेत्रों में 1,200 से अधिक ODOP उत्पाद आधिकारिक डिजिटल पोर्टल पर सूचीबद्ध हैं।
  • बाज़ार तक पहुँच और डिजिटल एकीकरण: ODOP उत्पादों को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM), ODOP बाज़ार तथा राज्य-स्तरीय ई-कॉमर्स पोर्टलों जैसे मंचों से जोड़कर व्यापक बाज़ार उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे बिक्री और पहुँच का विस्तार हो रहा है।
  • निर्यात और वैश्विक पहचान: ODOP ‘मेक इन इंडिया’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘डिस्ट्रिक्ट्स ऐज़ एक्सपोर्ट हब’ जैसी पहलों के साथ सामंजस्य बनाकर भारत के निर्यात पारितंत्र को सुदृढ़ करती है तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों और वैश्विक मंचों पर भारतीय उत्पादों का प्रदर्शन करता है।

ODOP वॉल

  • ODOP वॉल SARAS आजीविका स्टोर्स जैसे मंचों पर ज़िला-विशेष स्वदेशी उत्पादों के चयनित प्रदर्शन के रूप में कार्य करती है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण कारीगरों तथा महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) के लिये बाज़ार पहुँच और दृश्यता को बढ़ाना है।

पीएम एकता मॉल्स

  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत विकसित किये जा रहे ये मॉल स्थानीय शिल्प को राष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्रों और वैश्विक बाज़ार गंतव्यों में बदलने का लक्ष्य रखते हैं, जिससे आत्मनिर्भर और सांस्कृतिक रूप से आत्मविश्वासी भारत को समर्थन मिलेगा।
  • इन्हें ₹5,000 करोड़ की ब्याज-मुक्त सहायता (प्रत्येक राज्य के लिये कम से कम ₹100 करोड़) के साथ विकसित किया जा रहा है। 27 राज्यों में 29 यूनिटी मॉल स्वीकृत किये गए हैं, ताकि कारीगरों और स्थानीय उद्यमियों की बाज़ार पहुँच और आय में वृद्धि हो सके।
  • ये ODOP, भौगोलिक संकेतक (GI)-टैग्ड तथा हस्तशिल्प उत्पादों को बढ़ावा देने हेतु समर्पित खुदरा केंद्रों के रूप में कार्य करेंगे, जहाँ प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश के लिये ज़िला-स्तरीय विशिष्टताओं को प्रदर्शित करने हेतु निर्धारित स्थान होगा।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. ODOP क्या है?
ODOP (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) एक सरकारी पहल है जो प्रत्येक ज़िले के एक विशिष्ट उत्पाद को बढ़ावा देती है, ताकि स्थानीय आजीविका और क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहन मिले।

2. ODOP को कब शुरू किया गया?
ODOP की शुरुआत वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश में हुई थी और बाद में इसे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित किया गया।

3. ODOP का मुख्य उद्देश्य क्या है?
ODOP का मुख्य उद्देश्य ज़िला-स्तरीय आर्थिक क्षमता को उजागर करना है, स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों का ब्रांडिंग, बाज़ार पहुँच और कौशल विकास के माध्यम से समर्थन करना।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

प्रिलिम्स:

प्रश्न. विनिर्माण क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार की हाल की नीतिगत पहल क्या है/हैं? (2012)

  1. राष्ट्रीय निवेश और विनिर्माण क्षेत्र की स्थापना 
  2. 'सिंगल विंडो क्लीयरेंस' का लाभ प्रदान करना 
  3. प्रौद्योगिकी अधिग्रहण और विकास कोष की स्थापना

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3 

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)

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